ताज़ा खबर
 

बारादरी: विकास की दृष्टि से फिसड्डी है बिहार

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक होते हुए भी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद अरुण कुमार को लगता है कि जैसे वे गठबंधन का हिस्सा हैं ही नहीं। हालांकि वे प्रधानमंत्री की दृष्टि और कार्यों के प्रशंसक हैं। बारादरी की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपना व्यक्तिगत विरोध जाहिर करते हुए अरुण कुमार ने कहां कि बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है, विकास कार्य ठप्प हैं, रंगदारी और अपराध बढ़े हैं। कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद अरुण कुमार (फाइल)

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक होते हुए भी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद अरुण कुमार को लगता है कि जैसे वे गठबंधन का हिस्सा हैं ही नहीं। हालांकि वे प्रधानमंत्री की दृष्टि और कार्यों के प्रशंसक हैं। बारादरी की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपना व्यक्तिगत विरोध जाहिर करते हुए अरुण कुमार ने कहां कि बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है, विकास कार्य ठप्प हैं, रंगदारी और अपराध बढ़े हैं। कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : अगला चुनाव आप एनडीए से लड़ेंगे या अलग?
अरुण कुमार : देखिए, मैं एनडीए में हूं, पर मुझे महसूस नहीं हुआ कि एनडीए में हूं। अटलजी की सरकार में भी मैं था, पर इस बार कभी महसूस नहीं हुआ कि मैं एनडीए में हूं। तो निश्चित रूप से मेरे मन में द्वंद्व है। प्रधानमंत्री से मेरे व्यक्तिगत रिश्ते बहुत अच्छे हैं और उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले से रहे हैं। लेकिन जब हम अपने समर्थकों, अपने क्षेत्र के लोगों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं, तो मेरे मन में द्वंद्व जरूर है। मैं अभी तक तय नहीं कर पाया हूं कि एनडीए में हूं या नहीं हूं। यह द्वंद्व इसलिए हुआ, क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा के साथ मिल कर हमने पार्टी बनाई थी- राष्ट्रीय लोक समता पार्टी। नीतीश कुमार से मेरा विवाद चल रहा था, इसलिए मैंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे करके इस पार्टी को खड़ा किया। लोकसभा में हम लोगों को तीन सीटें मिली थीं। इसमें नरेंद्र मोदी का बड़ा योगदान है। जॉर्ज फर्नांडीज के कमजोर होने के बाद जब नीतीश कुमार ने अलग से संगठन बनाया, तभी उनसे मेरी ठन गई और मैं जॉर्ज के साथ मजबूती से खड़ा रहा। आज तक मैं जॉर्ज फर्नांडीज के साथ हूं। अभी जेडीयू का मिलन हुआ है, तब भी मेरी नीतीश कुमार से बन नहीं रही है, क्योंकि वे पुरानी चीजों को छोड़ नहीं पा रहे हैं।

मुकेश भारद्वाज : ऐसा क्या हुआ कि नीतीश कुमार से आपका इस हद तक बिगाड़ हो गया?
’कुछ तो यह था कि जिस तरह से लोग नीतीश कुमार को अनुकरण करते थे, मैं नहीं करता था। मैं जॉर्ज फर्नांडीज को नेता मानता था। तो, जब जॉर्ज को हटाने की बात आई तो जॉर्ज फर्नांडीज, दिग्विजय सिंह और मेरा टिकट काट दिया गया। हालांकि दिग्विजय सिंह निर्दलीय लड़ कर बांका से चुनाव जीते। पर उसके बाद लड़ाई सतह पर आ गई।

अजय पांडेय : फिलहाल आप न तो नीतीश कुमार के साथ हैं और न उपेंद्र कुशवाहा के साथ, तो क्या अब आप आरजेडी या कांग्रेस के साथ जाएंगे?
’अभी मैं एक ऐसे चौराहे पर खड़ा हूं कि खुद फैसला नहीं कर पा रहा कि क्या करना है। यों तो मैं आरजेडी के खिलाफ भी लड़ चुका हूं, पर लालू यादव ने मेरा कोई व्यक्तिगत अहित नहीं किया है। नीतीश कुमार ने किया है। नीतीश कुमार ने अपहरण तक का मुकदमा मेरे खिलाफ कराया है। एससी-एसटी को मेरे खिलाफ बरगलाने की कोशिश की, जबकि मैं अकेला नेता था, जो एससी-एसटी के हक के लिए लड़ा। नीतीश कुमार का विरोध मैं आज भी इसलिए कर रहा हूं कि लालू का विरोध ही क्यों भ्रष्टाचार को लेकर? नीतीश कुमार खुद बड़े भ्रष्टाचारी हैं लालू की अपेक्षा। सृजन घोटाला, चारा घोटाले से पांच गुना बड़ा घोटाला है। उसमें सुशील मोदी के लोग भी शामिल हैं। सृजन घोटाले में खजाने का पैसा सीधे नीतीश कुमार और सुशील मोदी के चहेतों के खाते में गया। इसलिए मैं कहता हूं कि अगर केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सचमुच प्रतिबद्ध है, तो उसे इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। त्वरित सुनवाई कराए। लेकिन मेरे कहने का यह अर्थ नहीं कि संसद में आने के लिए मैं लालू या फिर कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए बेचैन हूं।

