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सतीश सिंह के सभी पोस्ट

राजनीति: कारोबारी सुगमता के लिए

सरकार ने हाल-फिलहाल में कारोबारी सुगमता के लिए कई आर्थिक सुधार किए हैं और इस दिशा में वह लगातार आगे बढ़ रही है। अगर...

राजनीतिः ई-कचरे की अनदेखी के खतरे

उपभोक्तावाद बढ़ने के कारण ई-कचरे का निष्पादन देश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आज हमारी विनिर्माण प्रक्रियाओं को बेहतर तकनीक की...

बैंकिंग सुधार की कठिन डगर

मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी बैंकों में आमूलचूल परिवर्तन लाने की दरकार है।

विकास पर भ्रष्टाचार की छाया

विमुद्रीकरण की घोषणा के बाद तकरीबन 4,574 करोड़ रुपए जमा किए गए और बाद में इनमें से 4,552 करोड़ रुपए निकाल भी लिए गए,...

सुरक्षित निवेश के सिमटते दायर

भारत जैसे विकासशील देश में अधिकांश लोग आज भी पारंपरिक जमा के हिमायती हैं। वे अपनी बचत बैंक और डाकघरों में रखना चाहते हैं।...

राजनीतिः मर्ज का इलाज एकीकरण

भारतीय स्टेट बैंक के साथ उसके पांच सहयोगी बैंकों और एक महिला बैंक के विलय के बाद से ही माना जा रहा था कि...

घर का सपना और बाजार

पांच सौ वर्ग मीटर या आठ अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोड़ कर सभी निर्माण योजनाओं को रेरा के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य...

राजनीतिः फंसे हुए कर्ज से निजात की नई कवायद

रिजर्व बैंक ने छह महीनों के अंदर पचपन बड़े देनदारों से कर्ज वसूलने का निर्देश बैंकों को दिया है। साथ में यह भी...

बैंकों के विलय पर टिकी उम्मीद

चिह्नित किए गए छह छोटे बैंकों में यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक इंडिया तथा बड़े बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक...

बाजार में बिटकॉइन

इधर कुछ समय से नगद के बजाय डिजिटल भुगतान पर जोर दिया जा रहा है। इसके चलते अनेक बैंकों और कंपनियों ने डिजिटल भुगतान...

राजनीतिः वित्तवर्ष में बदलाव और विकास

जनवरी में बजट पेश करने पर किसानों का खयाल रखने के साथ-साथ मुद्रास्फीति का आकलन, कारोबारियों के कारोबार का अंदाजा आदि लगाना आसान...

राजनीतिः वित्तीय सुरक्षा में सेंध

डेबिट कार्ड की डेटा चोरी बैंकों की तकनीकी सुरक्षा प्रणाली में कमी को जरूर दर्शाती है, पर ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है,...

विकास की राह में एनपीए का रोड़ा

बढ़ते एनपीए के कारण विकास दर में अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही है।

राजनीतिः निवेश के फायदे पर संशय

संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की वित्तीय आवश्यकता को सुनिश्चित करने के लिए इपीएफओ का गठन किया गया था। हमारे देश में कामगारों...

राजनीति: असमानता की जड़ें

बैंकों की सकारात्मक भूमिका के बिना वित्तमंत्री देश के विकास के सपने को साकार नहीं कर सकते हैं।

राजनीतिः बैंकों का एकीकरण जादुई छड़ी नहीं

एकीकरण के बाद भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजी की कमी का सामना करना पड़ेगा।

राजनीतिः ब्याज पर क्यों गिरी गाज

छोटी बचत योजनाओं पर दी जा रही ब्याज दरों में कटौती से वित्तीय समावेशन की सरकार की संकल्पना खटाई में पड़ सकती है। इससे...

क्या है एनपीए का इलाज

चालू वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में भारतीय स्टेट बैंक के शुद्ध मुनाफे में इकसठ प्रतिशत की...