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विजन कुमार पांडेय के सभी पोस्ट

राजनीति: लाभों का निजीकरण, हानि का सरकारीकरण

बैंक चाहे सरकारी हो या निजी,सरकार को मदद के लिए हाथ बढ़ाना ही पड़ता है। अगर सभी निजी बैंक भी नाकाम हो गए तो...

राजनीति : प्लास्टिक बनाम पर्यावरण

पॉलीथिन के थैलों और अन्य प्लास्टिक-निर्मित चीजों का इस्तेमाल लोगों को बहुत सुविधाजनक लगता है। वे इनके इतने आदी हो चुके हैं कि राजी-खुशी...

राजनीति- अज्ञान से उपजा ग्रहण का भय

चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण जहां पूरी तरह स्पष्ट खगोलीय घटनाएं हैं, वहीं दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिनके लिए ग्रहण किसी खतरे का प्रतीक...

मुद्दा: प्रतिभा पलायन के दुष्परिणाम

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और एसोचैम जैसे संस्थानों को इस बात पर ध्यान देने कि जरूरत है कि इसे कैसे रोका जाए।

‘शिक्षा’ कॉलम में विजन कुमार पांडेय का लेख ‘कहां से लाएं कुशल शिक्षक’

आजादी के सत्तर साल बाद भी अगर देश में स्कूली शिक्षा को पटरी पर नहीं लाया जा सका है तो यह एक बेहद चिंताजनक...

‘विज्ञान’ कॉलम में विजन कुमार पांडेय का लेख : सुराख का रहस्य

अगर आप ब्लैकहोल में गिर जाएं तो क्या होगा? शायद आप सोचते हों कि आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा संभव तो है लेकिन इसके...

मुद्दा : परमाणु हथियारों की होड़

जैसे-जैसे अपने परमाणु कार्यक्रमों के विकास में लगे देशों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे दुनिया भर में नाभिकीय सामग्री का परिवहन भी बढ़...

पर्यावरण : ताप की तपिश

हवा में कार्बन की औसत मात्रा 400 पार्ट प्रति मिलियन तक के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। यह तय मानकों से 43 फीसद...