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बारादरी: पूरे देश में पहुंची मदद की डाक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास, संचार, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री संजय धोत्रे का कहना है कि लाल रंग की डाक पेटी और खाकी वर्दी वाले डाककर्मी से पूरे देश का भावनात्मक नाता रहा है। भारत जैसे बड़े देश में कोरोना महामारी के फैलाव को रोकने के लिए पूर्णबंदी घोषित होने के बाद रेल, बस, विमान की रफ्तार थम गई। ऐसे समय में जरूरी दवाएं, पीपीई किट, मास्क, वेंटिलेटर, जांच किट आदि सामान को देश के कोने-कोने तक डाक विभाग ने पहुंचाया। पानीपत और अन्य जगहों पर तो पीपीई किट पहनकर ये कोरोना योद्धा जन-जन तक अपनी सेवाएं पहुंचाते रहे। कोरोना के इस समय में डाक और इंटरनेट जैसी सेवाओं की अहमियत पर ऑनलाइन माध्यम से हुई ई-बारादरी का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास, संचार, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री संजय धोत्रे।

संजय धोत्रे : 26 फरवरी, 1959 को महाराष्ट्र के अकोला में जन्म। अमरावती के राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। छात्र जीवन से ही सामाजिक आंदोलनों से जुड़ गए और कॉलेज छात्र संघ के महासचिव भी रहे। राजनीति से जुड़े होने के साथ ही एक उद्यमी और किसान भी हैं। सामाजिक असमानता के खिलाफ मुखर रहे हैं। खेती-किसानी पर बात करने वाले ये उन चेहरों में हैं जो अपने क्षेत्र (अकोला) के अंतिम आदमी तक पहुंच रखते हैं। कृषि और सहकारिता के संस्थानों को विकसित करने में योगदान दिया है और इनसे जुड़े कई संस्थानों के अहम पदों को संभाला है। कृषि क्षेत्र में अथक योगदान के कारण इन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में भाजपा में जिला अध्यक्ष से लेकर कई अहम पदों पर सार्थक भूमिका निभाई।

मृणाल वल्लरी : कोरोना महामारी के संकट के समय डाक विभाग के कर्मचारी कोरोना योद्धा की तरह ही काम कर रहे हैं। ऐसे में विभाग को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उनके ऊपर कार्य का कितना दबाव बढ़ा?
संजय धोत्रे : कोरोना महामारी के खिलाफ आज सारा विश्व पूरी ताकत से लड़ रहा है। इनमें सबसे आगे हमारे डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, बैंककर्मी आदि हैं। इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर डाक विभाग के कर्मचारी भी काम कर रहे हैं। भारत जैसे बड़े देश में इस महामारी का फैलाव रोकने के लिए पूर्णबंदी को मार्च में घोषित किया गया।

ऐसे में जब हवाई जहाज, रेल और बसों के चक्के थमे तो डाक विभाग ने आवश्यक दवाएं, निजी सुरक्षा उपकरण, जांच किट, मास्क, वेंटिलेटर आदि सामान को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया। इस अवधि के दौरान प्रतिदिन औसतन 23,350 किलोमीटर चलकर डाक विभाग की गाड़ियों ने 75 मीट्रिक टन पत्र और 17,182 बैग मंजिल तक पहुंचाए। 18 मई 2020 तक डाक विभाग ने पूरे देश में लगभग 1,900 टन दवाएं और मेडिकल उपकरण पहुंचाए। इसके साथ ही 53 लाख स्पीड पोस्ट (1,234 टन), 5365 लाख पार्सल (564 टन) और 38.81 लाख अन्य वस्तुएं पहुंचाने का काम विभाग ने किया। हरियाणा के पानीपत और अन्य जगहों पर तो डाकियों ने पीपीई किट पहनकर अपनी सेवाएं दीं। इतना ही नहीं डाक विभाग के कर्मचारियों ने लाल क्षेत्र और विषाणु रोकथाम क्षेत्र में भी प्रशासन का बखूबी साथ निभाया।

