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बारादरी: राजनीति में प्रदूषण फैला रहे हैं केजरीवाल

पूर्वी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के सांसद महेश गिरी का कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण दिल्ली में अपराधों में कमी आई है। आम आदमी पार्टी और केंद्र के बीच टकरावों पर उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की परेशानी केवल भाजपा से नहीं, बल्कि उन्हें नौकरशाही और संविधान से भी समस्या है, वे राजनीति में प्रदूषण फैला रहे हैं। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

आठ फरवरी 1974 को नाशिक में जन्मे महेश गिरी सत्रह साल की उम्र में घर छोड़ कर साधु बन गए।

मनोज मिश्र : अध्यात्म से राजनीति में आने के बाद आपका क्या अनुभव रहा? क्या यह यात्रा जारी रहेगी या मन में कोई बदलाव आया है?
महेश गिरी : जहां तक यात्रा की बात है, यह जारी रहेगी। मुझे राजनीति से मोह नहीं है, इसलिए इससे मोहभंग की बात भी नहीं आती। राजनीति में जिम्मेदारी समझ कर आया हूं, मोह की वजह से नहीं आया। जिम्मेदारी समझ कर आया हूं, जिम्मेदारी से कभी भागा नहीं जा सकता, इसलिए यह यात्रा जारी रहेगी।

अजय पांडेय : राम मंदिर निर्माण पर आपकी क्या राय है?
’मंदिर बनना ही चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं है। उसे सर्वोच्च न्यायालय बनवाएगा, संत समाज बनवाएगा या संसद-संविधान बनवाएगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा, पर बनना ही चाहिए, इसमें कोई प्रश्नचिह्न नहीं है। इसे बनाने के लिए चाहे अध्यादेश लाना पड़े, कानून बनाना पड़े, जैसे भी हो मंदिर बनना ही चाहिए। इससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। भारतीय जनता पार्टी इस बात से दूर नहीं हो सकती।

मनोज मिश्र : आपने चुनाव में जितने वादे किए थे, उन्हें पूरा करने में कितने सफल हुए हैं?
’मैं सफलता को इस तरह देखता हूं कि जो-जो वादे मैंने किए थे, उन्हें पूरा करने के कितने प्रयास किए। व्यवस्था में कई तरह की चुनौतियां होती हैं। उन चुनौतियों से लड़ते हुए मैं अगर अपनी संतुष्टि देखूं, तो बहुत ज्यादा है। मेरा पहला वादा था कि मैं पूर्वी दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय का ईस्ट कैंपस लेकर आऊंगा, जो कभी किसी ने नहीं सोचा था, और वह हुआ। यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। ईस्ट कैंपस अभी बन रहा है। दूसरा मेरा वादा था पूर्वी दिल्ली में कनेक्टिविटी ठीक करने का। उसमें भी सफल हुआ। फिर बारापुला को विस्तारित करवाने के लिए प्रयास किया। कोंडली को मेट्रो से जुड़वाया। इन कामों को लेकर मुझे संतोष है।

पंकज रोहिला : बारापुला में जमीन आबंटन को लेकर विवाद खत्म नहीं हो पाया है, इसकी क्या वजह है?
’अगर दिल्ली में हमारी सरकार होती, तो मैं गारंटी देता हूं कि अब तक वह पूरा हो गया होता। हाईवे तो हमारे अधीन है, पर बारापुला में जमीन से जुड़ा मामला दिल्ली सरकार के अधीन है। मगर मैंने पीडब्लूडी के साथ मिल कर उसे जल्द से जल्द बनवाने का प्रयास किया।

दीपक रस्तोगी : चिल्ला गांव को आपने गोद लिया है। उसमें कितना संतोषजनक काम हुआ है?
’पहली बात तो यह कि दिल्ली में तीन-चार संसदीय क्षेत्र ऐसे हैं, जहां गांव हैं ही नहीं। जो गांव हैं, उनका शहरीकरण हो चुका है। पर चूंकि प्रधानमंत्री जी ने हर सांसद को एक गांव गोद लेने को कहा, इसलिए मैंने भी उसे आगे बढ़ाया। चिल्ला पूरी तरह गांव है ही नहीं। पर हमने उसके विकास के लिए प्रयास किया कि वहां के लोगों को अधिक से अधिक प्राथमिक सुविधाएं कैसे मिलें। पहले वहां पानी और सीवर की बड़ी समस्या थी, आज वे समस्याएं नहीं हैं। वहां समुदाय भवन नहीं था, वह बनवाया। स्किल सेंटर बनवाया हमने वहां पर। ऐसी कई सुविधाएं हमने उपलब्ध कराई हैं।

