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दुनिया मेरे आगे: शहर का दूसरा छोर

जिंदगी के मायने, आम धारणाएं, समाज, मान्यताएं, लोग, गली, चबूतरे, बवाल, पड़ोसी, थकान, रिश्ते, विवशताएं, प्यार, संबंध, जुड़ाव, स्त्री-पुरुष, बेटा-बेटी, पति-पत्नी, रोजमर्रा के...

दुनिया मेरे आगेः जगह का समाजशास्त्र

किसी जगह का इस्तेमाल कौन कर सकता है और कौन नहीं- यह बात हमें उस समाज के बारे में कई पहलुओं को समझने में...

भरोसे का जीवट

वे एक व्यवस्था का रूपक होती हैं। उत्तर प्रदेश में आंबेडकर नगर जिले के घुघुलपट्टी गांव में गुजरे अपने बचपन का वह हिस्सा मुझे...

मशीन कौन

अगर व्यक्ति समय से आना चाहे तो दुनिया की कोई ताकत उसे ऐसा करने से नहीं रोक सकती! व्यक्ति कितना झूठा हो गया है!