सूर्यनाथ सिंह : देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले जिन लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं, उन्हें पैसा पहुंचाने के लिए डाक विभाग की ओर से किस तरह के इंतजाम किए गए?
संजय धोत्रे : डाक विभाग ने हमेशा अपने कामकाज में नवीनतम प्रौद्योगिकी का अनुसरण किया है। चाहे पूर्णबंदी जैसी स्थिति हो या किसी कारणवश अगर कोई व्यक्ति बैंक या एटीएम तक नहीं जा पा रहा हो तो उसके बैंक खाते का पैसा उसे घर पर ही देने की सुविधा डाक विभाग देता है। किसी व्यक्ति के पास किसी भी बैंक का खाता हो और यदि वह खाता आधार आधारित भुगतान सुविधा से जुड़ा हो तो हमारा विभाग 10,000 रुपए तक का भुगतान खाताधारक के घर पर ही कर सकता है। जब से पूर्णबंदी शुरू हुई है, तब से आज तक लगभग 74 लाख ग्राहकों को उनके घर पर जाकर 1,300 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की राशि वितरित की गई। इसके अलावा भारतीय डाक भुगतान बैंक के द्वारा भी 248 लाख लेन-देन के माध्यम से 5,780 करोड़ रुपए के भुगतान किए गए।

संजय शर्मा : इस दौरान डाकियों ने पत्रों और मनीआर्डर के अलावा कौन-कौन सी वस्तुएं लोगों तक पहुंचार्इं?
संजय धोत्रे : डाक विभाग की ओर से पूर्णबंदी के दौरान आवश्यक चिकित्सा सामग्री के अलावा सुविधा से वंचित लोगों को खाने के पैकेट/सूखा राशन वितरित किया। जिला प्रशासनों और गैर-सरकारी संगठनों को खाद्य वितरण के संचालन और क्रियान्वयन में मदद पहुंचाई। पोस्टल नेटवर्क के माध्यम से चार लाख से अधिक खाद्य पैकेट/सूखा राशन वितरित किए गए।

संजय स्वतंत्र : पूर्णबंदी के दौरान टेलीफोन ही लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने का सबसे बड़ा साधन रहा। इसका कितना दबाव आपके ऊपर आया और उसे किस तरह से निभाया गया?
संजय धोत्रे : जैसे ही देशव्यापी पूर्णबंदी घोषित हुई टेलीफोन संचार ही ऐसा साधन रहा जिससे लोग एक-दूसरे से संपर्क में रहे। संपर्क व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उचित कदम उठाए गए। सबसे पहले तो लोगों को राहत देने के लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों ने प्री-पेड कनेक्शन की वैधता बढ़ाई। बीएसएनएल ने अपने प्री-पेड उपभोक्ताओं को कुछ क्रेडिट भी दिया ताकि इस दौरान अगर रिचार्जिंग की सुविधा तुरंत उपलब्ध न हो तो उनके कनेक्शन बंद न हो।

प्रेम प्रकाश : पूर्णबंदी के दौरान ज्यादातर कंपनियों को कम कर्मचारियों के साथ काम करने के लिए कहा गया था। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों में किस तरह काम हुआ? क्या उन्हें अपने पूरे कर्मचारी दफ्तर में बुलाने पड़े?
संजय धोत्रे : दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने दूरसंचार नियंत्रण कक्ष, अवसंरचना प्रदाताओं (आइपी), मूलभूत उपकरण निर्माताओं (ओईएम) और राज्य प्रशासनों के साथ मिलकर निकटवर्ती निगरानी, तत्काल निर्णय लेने, संसाधन आबंटन और समन्वय के लिए वॉर-रूम स्थापित किए। इससे सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख कार्मिकों/संसाधनों के आवागमन और नेटवर्क उपकरणों के रख-रखाव के लिए अनुमति प्राप्त करने की शुरुआती चुनौतियों का प्रबंधन करने में सहायता मिली है। दूरसंचार क्षेत्र के कर्मचारी अपने एक्सचेंजों के प्रबंधन, संचालन एवं रख-रखाव संबंधी कार्यकलाप करते रहे हैं ताकि दूरसंचार नेटवर्क चौबीस घंटे और सातों दिन चलता रहे। उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवाएं दी जा रही हैं।

आर्येंद्र उपाध्याय : कोरोना की वजह से देशव्यापी पूर्णबंदी के दौरान बड़ी संख्या में लोग घर से काम कर रहे हैं। घर से काम करने के लिए इंटरनेट सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में इंटरनेट की लगातार आपूर्ति के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए?
संजय धोत्रे : कोरोना महामारी में दुनिया के बड़े हिस्से ने ‘घर से काम’ करने की ओर कदम बढ़ाए। भारत में, बड़े निगम, स्टार्ट-अप, प्रौद्योगिकी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों आदि को केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से सलाह दी गई कि वे पूर्णबंदी अवधि के दौरान घर से काम को प्रोत्साहित करें। दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने भी इसे ध्यान में रखते हुए अपने कुछ नियमों में बदलाव करते हुए घर से कार्य के लिए सहायता की, अन्य सेवा प्रदाताओं को छूट दी है।

