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हम हारे हैं हताश नहीं हैं

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी का अभी तक का विकास कांग्रेस की देन है, जिसे अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली सरकार संभाल नहीं पा रही है। ये जानते ही नहीं कि विधानसभा के जरिए कैसे लोगों की सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हम एक-एक करके इनकी सारी चालाकियों पर से परदा उठाएंगे। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

सुभाष चोपड़ा

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे सुभाष चोपड़ा दिल्ली के खांटी कांग्रेसी नेताओं में शुमार किए जाते हैं। चोपड़ा ने दिल्ली में सियासत की पौधशाला कहे जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) के रास्ते राजनीति में कदम रखा और 1970 में डूसू के पहले अध्यक्ष बने। 1983 में वे मिंटो रोड क्षेत्र से महानगर परिषद के सदस्य चुने गए और पहली बार 1998 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। उसके बाद लगातार तीन बार विधायक बन कर उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक बनाई। चोपड़ा प्रदेश कांग्रेस में सचिव, महासचिव और कोषाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। वर्ष 1999 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस का पहली बार अध्यक्ष बनाया गया, जबकि वे 2003 में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष बनाए गए। यह दूसरा मौका है जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने चोपड़ा को दिल्ली में पार्टी की बागडोर सौंपी है। सबको साथ लेकर चलने की सियासी शैली उनकी बड़ी ताकत मानी जाती है।

मनोज मिश्र : दिल्ली विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती है। इसे कैसे पार करेंगे?
सुभाष चोपड़ा : यह कोई मुश्किल काम नहीं है। मुझे लोगों को सिर्फ यह बताना है कि पिछले पांच साल जिस तरह गुजरे हैं, वे कैसे रहे हैं। दिल्ली की दुर्दशा अगर किसी ने की है, तो वह केजरीवाल हैं। बस ढकोसलेबाजी, जुमलेबाजी करते रहे कि हमें केंद्र सरकार काम नहीं करने दे रही। हमने भी दिल्ली में पंद्रह साल सरकार चलाई है। सच्चाई यह है कि तब भी कई मुद्दे होते थे, जिनमें केंद्र सरकार या एलजी की तरफ से ना हो जाती थी। पर शीला जी सबको साथ लेकर केंद्र सरकार के पास जाती थीं। तब वाजपेयी जी की सरकार हुआ करती थी। कहीं कोई मुश्किल आती थी तो हम उनके पास जाते थे और समझाते थे कि यह काम दिल्ली राज्य के लिए अच्छा है। मगर इनको तो बस नारा देना होता है कि केंद्र सरकार काम नहीं करने दे रही। इस तरह इनका एकमात्र मकसद है कि इससे अल्पसंख्यक खुश होंगे। इसमें भी जो पढ़े-लिखे लोग हैं वे जानते हैं कि केजरीवाल भाजपा की बी टीम है। आप देखिए कि शुरू में जब इनकी पार्टी बनी तो उसमें ज्यादातर लोग जो आए, वे भाजपा और आरएसएस के थे और बाद में उनमें से ज्यादातर वहीं लौट गए। इस आदमी ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का नारा देकर लोगों को भरमाया। क्या वजह थी कि इनके साथ जो समझदार लोग जुड़े थे, वे इन्हें छोड़कर चले गए। इससे लोगों के मन में यह शंका पैदा हुई कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ है। हमारे पास इनसे जुड़ी तमाम बातों के जवाब हैं, जो इन्होंने लोगों से छिपा रखी हैं। वह हम लोगों को बताएंगे।

