शशिप्रभा तिवारी

शशिप्रभा तिवारी के सभी पोस्ट 105 Articles

नृत्य का बहुरंगी आयोजन

भरतनाट्यम नृत्य गुरु जयलक्ष्मी ईश्वर और उनकी शिष्याओं ने शिव तांडव स्त्रोत पर नृत्य पेश किया।

नृत्योत्सवः मणिपुरी नृत्य में रास

समारोह के दौरान पहली प्रस्तुति बसंत रास थी। इसे चारूसिजा माथुर और उनके साथी कलाकारों ने पेश किया।

नृत्योत्सव: परंपरा से जोड़ता नृत्य

जयंतिका की ओर से आयोजित नृत्य समारोह में शिष्या अंकिता नायक ने ओडिशी नृत्य पेश किया। अंकिता गुरु मधुमीता राउत की शिष्या हैं।

जनसत्ता सबरंग: गीत गोविंद की पेशकश

नायिका राधा के विरह भावों को अगले अंश में दर्शाया गया

नृत्योत्सवः मानसून में मल्हार और नृत्य की प्रस्तुति

समारोह का आगाज जयपुर घराने की कथक नृत्यांगना और गुरू प्रेरणा श्रीमाली के नृत्य से हुआ। जहां उन्होंने परंपरागत कथक की नजाकत भरी प्रस्तुति...

नृत्योत्सवः शिव और पार्वती की सुंदर नृत्य प्रस्तुति

रावण ने शिव तांडवस्त्रोत की रचना की थी। इसमें शिव के रौद्र रूप का विवेचन है, जिसे अक्सर कलाकार गाते और नृत्य में पेश...

नृत्योस्तवः कथक की एक नई पौध

कथक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी उभरती हुई कलाकार हैं। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आगाज शिव स्तुति ‘ओमकार महेश्वराय’ से किया। इसमें शिव के रूप को...

नृत्योत्सव: वसंतोत्सव में गुरु-शिष्य परंपरा की बानगी

कथक नृत्यांगना सुदेशना मौलिक ने दरबारी कथक नृत्य से अपनी प्रस्तुति का आगाज किया। उन्होंने परमेलु-थर्री कू कू का प्रदर्शन किया। उन्होंने चक्रदार तिहाई...

वीरबाला के रूप में नव प्रयोग

बीरवाला में नव प्रयोग की अनंत संभावना है। यह कलाकार की प्रतिभा और रचनात्मकता को उजागर करता है।

नृत्योत्सव: जयपुर घराने का दमकता कथक

समारोह में जयपुर घराने के गुरुआचार्य गणेश हीरालाल हैसल व गुरु हीरालाल हैसल के शिष्य विनोद हैसल की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने...

असम के सत्रीय नृत्य की पारंपरिक झलक

असम का लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य सत्रीय नृत्य है। इसकी नींव सत्राधीश गुरु शंकर देव और उनके शिष्य माधव देव ने रखी थी। धीरे-धीरे सत्र...

कर्ण का द्वंद्व और संघर्ष

महाभारत के पात्रों को हर कलाकार अपनी तरह से सोचता है। कुछ पात्रों जैसे कृष्ण, द्रौपदी, अर्जुन, कर्ण को केंद्र में रखकर कई कलाकारों...

जनसत्ता सबरंग: अलग-अलग नृत्य शैलियों की युवा नृत्यांगनाओं ने छोड़ी छाप

शास्त्रीय नृत्य की परंपरा में गुरु नृत्य का शास्त्रीय ज्ञान के साथ तकनीकी ज्ञान देते हैं। इस गुण के वाहक नए कलाकार अथवा शिष्य...

हमारी याद आएगी: मंच पर बिखरे अग्नि के रंग

सात और चार के छंद में पिरोए गए, अग्नि के 104 नामों को भी इसमें उच्चारित किया गया था। जिसे नृत्यांगनाओं के दल ने...

नृत्य समारोह: एक शाम नर्तकों के नाम

भगवान शिव के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से नवरस की यह परिकल्पना एक नई दृष्टि और सृजनशीलता लिए हुई थी। इसमें...

इंद्र सभा नृत्य नाटिका की पेशकश

इसे पहली बार लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने केसर बाग के चौराहे पर पेश किया था। इस संदर्भ में, कथक नृत्यांगना उमा...

कला संस्कृति: जानकी लीला की मनभावन पेशकश

कई मैथिली गीतों-पानी बिन परल अकाल, सुनत क्रंदन इंद्र राजा, चहुं ओर मंगल हो, सीता जनम भेलई धरती मुस्काइल हो, अंगने में बाजै बधईया,...

कला और संस्कृति: शागिर्द के भाव वाला उस्ताद

समारोह में परिवार परंपरा और गुरु शिष्य परंपरा की झलक बखूबी दिखी। बिरजू महाराज ने बैठक का भाव दिखाया। भाव मुद्राओं, हस्तकों, चेहरे और...