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रीता सिंह के सभी पोस्ट

राजनीति: बाल विवाह उन्मूलन की राह

कड़े कानूनी प्रावधानों और जागरूकता कार्यक्रम के बावजूद पिछले दो दशक से बाल विवाह में कमी आने की दर हर वर्ष महज एक प्रतिशत...

विरासत में कुंभ

भारत में सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ। नदियों से न सिर्फ यहां के लोगों की आजीविका जुड़ी है, बल्कि इनका सांस्कृतिक महत्त्व...

राजनीतिः जैविक ईधन की ओर अग्रसर दुनिया

जैविक र्इंधन कार्बन डाइआॅक्साइड का अवशोषण कर हमारे परिवेश को स्वच्छ रखता है। अगर इसका इस्तेमाल होता है तो इससे र्इंधन की कीमतें...

विधवाओं की सुध लेने की जरूरत

विधवाओं के पुनर्वास की बात तो की जाती है लेकिन उनके विवाह के बारे में कोई भी बात नहीं करता। पीठ ने सरकार...

नकली नोटों से कब मिलेगी निजात

आंकड़ों के मुताबिक नकली मुद्रा रिपोर्टों की संख्या वर्ष 2007-08 में महज 8,580 थी, जो 2008-09 में बढ़ कर 35,730 और वर्ष 2014-15 में...

संकट में वन्य जीव

जैव विविधता एक ऐसा प्राकृतिक संसाधन है जो यदि एक बार समाप्त हो गया तो उसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता।

हवा में जहर के घूंट

2025 तक अकेले राजधानी दिल्ली में ही वायु प्रदूषण से हर वर्ष 26,600 लोगों की मौत होगी।

राजनीतिः कोख के कारोबार की कड़ियां

यह स्वागत-योग्य है कि केंद्र सरकार ने किराए की कोख के व्यावसायिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध की पहल तेज करते हुए सरोगेसी (नियमन) विधेयक को...

‘आधी आबादी’ कॉलम में रीता सिंह का लेख : अवकाश के पक्ष में

इस विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक पचास से ज्यादा कर्मचारियों वाले किसी भी सरकारी या निजी संस्थान में क्रेच की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

समस्याः गगरी न फूटे खसम मरि जाय- रीता सिंह

यह अजीब विडंबना है कि एक ओर सूखे की मार से बेहाल-बेदम बुंदेलखंड सिसक रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार दावा किए जा रही...

आवादीः कानून और अत्याचार

आमतौर पर बलात्कार के कारणों में अशिक्षा को भी जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन विडंबना है कि संपूर्ण साक्षरता के लिए जाना जाने वाले...