मृणाल वल्लरी : अभी केजरीवाल सरकार ने बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की, जो एक बड़ी जनकल्याणकारी योजना है। बिजली की दरें कम होने से भी लोग खुश हैं। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
’कोई भी सुविधा दिल्ली के नागरिकों को मिलती है, खासकर महिलाओं को, तो मैं उसका स्वागत करता हूं। मगर क्या पौने पांच साल अपनी बहनों-बेटियों की याद नहीं आई इनको? चुनाव से तीन महीने पहले क्यों? फिर महिलाओं को ही क्यों? जो स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे हैं, उन्हें यह सुविधा क्यों नहीं? अगर मुझे ऐसा करने का मौका मिलता, तो मैं सबसे पहले उन्हें यह सुविधा देता। अगर महिलाओं को यह सुविधा दी जा रही है, तो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को क्यों नहीं? जो लोग अनधिकृत कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों में रह रहे हैं, उनको क्यों नहीं? वरिष्ठ नागरिकों को क्यों नहीं? जब मैंने यह सवाल उठाया तो इनको कहना पड़ा कि उस पर भी हम विचार करेंगे। जब हमने सत्ता छोड़ी तब दिल्ली में बसों की संख्या थी आठ हजार और आज है महज एक हजार। जहां तक बिजली की बात है, ये बड़े-बड़े विज्ञापन देकर अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं। वह जमाना याद करें, जब दिल्ली और पानी के लिए लोग हाहाकार मचाते थे। दस घंटे, पंद्रह घंटे भी बिजली नहीं आती थी। महिलाएं मटका फोड़कर प्रदर्शन करती थीं कि हमें पानी दो। फिर हमने प्राथमिकता तय की कि दिल्ली में बुनियादी सुविधाएं दी जाएं। इस तरह बिजली, पानी, मेट्रो वगैरह की जो सुविधाएं दिल्ली को मिलीं, वे कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने उपलब्ध करार्इं। अब ये बिजली के बिल माफ कर रहे हैं, तो कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। बिजली की चोरी पर रोक हमने लगाई। सबसिडी सबसे पहले हमने देनी शुरू की। जहां तक मुफ्त देने की बात है, तो इन पौने पांच सालों में इन्होंने शुल्क के जरिए आठ हजार करोड़ रुपए इकट्ठा किए। उसमें से अगर दो सौ, तीन सौ करोड़ रुपए की मुफ्त बिजली दे भी दे रहे हैं, तो वह कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में कांग्रेस सरकार ने कभी पानी का बिल नहीं लिया। ये सब बातें लोग नहीं जानते हैं। हम बताएंगे, तो उन्हें समझ आएगा। हम एक-एक करके इनकी सारी चालाकियों पर से परदा उठाएंगे।

अजय पांडेय : पहले आपकी सीधी लड़ाई भाजपा से थी। अब भाजपा और आम आदमी पार्टी, दोनों से है। आप अपनी सीधी लड़ाई भाजपा से मानते हैं या आम आदमी पार्टी से?
’इस वक्त हमारी लड़ाई भाजपा की ए टीम और बी टीम से है। मैं बी टीम इसलिए बोलता हूं कि केजरीवाल सरकार लोगों को खुश करने के लिए रोज कोई न कोई नाटक करती है। एक तरफ तो वह दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करती है, दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा समाप्त कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का समर्थन करती है। हम भी चाहते थे कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, पर कुछ दिक्कतें थीं कि एक ही जगह पर दो सरकारें नहीं चल सकतीं। तो हमने बहुत विस्तार से इसका भी उपाय सुझाया कि नई दिल्ली को अलग कर दें।

पंकज रोहिला : आम आदमी पार्टी इस बात को भुनाती है कि बिजली पर सबसिडी उन्होंने शुरू की। इसे कैसे देखते हैं आप?
’नहीं, सब जानते हैं कि यह हमारी सरकार ने शुरू किया था। मैंने पहले भी कहा कि जैसे-जैसे बिजली की चोरी कम होती गई, वैसे-वैसे हमने सबसिडी की योजना लागू की। यह दृष्टिकोण कांग्रेस पार्टी का था। मगर ये तो मुद्दों को इसी तरह भटकाते रहते हैं। लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर इन्होंने आंदोलन चलाया था। उसे हमने तैयार किया। इन्होंने विधानसभा में उसे पारित कर दिया। मगर जब उसे लागू करने की बात आई, तो इन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लागू नहीं करने दे रही। अरे, लागू करो न! किसी ने हाथ थोड़े रोका है। बस ये लोग नाटक करते रहते हैं।