शुरू में यह छूट कुछ समय तक दी गई थी बाद में इसमें समय-समय पर विस्तार किया गया। वर्तमान में इसे 31 जुलाई तक बढ़ाने की अनुमति दी गई है। आज देश में लाखों लोग हर दिन वीडियो कॉलिंग का उपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया द्वारा एक दूसरे से संपर्क कर रहे हैं। मनोरंजन के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में कई स्कूल और कॉलेजों ने अपने विद्यार्थियों के लिए ऐप-आधारित आनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं।

पूर्णबंदी के कारण शहरों के व्यापारिक केंद्रों की डाटा ट्रैफिक वृद्धि इतनी ज्यादा नहीं हुई है। लेकिन इस अवधि में आवासीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल डाटा ट्रैफिक में करीब 15 से 20 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई। सामान्य तौर पर, दूरसंचार सेवा प्रदाता नेटवर्क डिजाइन करते समय, ट्रैफिक में अचानक वृद्धि को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए पूर्णबंदी में इंटरनेट आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट महसूस नहीं की गई है।

संदीप भूषण : पूर्णबंदी के दौरान लोगों ने इंटरनेट की गति को लेकर कई तरह की समस्याओं की शिकायत की। इसे दूर करने के लिए सरकार की ओर से क्या समाधान किए गए?
संजय धोत्रे : पूर्णबंदी की अवधि में देश में मोबाइल डाटा ट्रैफिक बढ़ गया है। 21 मार्च 2020 को मोबाइल डाटा ट्रैफिक लगभग 282,000 टेराबाइट था जो पूर्णबंदी के दौरान बढ़कर 300,000 टेराबाइट हो गया। कुल डाटा ट्रैफिक में लगभग 40 से 50 फीसद ट्रैफिक मनोरंजन व शैक्षणिक वीडियो के डाउनलोड/स्ट्रीमिंग का है। पूर्णबंदी की अवधि के दौरान मनोरंजन व शैक्षणिक वीडियो के डाउनलोड/स्ट्रीमिंग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई। इसके नतीजतन, वीडियो डाटा ट्रैफिक की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 70 फीसद हो गई है।

आमतौर पर वीडियो डाउनलोड/स्ट्रीमिंग की वजह से उपभोक्ताओं को इंटरनेट धीमी गति से प्राप्त हो सकता है। इसके मद्देनजर सरकार ने वीडियो स्ट्रीमिंग और अन्य कंटेंट प्रदाताओं से बातचीत की। इसके बाद इन कंटेंट प्रदाताओं ने मोबाइल नेटवर्क पर केवल स्टैंडर्ड डेफिनीशन (एसडी) वीडियो (हाई डेफिनीशन के स्थान पर) स्ट्रीम करने का फैसला किया है। इस कदम से डाटा ट्रैफिक काफी अंश तक घट गया और उपभोक्ताओं को इंटरनेट बेहतर गति से प्राप्त हुआ।

गजेंद्र सिंह : कश्मीर में इंटरनेट को सुरक्षा कारणों से बंद या बहुत धीमी गति से उपलब्ध कराया जा रहा है। पूर्णबंदी के दौरान वहां के लोगों, विशेषकर विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसका सरकार के पास क्या हल है?
संजय धोत्रे : कई दशकों से भारत के दुश्मन जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद फैला रहे हैं। देश के दुश्मन कश्मीरी नौजवानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इस कार्य में सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में हमें पहले यह देखना चाहिए कि देश की अखंडता और प्रदेश की शांति व्यवस्था बरकरार रहे। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन समय-समय पर उचित निर्णय लेता है। इन हालात को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट, टीवी, रेडियो आदि सभी माध्यमों के द्वारा आनलाइन शिक्षा का उपयोग जम्मू-कश्मीर में किया जा रहा है। दूरदर्शन और स्थानीय केबल नेटवर्क द्वारा टेली कक्षाएं चलाई जा रही हैं ताकि पूर्णबंदी में भारत के अन्य क्षेत्र के विद्यार्थियों की तरह ही जम्मू कश्मीर के विद्यार्थियों की भी आनलाइन पढ़ाई जारी रहे।

