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बारादरी: कांग्रेस ही है दिल्ली में विकल्प

कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली का कहना है कि दिल्ली की जनता दोहरी मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और भाजपा की नाकामियों की वजह से दिल्ली में अगला विकल्प कांग्रेस ही बनेगी। चौरासी के दंगों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा दंगे के दोषियों को दंड मिलने का समर्थन किया है, सिख समुदाय का कांग्रेस से करीबी रिश्ता रहा है। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

Author January 20, 2019 4:02 AM
कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली

मनोज मिश्र : अभी तीन राज्यों के चुनाव नतीजों से कांग्रेस उत्साहित है। क्या आपको लगता है कि राहुल गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे?
अरविंदर सिंह लवली : कांग्रेस ने बार-बार स्पष्ट किया है और उसकी नीति भी रही है कि संसद सदस्य तय करते हैं कि कौन प्रधानमंत्री बने। पर निश्चित रूप से कांग्रेस के नेता राहुल जी हैं, इसलिए अगर कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो उसमें कोई किंतु-परंतु है नहीं। मगर चुनाव के बाद जो भी स्थिति बनेगी उसमें निर्णय पार्टी हाई कमान का होगा। जहां तक तीन राज्यों की बात है, इनके चुनाव नतीजे इस बात का संकेत हैं कि देश के लोग क्या सोच रहे हैं।

दीपक रस्तोगी : आप भाजपा में भी गए थे। ऐसा क्या हुआ कि आपने कांग्रेस में वापसी की?
’मुश्किल से मैं पांच या छह महीने वहां रहा था। मैंने उस समय भी कहा था कि मैं वैचारिक रूप से वहां मिसफिट था। जब मैं भाजपा में गया था, तब भी कहा था कि यह मेरे लिए कोई खुशी का क्षण नहीं है। इसमें दो राय नहीं कि चाहे हमारे बीच मतभेद रहा हो, पर मुझे वह कदम नहीं उठाना चाहिए था। मैं भाजपा में इसलिए नहीं गया था कि वह उस समय उफान पर थी। न मैं इसलिए वापस आया हूं कि अब वे नीचे की तरफ हैं। मेरी सोच के हिसाब से मूल रूप से यही मेरी पार्टी है। मैं अपने आत्मसम्मान के लिए राजनीति में आया हूं। मैं सब कुछ कर सकता हूं, पर आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं कर सकता।

मुकेश भारद्वाज : अभी चौरासी के दंगों को लेकर फैसला आया है। क्या आपको लगता है कि इस दंगे से आहत सिख समुदाय के जख्मों पर कुछ मरहम लगा है?
’देखिए, कांग्रेस ने हमेशा यह कहा है कि चौरासी के दंगों में जो भी दोषी रहा है, उसे दंड मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीति ज्यादा हो रही है। लोगों के जख्मों को बार-बार कुरेदने का काम हो रहा है। चौरासी के दंगों के बाद कांग्रेस दिल्ली में तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। पांच-पांच सिख विधायक भी कांग्रेस के टिकट से चुने जा चुके हैं। सिख बहुल क्षेत्रों में हम लोग लगातार विजयी होते रहे हैं। पंजाब में दो बार कांग्रेस की सरकार बन चुकी है। सिखों की आनंद कारज कानून की मांग थी, उसे कांग्रेस ने ही पारित कराया। जो सिख काली सूची की वजह से पंजाब से बाहर चले गए थे, उन्हें मुख्यधारा में लाने की पहल सोनिया गांधी जी ने की। दिल्ली गुरु तेगबहादुर जी की शहादत की वजह से जानी जाती है, पर भाजपा की अकाली दल के समर्थन से बनी सरकार रही और किसी को ध्यान नहीं आया कि उनके नाम से स्मारक बने। इसकी पहल कांग्रेस ने की। तो, सिखों और कांग्रेस का रिश्ता बहुत नजदीकी का रहा है।

पंकज रोहिला : शीला दीक्षित के अध्यक्ष बनने के समारोह में जगदीश टाइटलर के आने पर जो विवाद हुआ, उसे किस तरह देखते हैं?
’शीला जी ने गुरु तेगबहादुर मेमोरियल बनवाया, पंजाबी भाषा को दूसरी राज्यभाषा का दर्जा मिले, इसका फैसला किया। उस दिन शीला जी पदभार ग्रहण कर रही थीं, तो उसमें उनका कहना ठीक था कि वे तो तय नहीं करतीं कि कौन मेहमान आएगा, कौन नहीं। पर शीला जी का सिखों के प्रति क्या लगाव है, दिल्ली के लोगों को अच्छी तरह मालूम है।