आर्येंद्र उपाध्याय : दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और जबसे यह सरकार बनी है, तबसे केंद्र के साथ उसका टकराव बना हुआ है। इसके पीछे बुनियादी समस्या क्या है?
’अरविंद केजरीवाल की परेशानी केवल भारतीय जनता पार्टी से नहीं है, उन्हें नौकरशाही से भी समस्या है, उन्हें संविधान से भी समस्या है, केंद्र सरकार से समस्या है। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल खुद एक समस्या बन चुके हैं। अगर आप चार-पांच साल पहले देखते, तो ये सब चीजें नहीं थीं, तब भी विरोधी पार्टी की सरकारें हुआ करती थीं। तब न तो इस तरह नगर निगम का झगड़ा था और न इस तरह प्रदूषण की समस्या थी।

मृणाल वल्लरी : आपने कहा कि केजरीवाल के आने के बाद प्रदूषण बढ़ा है। मान लीजिए उनकी सरकार न रहे, भाजपा की सरकार आ जाए, तो अभी जो दिल्ली में प्रदूषण का हाल है उस पर क्या रुख रहेगा।
’केजरीवाल न सिर्फ दिल्ली में, बल्कि राजनीति में भी प्रदूषण फैला रहे हैं। जहां तक हमारी सरकार की बात है, जब ईस्टर्न एक्सप्रेस-वे और वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन हुए, तो जो हजारों गाड़ियां दिल्ली में आकर प्रदूषण फैलाने का काम करतीं, उनसे मुक्ति मिली। यह काम केंद्र सरकार ने किया, न कि केजरीवाल सरकार ने।

अजय पांडेय : नगर निगम भाजपा के हाथ में है, पर सफाई का बुरा हाल है। गाजीपुर आपके संसदीय क्षेत्र में है, वहां कचरे का पहाड़ खड़ा है, जिससे समस्याएं पैदा हो रही हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
’मैं लगातार इसके लिए प्रयास करता रहा हूं। मैं संबंधित लोगों से मिलता रहा हूं कि इसका कोई बेहतर विकल्प ढूंढ़ा जाए। पर जहां भी आम आदमी पार्टी सरकार के हाथ में काम है, वहां टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है और कोई निर्णय नहीं हो पाता। रही एमसीडी की बात, तो वह राज्य सरकार की उपेक्षा की वजह से अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा। दिल्ली सरकार जैसे ही उन्हें उनका वेतन दे दे, नगर निगम के कर्मचारी ठीक से काम करना शुरू कर देंगे।

मुकेश भारद्वाज : आप पार्टी के महासचिव और पूर्वोत्तर के प्रभारी भी हैं। क्या कारण है कि पूर्वोत्तर के लोग भाजपा को वोट देंगे?
’पूर्वोत्तर को मुद्दा तो हमेशा बनाया गया, पर वहां काम किसी ने भी नहीं किया। इस बार प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के लिए एक अलग से मंत्रालय बनाया और वहां जो भी विकास कार्य किए जा सकते थे, उस पर ध्यान दिया। आज वहां बदलाव नजर आ रहा है और वह बदलाव लोग भी महसूस कर रहे हैं, जिसके लिए वे भाजपा को चुन रहे हैं।

सूर्यनाथ सिंह : दिल्ली में कानून-व्यवस्था केंद्र के हाथ में है। क्या वजह है कि यहां अपराध की दर कम नहीं हो रही, महिलाओं के खिलाफ हिंसा कम नहीं हो रही?
’आप आंकड़े देखेंगे, तो केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद इस दिशा में काफी काम हुए हैं। मैंने अपने कोष से सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। कभी किसी ने इस तरह सांसद निधि से कैमरे नहीं लगवाए। पर चूंकि दिल्ली बार्डरों से घिरी हुई है, अपराध करने वाले अपराध करके सीमा पार कर लेते हैं और उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, इसलिए यहां अपराध की दर ज्यादा रही है, पर भाजपा की सरकार आने के बाद इस पर काफी अंकुश लगा है।

अजय पांडेय : सोमवार को दिल्ली विधानसभा का सत्र इसलिए बुलाया गया है कि मुख्यमंत्री की आंख में मिर्ची क्यों झोंकी गई और मतदाता सूची से नाम क्यों हटाए गए। क्या ये मुद्दे विधानसभा सत्र बुलाने के हो सकते हैं?
’आज दिल्ली विधानसभा एक सर्कस की तरह चल रही है। मिर्ची फेंकना उचित नहीं है। मैं इसकी निंदा करता हूं। यह अपनी बात रखने का कोई तरीका नहीं हो सकता। पर आम आदमी पार्टी को भी सोचने की जरूरत है कि अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो क्यों हो रहा है? केजरीवाल को इस पर आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर क्यों उनके साथ हो रहा है, उनसे कहां गलतियां हुई हैं। उन्हें इस पर विधानसभा का सत्र बुलाने के बजाय इसकी चिंता करनी चाहिए कि दिल्ली का प्रदूषण कैसे कम हो।