दीपक रस्तोगी : सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों में कोरोना संकट के दौरान गलत जानकारी की बाढ़ सी आ गई है। इसे रोकने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए।
संजय धोत्रे : फर्जी खबरों की समस्या दुनिया भर में वास्तविक और व्यापक है। कानून का पालन करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी भी खबर या जानकारी को आसानी से इंटरनेट से नहीं हटा सकता है। सिर्फ जो जानकारी गैरकानूनी रूप में दी गई है या 69ए का उल्लंघन करती है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे परिदृश्य में किसी भी फर्जी खबर को रिपोर्ट करने के लिए अधिकतम जागरूकता और सही मंच आवश्यक है।

‘मायजीओवी’ प्लेटफॉर्म फर्जी खबरों को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी तरह, पीआइबी फैक्ट चेक सरकार की नीतियों और योजनाओं पर गलत सूचना की जांच के लिए चौबीस घंटे काम कर रहा है। उपयोगकर्ता सीधे सोशल मीडिया या हेल्पलाइन नंबर या ईमेल पर फर्जी खबर की सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और आइटी मंत्रालय के तहत सीईआरटी-इन, सीडीएसी जैसे विभाग साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए समय-समय पर सलाह साझा करते रहते हैं।

पंकज रोहिला : पूरे देश में विद्यालयों ने ऑनलाइन शिक्षा देने की शुरुआत की है लेकिन इस दौरान देखा गया है कि इससे विद्यार्थियों की आंखों, कमर और गर्दन में दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। क्या सरकार ऑनलाइन शिक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी करने वाली है?
संजय धोत्रे : देश ने एक असाधारण परिस्थिति में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली की तरफ अपने कदम बढ़ाए हैं। विषाणु के फैलाव को रोकने में एक तरफ हम सभी प्रयासरत हैं, साथ ही इसके कारण उद्योगों का, व्यवसायों का ज्यादा नुकसान न हो, शिक्षा व्यवस्था भी सुचारु रूप से चले इस पर भी ध्यान दे रहे हैं। वर्तमान स्थिति में ऑनलाइन शिक्षा एक तात्कालिक स्वरूप में सिमट कर न रहे और हमारी शिक्षा प्रणाली का ही एक अहम हिस्सा बने, इसके लिए एचआरडी मंत्रालय कार्यरत है। हाल ही में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम ई-विद्या’ कार्यक्रम घोषित किया गया। हम इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि बच्चे एक साथ बहुत ज्यादा समय तक स्क्रीन के सामने न रहें। इसे लेकर सीबीएसई, सी-डेक और एनसीईआरटी कार्य कर रहे हैं। एनसीईआरटी द्वारा इस संबंध में दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे।

प्रियरंजन : केंद्र सरकार के परामर्श पर सीबीएसई ने दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक से 15 जुलाई का समय तय किया है। सरकार के पास क्या इस तरह की कोई जानकारी है कि उस समय विद्यार्थियों का घर से निकलना सुरक्षित होगा?
संजय धोत्रे : परीक्षार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए परीक्षाओं की तिथियां सार्वजनिक करते वक्त समय-सारिणी में विषाणुनाशक द्रव्य, मास्क और भौतिक दूरी के विषय में बताया गया है। इसके साथ ही अभिभावकों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने बच्चे को कोरोना से बचाव के विषय में बताएंगे और देखेंगे की उनका बच्चा स्वस्थ है। सीबीएसई द्वारा परीक्षा से पूर्व विद्यार्थियों, अभिभावकों, परीक्षा स्थल और परीक्षा स्थल पर ड्यूटी करने वालों के लिए अलग-अलग और विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

सुशील राघव : देश नई शिक्षा नीति का इंतजार बहुत समय से कर रहा है। नई नीति काफी समय से तैयार होकर सरकार के पास पहुंच भी गई है। नई शिक्षा नीति को किस महीने में जारी किया जाएगा?
संजय धोत्रे : राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए गठित डॉक्टर के कस्तूरीरंगन समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के प्रारूप के रूप में अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके प्रारूप को आम जनता के विचार के लिए सार्वजनिक किया गया। इस पर विभिन्न हितधारकों के दो लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिसके आलोक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रारूप तैयार किया गया। इस नीति का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उसके व्यापक प्रचार एवं टिप्पणी के लिए अनेक हितधारकों से विमर्श करने की एक लंबी परंतु सार्थक प्रक्रिया अपनाई गई है। सुझावों को संकलित कर नीति को अमल में लाने के लिए किन-किन चरणों से गुजरना पड़ेगा, उस पर भी चर्चा चल रही है। अंतिम रूप मिलते ही इसे कार्यान्वित कर दिया जाएगा।

प्रस्तुति : मृणाल वल्लरी/सुशील राघव

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