सूर्यनाथ सिंह : शीला दीक्षित को अध्यक्ष बनाने के पीछे क्या वजह है, क्या इसलिए कि पहले वाले अध्यक्ष का कामकाज संतोषजनक नहीं था? या पार्टी को भरोसा है कि शीला जी ज्यादा अच्छे तरीके से पार्टी को संभाल पाएंगी?
’हर अध्यक्ष का एक कार्यकाल होता है। अजय माकन जी अपने कार्यकाल से ज्यादा समय तक अध्यक्ष रह चुके हैं। फिर उनके स्वास्थ्य संबंधी भी कुछ कारण थे। हर अध्यक्ष की अपनी-अपनी भूमिका होती है। शीला जी पंद्रह साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रही हैं और उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिलेगा। मगर अजय जी ने जो काम किया है, उसे भी किसी रूप में कम करके नहीं आंका जा सकता।

अजय पांडेय : जब आप दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तभी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को समर्थन देने का फैसला हुआ। अब क्या आपको कभी अफसोस होता है कि हमने वह समर्थन क्यों दिया?
’आम आदमी पार्टी को समर्थन देने का फैसला मेरे अध्यक्ष बनने से कुछ दिन पहले किया गया था। दूसरा, अगर आपको याद हो, तो उस सरकार के खिलाफ समर्थन वापस लेने का फैसला भी हम लोगों ने ही विधानसभा में किया था कि जनलोकपाल लेकर आओ। हमने कभी जनलोकपाल का विरोध नहीं किया। पर वे तो सिर्फ सत्ता में रहना चाहते थे। आज उनकी सरकार को चार साल होने को आए, पर जनलोकपाल का जिक्र तक नहीं कर रहे। जहां तक समर्थन देने की बात है, हमने कहा था कि एक नई पार्टी आई है उसे मौका दिया जाना चाहिए और दिल्ली पर दोबारा चुनाव नहीं थोपा जाना चाहिए, इसलिए हमने समर्थन दिया।

मनोज मिश्र : आप दिल्ली के शिक्षामंत्री भी रहे हैं। आम आदमी पार्टी अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि शिक्षा में सुधार को बता रही है। यह कितना सही है?
’दिल्ली के लोगों के साथ इससे बड़ी ठगी कोई हो ही नहीं सकती। शिक्षा को जिस तरह ये लोग चला रहे हैं, उसे लेकर तो इन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले बनने चाहिए। ये कह रहे हैं कि हमने शिक्षा का बजट बढ़ा दिया, हमने स्कूलों की कायापलट कर दी। नए स्कूल तो नहीं बनाए, पर नए कमरे बनवा दिए। आप नए स्कूल क्यों बनवाते हैं, नए कमरे क्यों बनवाते हैं? इसलिए कि ज्यादा बच्चे पढ़ सकें। पर यह दुर्भाग्य है कि 2013 में जब हमने छोड़ा था, तब दिल्ली में जितने बच्चे पढ़ते थे, उससे डेढ़ लाख कम बच्चे आज पढ़ रहे हैं। जबकि दिल्ली की आबादी इन पांच सालों में बढ़ी है। तो, सरकारी स्कूलों में बच्चे बढ़ने चाहिए कि घटने चाहिए! आज देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, हर बच्चे को शिक्षा मिलनी चाहिए, पर यहां डेढ़ लाख बच्चे कम हो गए। दसवीं-बारहवीं के नतीजे गिरे हैं। जब हम दिल्ली की सत्ता में आए थे तब यहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत 7.1 था। पर जब छोड़कर गए थे तो 1.4 पर छोड़ कर गए थे। पर वह प्रतिशत बढ़ कर 3.2 हो गया है। यह अपने आप में एक आपराधिक मामला है। इन्होंने सिर्फ कुछ स्कूलों में कमरे बनवा दिए, और कमरे भी नहीं बनवाए पुराने कमरों को ठीक करने का काम किया है। आपने शिक्षा का बजट बढ़ा दिया, पर जब बच्चों की संख्या कम हो गई, अध्यापकों की संख्या कम हो गई, तो वह बजट किसके लिए है?