पंकज रोहिला : तीसरा मोर्चा बनता नजर आ रहा है। उसमें आपका क्या रुख होगा?
’बनेगा, तो वह मेरे लिए सुखद होगा। मगर कभी-कभी शुभचिंतकों का दबाव आता है कि आप समझौता करें, क्योंकि संसद में जाना जरूरी है, तो मन हिलता है। मगर वैचारिक स्तर पर नीतीश और सुशील मोदी को मैंने देखा है। नीतीश ईमानदारी का लबादा ओढ़े हुए हैं और भ्रष्टाचार के नायक हैं। उनके लोगों ने वहां जो भ्रष्टाचार किया है उससे पूरा बिहार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। आज एक बड़ा रैकेट है शराब घोटाले का। दस साल तक तो इन्होंने लोगों को पियक्कड़ बनाया, फिर रातों-रात शराबबंदी कर दी। अचानक कोई शराब छोड़ देगा क्या? आज पुलिस अपराध रोकने के बजाय शराब का कारोबार करती है। इसका नतीजा यह है कि रंगदारी, गुंडागर्दी और हत्याएं बढ़ी हैं। इनके यहां प्रति महीने सौ करोड़ की शराब जब्त होती है, पर दिखाया जाता है पांच करोड़।

मुकेश भारद्वाज : क्या आपको लगता है कि एक नेता के रूप में नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है?
’उतना बरकरार नहीं है। मगर कोई सामने भी नहीं खड़ा है।
सूर्यनाथ सिंह : अगर वह जादू कम हुआ है, तो उसकी वजह क्या है?
’जैसे नोटबंदी में इनका प्रबंधन ठीक नहीं रहा, जिसके चलते बैंकों ने इनका ठीक से सहयोग नहीं किया और वह फेल हो गया। पर शुरू में गरीब लोगों तक यह बात जरूर गई कि नरेंद्र मोदी उनके लिए काम करना चाहते हैं। उनके लिए मकान बनाना चाहते हैं। पर जब मकान नहीं बना, तो लोगों को लगने लगा कि पैसा गया कहां? तो, इस तरह सरकार को झटका भी झेलना पड़ रहा है।

अरविंद शेष : नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी दोनों का नारा विकास है। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
’विकास की दृष्टि से बिहार तो फिसड्डी है और देश इस दिशा में चिंतन कर रहा है। विकास चाहिए। पर जो उम्मीद पैदा की गई थी, वह उम्मीद युवाओं में खंडित हो रही है। जिस मुद्दे को प्रधानमंत्री ने उठाया, वह जमीन पर उतर नहीं सका है। वह चाहे नौकरशाही की विफलता के कारण रहा हो, चाहे दूसरी वजहों से। वे प्रधानमंत्री के विजन को ठीक से रूपायित नहीं कर पाए हैं। चाहे वह स्किल इंडिया हो या स्टार्ट-अप जैसी योजनाएं। आप कोई ऐसा संस्थान खड़ा नहीं कर पाए, जो विश्व स्तर का हो। कौशल विकास का नारा तो दिख रहा है, पर उसका कोई नतीजा सामने नहीं आ रहा है। इनके पास ऐसे हाथ नहीं हैं, जो काम कर सकें।

पंकज रोहिला : अभी जैसे आंकड़े आ रहे हैं, उसमें भाजपा के दुबारा केंद्र में आने की संभावना है। तो क्या आप अपना समर्थन जारी रखेंगे।
’वही द्वंद्व है मेरे मन में। मैं नरेंद्र मोदी के प्रखर राष्ट्रवाद का समर्थक हूं। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत कहीं दिख ही नहीं रहा था। आज अच्छा या बुरा भारत कहीं दिख तो रहा है। दुनिया के लोग महसूस कर रहे हैं कि भारत भी कुछ है, तो वह नरेंद्र मोदी की वजह से है। नरेंद्र मोदी ने हमारी प्राचीन परंपरा को जिंदा करने की कोशिश की। अभी उनके सामने कोई दिखता नहीं है।