दीपक रस्तोगी : आपके पास मुद्दे जरूर हैं, पर भाजपा और ‘आप’ के पास चुनाव की रणनीति बेहतर है। उनके कार्यकर्ता सक्रिय हैं। इसे कैसे टक्कर देंगे?
’आज दिल्ली कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। एक भी आदमी नहीं बता सकते आप, जो मेरे साथ न हो। इसलिए कि मेरी सबसे दोस्ती है, सबसे मेरा प्यार है। कोई मुझसे बाहर जा नहीं सकता। मेरी महत्त्वाकांक्षा खुद कुछ बनने की नहीं है, मेरी महत्त्वाकांक्षा है कि जिस पार्टी ने इस देश को आजादी दिलवाई, जिस पार्टी ने जनकल्याण के लिए नि:स्वार्थ सेवा की, जिस पार्टी ने सभी धर्मों का सम्मान किया, उस पार्टी के लिए कुछ काम कर सकूं। इसलिए मैंने एक नया कैडर तैयार करना शुरू किया है। हमारी उपलब्धि यह है कि हमने दिल्ली के अंदर काम किया है और हमारे पास दृष्टिकोण है। हमारे पास अनुभव है। इन दोनों के पास तो कुछ भी नहीं है। विधानसभा के जरिए लोगों की सेवा कैसे की जा सकती है, इन्हें तो यह भी समझ नहीं आता।

अजय पांडेय : कांग्रेस के नेताओं पर आरोप है कि वे ड्राइंगरूम में बैठ कर राजनीति करते हैं। कभी सड़क पर नहीं उतरते, गलियों में नहीं घूमते। जनता से उनकी दूरी बन गई है। क्या आप इससे सहमत हैं?
’नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप प्रदेश में जाइए, देखिए कि क्या हालत है। मैंने कोई जादू तो नहीं किया, पर लोग आ रहे हैं, क्योंकि लोगों को प्यार चाहिए। मैं अपने लोगों को यही समझाता हूं कि जब तक आप जमीनी स्तर पर जाकर आम आदमी के सुख-दुख में भागीदार नहीं बनेंगे, तब तक कोई आपको नहीं पूछेगा। कांग्रेस की पहचान गरीब आदमी से जुड़ाव की है। हम सब मिल कर काम करेंगे और इसका नतीजा नजर आएगा।

मनोज मिश्र : कहा जा रहा था कि अजय माकन खुश नहीं हैं?
’बिल्कुल ऐसी बात नहीं है। माकन मेरे पास आए, लवली वहां थे। वालिया जी थे। ये लोग रोज मुझसे मिलते हैं। ये लोग मेरे छोटे भाई की तरह हैं। एक भी नाम ऐसा नहीं गिना सकते, जो मुझसे अलग हो। मेरा किसी से मतभेद नहीं है।

सूर्यनाथ सिंह : मगर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लोकसभा चुनाव के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस काफी कमजोर हुई है। अंदरूनी कलह बढ़ा है। क्या इसका दिल्ली विधानसभा चुनावों में लोगों पर असर नहीं पड़ेगा?
’देखिए, मैं राष्ट्रीय पार्टी की बात तो करूंगा नहीं। मेरा काम प्रदेश कांग्रेस को संभालना है, तो मैं इसी की बात करूंगा। आने वाले चुनाव में मैं कैसे बेहतर प्रदर्शन करूं, उसके लिए पूरा प्रयास करूंगा। जहां तक राष्ट्रीय राजनीति की बात है, आप बताइए कि किसकी जिंदगी में अच्छे और बुरे दिन नहीं आते? अगर हम चुनाव में हार गए, तो पार्टी खत्म नहीं हो गई। हम लोग हारे हैं, हताश नहीं हुए हैं। यही बात मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहता हूं। हममें हिम्मत कम नहीं हुई है।

पंकज रोहिला : इस चुनाव में आपके मुद्दे क्या होंगे?
’आज सबसे बड़ा मुद्दा है प्रदूषण। नौ सौ इक्यासी लोग मर चुके हैं प्रदूषण से। सत्रह लाख लोग प्रभावित हुए हैं इससे। सच्चाई यह है कि पांच साल पहले भी तो पराली जलती थी! दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र से शीला दीक्षित सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए पुरस्कार मिला था। मगर आज हालत यह है कि प्रदूषण की वजह से हाहाकार मची हुई है। जब सीएनजी बसें आठ हजार से घट कर एकर हजार होंगी, तो उसका असर तो दिखेगा ही। लोग अपना वाहन तो इस्तेमाल करेंगे ही। गाड़ियां इतनी बढ़ गई हैं, इतना सारा निर्माण कार्य चल रहा है कि प्रदूषण नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है। कांग्रेस के किए किसी काम को ये लोग संभाल नहीं पाए।

मुकेश भारद्वाज : अभी आपको क्या लगता है कि दिल्ली में पार्टी को शून्य से कहां तक ले जा पाएंगे?
’शून्य कुछ नहीं होता। राजनीति में कभी भी शून्य नहीं होता। जहां तक दिल्ली विधानसभा की बात है, हम पूर्ण बहुमत लेकर आएंगे।