अजय पांडेय : आज अरविंद केजरीवाल कच्ची कॉलोनियों में घूम-घूमकर कह रहे हैं कि इन्हें पक्का करने का काम कोई कर सकता है, तो वह वही कर सकते हैं। यह कहां तक ठीक है?
’मुझे यह सौभाग्य प्राप्त है कि भारत सरकार से आदेश लेकर पंद्रह सौ में से करीब तेरह सौ अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत करने की अधिसूचना निकाली। पंद्रह कॉलोनियों के नक्शे भी पास हो गए थे। उनमें से दस कॉलोनियों की रजिस्ट्री खुलनी थी, पर इनकी सरकार आने के बाद उन कॉलोनी वालों के साथ अन्याय हुआ, क्योंकि ये सिर्फ कुछ लोगों को लाभ देना चाहते थे। जिस तरह इनके मंत्रियों पर जमीन खरीदने के आरोप लग रहे हैं, वह अपने आप में जांच का विषय है। इन्होंने कहा कि हम नए सिरे से कॉलोनियों की बाउंड्री बनाएंगे। इसका मतलब हुआ कि इन्हें नए सिरे से सरकार से आदेश लेना पड़ेगा और तब कहीं बाउंड्री बन पाएगी। इसमें देरी सिर्फ अरविंद केजरीवाल की वजह से हुई है। इसी तरह परिवहन को लेकर इनकी सरकार का काम शिथिल रहा। जितनी बसें हम खरीदकर गए थे, उसमें एक भी नई बस की बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसलिए आज दिल्ली में प्रदूषण की जो समस्या है, उसकी एक बड़ी वजह यही है। 2010 में अध्ययन हुआ था कि दिल्ली में दस हजार बसें होनी चाहिए। इस तरह आज पंद्रह हजार बसें होनी चाहिए। पर आज रह गई हैं करीब तीन-साढ़े तीन हजार। हम सत्तावन-अट्ठावन सौ बसें डीटीसी की और हजार बसें क्लस्टर की छोड़कर गए थे। अब सात हजार में से घटकर बसें तीन हजार रह गई हैं, ऐसे में दिल्ली में प्रदूषण बढ़ेगा नहीं, तो क्या होगा!

आर्येंद्र उपाध्याय : दिल्ली में कांग्रेस की सरकार ने अच्छे काम किए, पर क्या वजह है कि वह हार गई?
’पंद्रह सालों के शासन में लोगों में सत्ता विरोधी लहर रही होगी। हम ऐसा नहीं कहते कि सारे काम हमने अच्छे ही किए। कुछ काम गलत हुए होंगे। फिर लोगों को लगा होगा कि दूसरी सरकार आएगी, तो बेहतर काम करेगी। पर जब दूसरी सरकार के कामकाज को लेकर तुलना करते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि किसने अच्छा काम किया।

मृणाल वल्लरी : अभी आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह किसी से गठजोड़ नहीं करेगी, अकेली चुनाव लड़ेगी। कहा जा रहा है कि इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलने वाला है।
’तीन तरफ से मार पड़ रही है। इसलिए यह चुनाव इस बात से ऊपर उठ चुका है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव इसकी निशानी हैं। भाजपा दावा करती थी कि उसने सांगठनिक स्तर पर सबको खत्म कर दिया है, पर ऐसा नतीजा नहीं आया। लोग केंद्र और दिल्ली दोनों सरकारों के कामकाज से दुखी हैं। इसलिए निश्चित रूप से लोग इनके खिलाफ कदम उठाएंगे। आज दिल्ली में व्यापार पर जीएसटी की मार पड़ रही है। जो लोग गांव छोड़ कर दिल्ली काम करने आए थे, वे काम न होने की वजह से गांव वापस लौट रहे हैं। इसलिए, मुझे एक कारण नजर नहीं आता कि लोग इन्हें वोट देंगे।

मुकेश भारद्वाज : क्या राष्ट्रीय मुद्दे दिल्ली के चुनाव पर असर डालेंगे या यहां के लोग अपने ढंग से निर्णय करेंगे?
’देखिए, दिल्ली का चुनाव राष्ट्रीय चुनाव होता है। दिल्ली ने हमेशा पूरे देश को राह दिखाई है। यह इतिहास रहा है कि लोगों ने दिल्ली में जिसे जिताया है, केंद्र में भी उसी की सरकार बनी है। यह भी इतिहास रहा है कि दिल्ली में जिस पार्टी की सातों लोकसभा सीटें आई हैं, अगली बार उसे एक भी सीट नहीं मिली है। दिल्ली के लोग हमेशा राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करते हैं। इस चुनाव में भी करेंगे।