मुकेश भारद्वाज : कश्मीर में जिस तरह विधानसभा भंग की गई, उसे आप किस तरह देखते हैं?
’देखिए, कश्मीर में पहले जो हालात थे, उन्हें अगर आप देखते, और अभी के हालात को देखें, तो भाजपा ने एक प्रयास किया था साझा सरकार बनाने का, ताकि कश्मीर के लोगों को न्याय मिले, उन्हें सुविधाएं मिल सकें। पर जब पीडीपी सरकार में राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ की बात आई और जब उनकी मंशा ठीक नहीं लगी, तो भाजपा ने मूल्यों के खिलाफ न जाने का फैसला किया और वहां सरकार भंग हो गई। आज कश्मीर और कश्मीरी लोगों के हितों के बजाय अपने हितों के लिए राजनीतिक दल एकत्रित हो रहे हैं। इसलिए संविधान के दायरे में रहते हुए राज्यपाल ने वहां की विधानसभा को भंग किया।
मुकेश भारद्वाज : पर आज जो कश्मीर में हो रहा है, वह तो पूरे देश में हो रहा है- गठबंधन बनाने का प्रयास।
’प्रयास हो तो रहा है, पर समझने की बात है कि यह जो महागठबंधन बनाने की बात हो रही है, ये लोग 2014 में भी थे। इसलिए इनके एकत्र होने से भाजपा को कोई नुकसान नहीं होने वाला।

सूर्यनाथ सिंह : ऐसा क्यों है कि जब आप संस्कृति की रक्षा के लिए उतरते हैं, तो विवाद पैदा हो जाता है। क्या कोई सरकार संस्कृति की रक्षा के नाम पर लोगों को पीछे लौटने को कह सकती है?
’संस्कृति की रक्षा सरकार का धर्म है। यहां बात है, सांस्कृतिक संसाधनों की। संस्कृति से जुड़ी कई इमारतें हैं, कई धरोहर हैं। राम मंदिर की बात हो रही है, पर जगह-जगह जो मकबरे बने हुए हैं, उसका भी विकास हो रहा है। उसे भी तो देखिए। इसमें पीछे लौटाने की बात नहीं है। जिस सांस्कृतिक पहचान को विकृत कर दिया गया है, उसकी पहचान मिटा दी गई है, उसे उसकी पहचान दिलाने का काम हो रहा है।

आर्येंद्र उपाध्याय : मगर जब आप एक गुंबद गिराते हैं, तो उसका अंतरराष्ट्रीय असर पड़ता है, दुनिया भर में एक नकारात्मक संदेश जाता है।
’गुंबद सरकार ने नहीं गिराया। सरकार मंदिर भी नहीं बना रही, वह बना नहीं सकती। वहां मंदिर बने, इसके लिए संत समाज एकत्रित होकर सरकार को बाध्य कर रहा है कि वह अध्यादेश लाए, कानून बनाए। बाबरी मस्जिद भी सरकार ने नहीं गिराई। उसे तो देश के लोगों की आस्था ने गिरवाया। हां, वहां व्यवस्था सुचारु हो, सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है।

मृणाल वल्लरी : श्रीश्री रविशंकर ने राम मंदिर के लिए बहुत प्रयास किए, पर क्या वजह है कि वे विफल हुए?
’विफल तो वे हुए नहीं हैं। प्रयास केवल एक वक्त की घटना नहीं होती। वह निरंतरता में होता है। वह अब भी चल रहा है। इसका नतीजा आएगा। चार सौ पांच सौ सालों की समस्या एक दिन में हल नहीं हो जाएगी। उनका प्रयास है कि यह समस्या शांतिपूर्ण ढंग से हल हो जाए, किसी तरह की हिंसा न हो। कई मुसलिम नेता उनके समर्थन में आए हैं। इसका नतीजा बिल्कुल आएगा और मंदिर भी बनेगा।

महेश गिरी: आठ फरवरी 1974 को नाशिक में जन्मे महेश गिरी सत्रह साल की उम्र में घर छोड़ कर साधु बन गए। पच्चीस साल में दत्तात्रेय पीठ के पीठाधीश बने। श्रीश्री रविशंकर से प्रभावित होकर आर्ट आॅफ लिविंग संस्था से जुड़े और 2013 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। यूपीए सरकार के दौरान शुरू हुई भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े। अण्णा हजारे और बाबा रामदेव के साथ भी जुड़े। पूर्वी दिल्ली में भाजपा के टिकट पर शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित (कांग्रेस) और महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी (आम आदमी पार्टी) को परास्त कर दमदार जीत दर्ज की। पार्टी के महासचिव और पूर्वी दिल्ली से सांसद के तौर पर कमजोर तबके के लोगों से नाता जोड़ने की कोशिश करने वाले गिरी साधु-संतों के बीच अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।

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