ताज़ा खबर
 

शशिप्रभा तिवारी के सभी पोस्ट

नृत्यः शिव के विभिन्न रूपों को सहजता से पेश किया

ओडिशी नृत्यांगना गौरी लिवेदी ने शास्त्रीय नृत्य को अपनी पहचान बनाया है। उन्होंने ओडिशी नृत्यांगना इप्सिता बेहरा और सुजाता महापात्र से ओडिशी नृत्य सीखा।

नृत्यः कथक में शिव परण का सुंदर अंदाज

कथक नृत्य को विश्वस्तर पर लोकप्रियता दिलाने में पंडित बिरजू महाराज का अनुपम योगदान है। इतना ही नहीं, उन्होंने देश के कोने-कोने के युवा...

नृत्यः दिव्य लोक की दिव्यता संग स्वच्छ विचार का संदेश

वरिष्ठ नृत्यांगना डॉ सोनल मानसिंह ने सिर्फ नृत्य को सीखा या प्रस्तुत नहीं किया है। बल्कि उन्होंने नृत्य को जिंदगी की तरह निभाया है।...

नृत्यः शैलियों की मोहक जुगलबंदी

सुमिता शर्मा जयपुर घराने की बेहतरीन कलाकार हैं। इनदिनों वह दिल्ली में रहती हैं। वह संस्कार भारती से वर्षों से जुड़ी हुई हैं।

नृत्यः सत्रीय नृत्य अनंत सागर है

सत्रीय नृत्य असम का लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य है। वहां हर घर की लड़कियां इसे सीखतीं हैं। असम में कला, साहित्य और संस्कृति के प्रति...

नृत्यः पुराने किले की प्राचीर से ‘एकला चलो’

राजधानी दिल्ली में साहित्य कला परिषद की ओर से आयोजित होने वाला प्रतिष्ठित नृत्य समारोह है-पुराना किला नृत्य समारोह।

नृत्य मुद्राओं और भंगिमाओं की अनूठी प्रस्तुति

भारतनाट्यम नृत्यांगना मालविका सरूकई अपनी हर नृत्य प्रस्तुति को एक नया अनुभव मानती हैं। उनके अनुसार नृत्य जीवन के अनुभव का सार है।

स्त्री पीड़ा को बखूबी उकेरा अरुणा मोहंती ने

ओडिशी नृत्य की परंपरा का निर्वाह गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए बखूबी हो रहा है। कई गुरुओं ने अपनी प्रतिभा और सोच से इसे समृद्ध...

विदेशी कलाकारों में दिखी रामायण की अनुगूंज

रामायण महोत्सव की शुरुआत इंडोनेशिया के कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। इस दल में जकार्ता के विराग संधी समूह के पुरुष कलाकार शामिल थे।...

श्याम और कबीर के रंग राची

कला कुंज और जयजयवंती की ओर से नृत्य समारोह का आयोजन किया गया।

नृत्यः कथक में राधा के रंग

कथक नृत्य के क्षेत्र में वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा प्रतिभाएं भी अपने को स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।

नृत्यः परशु प्राप्त कर राम कहलाए परशुराम

विष्णु के छठे अवतार परशुराम हैं। उनकी उपस्थिति द्वापर और त्रेता युग के दोनों काल में मानी जाती है।

संतुलित और सहज पदार्पण

शास्त्रीय नृत्य में नए कलाकार के लिए पहली एकल प्रस्तुति महत्त्वपूर्ण होती है। वर्षों की साधना और मेहनत के बाद गुरु शिष्य को यह...

तलाश-ए-हक की पेशकश

जकल कथक नृत्य में ज्यादातर शोर देखने-सुनने को मिलता है। पर इस लीक से हटकर, परंपरा की खुशबू का अहसास तलाश-ए-हक नृत्य प्रस्तुति में...

एक-एक ग्रह के भाव को नृत्य से दर्शाया

युवा नृत्यांगनाओं ने अपने प्रयासों से अपनी पहचान कायम करने का प्रयास किया है।

मालविका सरूकई ने कहा नृत्य भी एक भाषा है

मालविका सरूकई का कहना है कि शास्त्रीय नृत्य की सतत प्रवाहमान परंपरा है।

नए विषयों पर नृत्य पेश करती हैं कविता

डिशी नृत्यांगना कविता द्विवेदी ने नृत्य रचना पिंगला की परिकल्पना की है।

न जाने कहां भटक गई नृत्य की आत्मा

सोनल मानसिंह के लिए जीवन ही नृत्य है, नृत्य ही जीवन है। वे कहती हैं कि जहां हम खड़े हो जाते हैं वहीं मंदिर...