सूर्यनाथ सिंह : बिहार में सरेआम कभी किसी महिला को नंगे घुमाया जाता है, कभी लड़कियों के छात्रावास में घुस कर गुंडे पिटाई कर देते हैं। प्रशासन तो लचर है ही, आखिर वहां के समाज को क्या हो गया है?
’पूरा समाज शिक्षक पर निर्भर है। प्रेरित करने का काम बंद हो गया। पिछले कुछ सालों में शिक्षकत्व खत्म हो गया। जो शिक्षक हैं, उनका गुरुत्व खत्म हो गया। इस तरह जो शिक्षक ओरिएंटेड समाज था, वह पुलिस ओरिएंटेड समाज बन गया। पुलिस तो एक-दो-चार राक्षस को न ठीक कर सकती है, संपूर्ण समाज को दिशा नहीं दे सकती। नीतीश कुमार ने शिक्षकत्व का विनाश किया, शिक्षकों का अपमान किया, समाज ने भी शिक्षक को अपमानित किया। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग शिक्षक बनना पसंद नहीं करते। तो, कुंठित पीढ़ियां जन्म ले रही हैं। समाज खत्म हो गया है। पहले समाज से व्यक्ति डरता था, अब व्यक्ति से समाज डर रहा है। वह व्यक्ति चाहे राक्षस हो, उसके पास धनबल हो, पशुबल हो। उसके बल का प्रयोग है, ज्ञान का प्रयोग नहीं।

अमलेश राजू : नरेंद्र मोदी के प्रति आपके मन में अनुराग है, क्या उनकी विदेश नीति को आप ठीक मानते हैं?
’प्रखर राष्ट्रवाद का संकेत उन्होंने दिया है। इतना ही नहीं, कई मामलों में उन्होंने साहस दिखाया है, जैसे ईरान के सवाल पर कि तेल नहीं खरीदें, उन्होंने साहस दिखाया कि खरीदेंगे। बलूचिस्तान पर जो संकेत आया, पहली बार आया। चीन के साथ कड़ाई से पेश आए, जिसका नतीजा है कि आज वह बराबरी के स्तर पर खड़ा है। अफगानिस्तान की मित्रता को तवज्जो दी है। यह सरकार कुछ अमेरिकापरस्त जरूर हुई थी, पर वहां भी झुकी नहीं हैं। रूस से संबंध अच्छे हुए हैं। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत एक काले अध्याय से निकल कर बाहर आया है।

मनोज मिश्र : किसानों को लेकर आपने आंदोलन किया। क्या किसानों के मसले पर सरकार की नीतियों से आप संतुष्ट हैं।
’साथ रहते हुए भी संसद में मैं अकेला आदमी था, जिसने किसानों के मुद्दे पर तीखे सवाल उठाए। मैं मानता हूं कि किसान को लॉलीपॉप देने से उसकी समस्या का निदान नहीं होगा। किसी सरकार ने किसान के लिए सोचा ही नहीं आज तक। केवल समर्थन मूल्य से उसकी समस्या हल नहीं होने वाली। पहले किसानी में निवेश शून्य था, आज नब्बे फीसद निवेश करना पड़ता है। यह जो अंतर आया है, वह किसान को उभरने नहीं दे रहा। पहले अनाज खेत से खलिहान, खलिहान से घर आता था। अब खलिहान भी नहीं आता, सीधे बाजार में पहुंच जाता है। बाजार की पकड़ मजबूत हो गई है। इससे लड़ने के उपाय मैंने संसद में बताए, पर सरकार उसे तवज्जो नहीं दे रही। किसान की स्थिति सुधारनी है, तो जैसा तेलंगाना सरकार ने किया है कि पांच हजार रुपए प्रति बीघा प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, वैसी ही नीति बनानी पड़ेगी।

सूर्यनाथ सिंह : एनडीए से आपकी नाराजगी क्यों है?
’इसलिए नाराजगी है कि शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जो काम होना चाहिए, वह इस सरकार ने भी नहीं किया। आज अठारह-अठारह साल से शिक्षक चप्पल घसीट रहे हैं, उनकी बहाली नहीं हो रही। जब तक शिक्षक को सम्मान नहीं मिलेगा, समाज ऊंचा नहीं बनेगा। यही उम्मीद इस सरकार से भी थी, जो पूरी नहीं हुई। मैंने लोकसभा में भी यह बात उठाई, पर उसे अनसुना कर दिया गया।

अजय पांडेय : आखिर ऐसा कौन-सा गुण है नीतीश कुमार में कि जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने लालू और कांग्रेस को फांस लिया और जब जरूरत पड़ी तो तुरंत उन्हें छोड़ कर भाजपा के साथ चले गए।
’नीतीश कुमार एक मामले में बहुत चतुर हैं। हर पार्टी में वे अपने कुछ प्रशंसक रखते हैं। यहां अरुण जेटली हैं, वहां सुशील मोदी हैं। उसी तरह से कांग्रेस में उन्होंने अपने कुछ लोग रखे हुए हैं। उन्हें लगता है कि कब कौन-सा समीकरण बनाना पड़ जाए। यही विशेष गुण है नीतीश कुमार में।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App