निर्भय पांडेय : मुसलिम और दलित हमेशा आपके साथ रहते आए थे, अब क्या हुआ कि वे छिटक गए हैं?
’कोई नहीं छिटका है। अभी देश में जो माहौल है, वह दहशत का है। अल्पसंख्यक जानते हैं कि उनके साथ अगर कोई कंधे से कंधा मिला कर खड़ा हो सकता है तो वह है कांग्रेस पार्टी। हम हमेशा उनके साथ रहे हैं। हममें भेदभाव की भावना नहीं है। दिवाली के दिन मैंने वाल्मीकि बस्ती में जाकर दिवाली मनाई।

मनोज मिश्र : पहले घोषणा हुई कि कीर्ति आजाद को दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बनाया जाएगा, फिर वह फैसला बदल दिया गया। क्यों?
’यह सिर्फ लोगों का कयास था। घोषणा तो इसकी हुई ही नहीं थी। नाम तो चलते रहते हैं। किसी भी पार्टी में पांच-छह नाम चलते हैं। कीर्ति मेरे छोटे भाई की तरह हैं। उनके साथ मेरा लंबा जुड़ाव है। मेरे लिए खुशी की बात है कि वे अब हमारे साथ हैं।

अजय पांडेय : हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस ने आर्थिक मंदी और बेरोजगारी को मुद्दा बनाया था। क्या दिल्ली के चुनाव में भी यही मुद्दे रहेंगे?
’अभी दिल्ली सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई। मैं पूछता हूं कि जब नौकरियां ही नहीं हैं तो न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का क्या फायदा? छोटे दुकानदारों के पास काम नहीं है। तरह-तरह के शुल्क लगा दिए गए हैं। यही चीजें तो हमें लोगों को बतानी हैं। लोगों के हित से जुड़ा कोई भी मामला हो, हम किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। लोग इस बात को जानते हैं।

दीपक रस्तोगी : दिल्ली में कैसे प्रत्याशियों को उतारने का इरादा है?
’मुझे दस-पंद्रह दिन और दीजिए, मैं दिखा दूंगा कि दिल्ली में कांग्रेस है क्या।

सूर्यनाथ सिंह : आपकी टीम कब तक गठित हो जाएगी?
’मैं टीम बनाने की परवाह नहीं करता। हमारा हर कार्यकर्ता हमारी टीम में है। हर वह कार्यकर्ता हमारे साथ है, जो सोनिया गांधी, राहुल गांधी के नेतृत्व में विश्वास करता है। जो अपने नेता में विश्वास नहीं करता, वह हमारे साथ नहीं हो सकता। जो काम करता है, वही समिति में आएगा। कार्यकर्ता ही पार्टी चलाएगा। हमने कार्यकर्ता से कह दिया है कि तुम योजना बनाओ कि क्या करना है और कैसे करना है। वह करो। मेरी जिम्मेदारी है कि मैं वहां साथ में रहूंगा। हमारा काम है कि लोगों को जागरूक करें। इन दोनों पार्टियों के गलत कामों के बारे में उन्हें बताएं।

निर्भय पांडेय : बाहरी दिल्ली के लोगों की शिकायत रही है कि यहां जिस भी पार्टी की सरकार आई, उसने उनकी बुनियादी सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा। उसे लेकर आपकी क्या योजनाएं हैं।
’उनके लिए हम जो कुछ कर सकें, वह कम है। उन लोगों ने हमें रहने के लिए अपनी जमीन दी। मगर आज गांवों के अंदर हालत यह है कि सीलिंग कर दी गई। उनकी दुकानें बंद करा दी गर्इं। आज उनके पास रोजगार की समस्या है। जनसुविधाएं तो धीरे-धीरे सब जगह पहुंच रही हैं, पर मुख्य समस्या है पेट भरने की। वे अन्नदाता हैं। जब वही भूखे रहेंगे, तो क्या फायदा।

दीपक रस्तोगी : आपने भ्रष्टाचार की बात की, जबकि खुद कांग्रेस पर भ्रष्टाचार की छाया अब भी बनी हुई है!
’कांग्रेस कभी भ्रष्टाचार के पक्ष में नहीं रही है। वह मनमोहन सिंह थे, जिन्होंने अपनी सरकार के लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, तो उन्हें बाहर किया। उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए।

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