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श्रीभगवान सिंह के सभी पोस्ट

विमर्शः साहित्य में वृद्ध विमर्श

हिंदी साहित्य में दलित-विमर्श, स्त्री-विमर्श, आदिवासी-विमर्श, किन्नर-विमर्श (थर्ड जेंडर विमर्श) के बाद अब वृद्ध-विमर्श की भी धमक सुनाई देने लगी है। वैसे आजकल जिस...

विमर्शः साहित्य से विस्थापित होता अन्य

भारत में रचित साहित्य की एक खास विशिष्टता रही कि उसमें ‘अन्य’ को भी उतना ही महत्त्व दिया गया है, जितना मनुष्य को। ‘अन्य’...

विमर्श: हिंदी आलोचना और गांधी

हिंदी आलोचना में गांधी प्रभाव से किनाराकशी की शुरुआत आचार्य रामचंद्र शुक्ल से ही हो गई थी, जिन्हें हिंदी आलोचना का सुदृढ़ स्थापत्य खड़ा...

राजनीतिः मोहनदास से महात्मा तक

गांधी की सविनय अवज्ञा के दो स्तर या दो आयाम थे। प्रथम आयाम का संबंध व्यक्ति द्वारा अपनी आंतरिक बुराइयों तथा अवगुणों की...

गांधी की पराजय

जब उनके चहेते दिल्ली के संसद भवन से लेकर लाल किले तक आजादी का जश्न मना रहे थे, तब यह बूढ़ा ‘अर्द्धनग्न फकीर’ कोलकाता...

विमर्श- आलोचना भी खेल है

महावीर प्रसाद द्विवेदी को महज नैतिकतावादी, स्थूलता का पोषक बता कर उपहास उड़ाया जाने लगा, तो राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को हिंदू पुनरुत्थान का कवि...

विमर्श- हिंद स्वराज और कामायनी

मशीनीकरण के खतरनाक स्वरूप से ‘हिंद स्वराज’ में गांधी ने आगाह किया था- ‘‘यंत्रों से यूरोप उजड़ रहा है और वहां की हवा भारत...

राजनीतिः बोलियों की बिसात पर

हिंदी भारत की राष्ट्रीय पहचान की भाषा बन चुकी है और सूरीनाम, मॉरिशस, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों में बसे भारतवंशी अपने बच्चों को गर्व...

राजनीतिः गांधी के सपनों का स्वराज

जिस ग्राम-स्वराज्य के रास्ते गांधी हिंद स्वराज्य का सपना साकार होते देखना चाहते थे उससे हमारे गांव कोसों दूर होते जा रहे हैं। विकास...

श्रीभगवान सिंह का लेख : अहिंसक हिंसा की सभ्यता

ऐसा नहीं कि हमें यंत्र वगैरह की खोज करना नहीं आता था। लेकिन हमारे पूर्वजों ने देखा कि लोग अगर यंत्र वगैरह की झंझट...