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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

तवलीन सिंह का कॉलम: गरीबी और खोखली योजनाएं

मैं जब भी देहातों में घूमती हूं, अक्सर पूछती हूं इस योजना के बारे में और मालूम होता है कि इसका असली लाभ उन्हीं...

तवलीन सिंह का कॉलम: यह अमन का रास्ता नहीं

कश्मीर घाटी उस समय दशक लंबे हिंसक दौर से गुजर कर निकल रही थी, जिसमें न इंसानियत थी, न जम्हूरियत। रही बात कश्मीरियत की,...

तवलीन सिंह का कॉलम: दो मोर्चों पर सबसे ज्यादा नाकाम रहे नरेंद्र मोदी

रियो में फिर वही हुआ, जो अक्सर होता है भारतवर्ष के साथ ओलंपिक खेलों में। यानी छोटे-छोटे देश हमारे विशाल देश से ज्यादा पदक...

वक्त की नब्जः नई कश्मीर नीति की जरूरत

प्रधानमंत्री ने जब पिछले सप्ताह कहा कि उनकी कश्मीर नीति वही रहेगी, जो पूर्व कांग्रेस सरकारों की रही है दशकों से, तो मुझे यकीन...

तवलीन सिंह का कॉलम: मोदीजी, जाग जाइए! आपने आरएसएस के हवाले कर दिया है अपना जनादेश

प्रधानमंत्री ने सोनिया गांधी की सेहत को लेकर ट्वीट करके चिंता तो व्यक्त की, लेकिन क्या उनको इस बात की चिंता नहीं हुई कि...

वक्त की नब्जः विकास की धुंधलाती उम्मीद, विकास व परिवर्तन अभी भी सपना

इस बार जब प्रधानमंत्री लाल किले से हिसाब देंगे देशवासियों को अपने कार्यकाल का, उपलब्धियां कम ही गिना पाएंगे। विकास और तरक्की हुई है...

वक्त की नब्ज : आजादी की आड़ में

मैं श्रीनगर काफी जाया करती थी उन दिनों, इस वास्ते कि कश्मीर पर किताब लिख रही थी और याद है मुझे कि किस तरह...

वक्त की नब्जः इस हवा का रुख समझना होगा

आइएसआइएस अपनी खिलाफत अब तकरीबन खो बैठा है। जिन इराकी शहरों पर उन्होंने कब्जा करके अपना देश बनाया था, वहां से उनको भगाया जा...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख : आर्थिक सुधारों के दौर में

जहां 2014 के चुनाव अभियान के दौरान बातें किया करते थे भारत को संपन्न, समृद्ध देश बनाने की, आज बातें ज्यादा करते हैं गरीबों...

‘वक्त की नब्ज’ : राजन के रहते न रहते

पिछले साल जब तथाकथित बढ़ती असहनशीलता की बातें शुरू हुर्इं, तो गवर्नर साहब ने इस बहस में कूद कर लेक्चर दिया सहनशीलता पर। हो...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख : चुनाव का रास्ता तनाव नहीं

क्या हिंदुत्व के बल पर उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने का निर्णय कर लिया गया है? क्या वे दिन वापस लाने की कोशिश की...

तवलीन सिंह का कॉलम : तालीम की कमजोर बुनियाद

नई शिक्षा नीति का लक्ष्य होना चाहिए देश भर में सरकारी स्कूलों का स्तर केंद्रीय विद्यालयों तक पहुंचाना। मुश्किल नहीं है यह, क्योंकि अगर...

तवलीन सिंह का कॉलम : नई सुबह अभी दूर है

धर्म-मजहब से जुड़ी एक खुशखबरी भी थी पिछले सप्ताह, वह यह कि गुलबर्ग सोसाइटी में जिन्होंने आग लगाई थी 2002 के गुजरात दंगों के...

तवलीन सिंह का कॉलम – वक़्त की नब्ज़ : उम्मीदों के दो साल

प्रधानमंत्री वास्तव में प्रशासन में सुधार लाना चाहते हैं, जैसा कि चुनाव अभियान में कहा करते थे, तो हर सरकारी महकमे में सुधार करना...

तवलीन सिंह का कॉलम – वक़्त की नब्ज़ : डूबती नैया के खेवनहार

सच तो यह है कि कांग्रेस की राजनीति पुरानी हो गई है और यह बात उसकी चुनावी रणनीति में दिखने लगी है। विडंबना यह...

तवलीन सिंह का कॉलम – वक़्त की नब्ज़ : विकास पर नजर की जरूरत

भाजपा मुख्यमंत्री अपना ज्यादा समय मुंबई में बॉलीवुड और क्रिकेट के सितारों की संगत में व्यतीत करते दिखते हैं। उनके मंत्री अपनी आलीशान कोठियों...

तवलीन सिंह का कॉलम- वक़्त की नब्ज़ : इन दो सालों में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इरादे नेक जितने भी हों, जब तक अमल सही ढंग से नहीं होगा तब तक भारत की सदियों पुरानी समस्याएं...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्जः भ्रष्टाचार की परतें

अगस्ता वेस्टलैंड ने अच्छा मौका दिया है मोदी सरकार को इन चीजों में परिवर्तन लाने का। सो, बहुत जरूरी है कि इस मौके को...