अजय पांडेय : जिस तरह दिल्ली में विधानसभा चल रही है, सत्रावसान नहीं किया जाता, क्या आपको लगता है कि यह विधानसभा की गरिमा को चोट पहुंचाने का काम हो रहा है?
’दिल्ली विधानसभा का बड़ा गौरवशाली इतिहास रहा है। इस विधानसभा में जिस तरह असंवैधानिक रवैया अपनाया जा रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस तरह विधानसभा का सत्रावसान नहीं किया जा रहा है, उसमें भगवान न करे कभी दिल्ली में कोई संकट आ गया, तो उस वक्त न तो उपराज्यपाल कोई निर्णय ले सकते हैं और न राष्ट्रपति। इस तरह आप न केवल संवैधानिक मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं, बल्कि दिल्ली की डेढ़ करोड़ आबादी की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। इसी तरह विधानसभा में बहसों का स्तर भी काफी नीचे गिरा है। यही होता है, जब गैर-तजुर्बेकार लोग सत्ता में आते हैं।

सूर्यनाथ सिंह : अरविंद केजरीवाल बार-बार कहते हैं कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है। क्या वास्तव में ऐसा है या फिर उनकी सरकार के पास कोई योजना नहीं, कोई दृष्टि और इच्छाशक्ति नहीं है?
’राजनीति में एक कहावत है कि आप जिस वजह से जीते हैं, उसे जारी रखें। मुझे लगता है कि केजरीवाल साहब वही कर रहे हैं। बार-बार झगड़ा करके वे खुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं। कोई ऐसी सरकार नहीं हो सकती, जो आपको काम करने से रोक दे। आज क्यों सड़कों के सुधार में दिक्कत आ रही है? कोई सरकार ऐसी नहीं है जिससे चाहे जितना मतभेद हो, वह आपको सड़क, फ्लाईओवर बनाने से रोक दे, बसें खरीदने से रोक दे। मगर उन्होंने इस बात की लड़ाई कभी नहीं लड़ी कि दिल्ली में बसें क्यों नहीं आ रही हैं, एक भी नया अस्पताल क्यों नहीं खुला, इसलिए लड़ाई नहीं लड़ी कि नए स्कूलों के लिए जमीन क्यों नहीं आबंटित की गई। इसलिए नहीं लड़ी कि वृद्धावस्था पेंशन सही समय पर मिले। वे बस इस बात के लिए लड़ते रहे कि उन्हें तबादले करने के अधिकार मिलें, इसलिए लड़ी कि अफसर उनकी बात मानें। वे सिर्फ अपने अधिकारों के लिए लड़े, इसलिए नहीं लड़े कि दिल्ली का विकास हो। वे उपराज्यापाल के पास धरना देने जाते हैं, तो इसलिए नहीं कि दिल्ली का विकास हो, वे इसलिए जाते हैं कि मुख्य सचिव को हटाओ।

मुकेश भारद्वाज : तीन राज्यों में जीत के बाद कांग्रेस युवा शक्ति और अनुभवी लोगों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर चलती नजर आ रही है। क्या आपको लगता है कि इसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा?
’अगर अनुभवी और युवा लोगों को साथ लेकर चलते हैं, तो उसमें सभी तरह के लोगों को लाभ मिलता है। अब समय की पुकार है कि सभी इकट्ठा होकर चलें।

अरविंदर सिंह लवली- 11 दिसंबर, 1968 को लुधियाना में जन्मे अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस के युवा, प्रभावशाली और समन्वयकारी चेहरों में से एक हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री तेग बहादुर खालसा कॉलेज से डिग्री ली और कांग्रेस की युवा इकाई एनएसयूआइ से जुड़े। चार बार कांग्रेस के विधायक रहे। शीला दीक्षित की अगुआई वाली कांग्रेस की सरकार में शिक्षा, पर्यटन, भाषा, शहरी विकास, राजस्व, परिवहन, गुरुद्वारा चुनाव और गुरुद्वारा प्रशासन के मंत्री का पदभार संभाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। अप्रैल, 2017 में पार्टी से नाराजगी के कारण भाजपा में शामिल हो गए थे, लेकिन फरवरी 2018 में यह कहते हुए कांग्रेस में वापस आ गए कि वहां वे वैचारिक रूप से बेमेल थे। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की नीतियों को लेकर विभिन्न मंचों पर मुखर हैं।

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