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कविताएं: नींद का हासिल, पानी की बात और धोखा

जब मन टूटा तो बसा हुआ पहाड़ टूट गया, सबसे पहले खोया जमा किया अंतिम तक का सिक्का, जिसे रोज रोज बचाता था।

कविताएं : सूख रहा है समय

पंखुरी की सांस सूख रही है, जो सुंदर चोंच मीठे गीत सुनाती थी, उससे अब हांफने की आवाज आती है