रमेश कुमार दुबे

रमेश कुमार दुबे के सभी पोस्ट

15 Articles

राजनीतिः विषमता की बढ़ती खाई

उदारीकरण और भूमंडलीकरण के जिस मॉडल को गरीबी उन्मूलन का सशक्त हथियार बताया जा रहा था वह इसमें बिलकुल नाकाम साबित हुआ। हालांकि इन...

राजनीतिः सस्ते आयात से दुश्चक्र में किसान

छठ के बाद नीतीश के चेहरे पर रौनक दिख रही है। सियासी गलियारों में इसके निहितार्थ यही लग रहे हैं कि नीतीश अब बेफिक्र...

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बंजर में तब्दील होती मिट्टी

हरित क्रांति के दौर में क्षेत्र-विशेष की पारिस्थितिक दशाओं की उपेक्षा करके फसलें ऊपर से थोप दी गर्इं, जैसे दक्षिण भारत में गेहूं और...

हरित क्रांति के नाम पर

मार्च-अप्रैल में इकतालीस दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद तमिलनाडु के किसान एक बार फिर जंतर-मंतर पर जुट गए हैं।

राजनीतिः किसान मदद के मोहताज क्यों हैं

खेती-किसानी का संकट किसी राहत पैकेज या कर्जमाफी से दूर होने वाला नहीं है। इसके बावजूद कर्जमाफी के जरिए किसानों को राहत दिलाने की...

राजनीतिः बागवानी क्रांति की जरूरत

आयातित फलों-सब्जियों की वजह से भारतीय उत्पादक मुसीबत से घिरते जा रहे हैं। इसका कारण है कि प्रति हेक्टेयर पैदावार के मोर्चे पर भारत...

मोटे अनाज से कुपोषण मुक्ति

कुपोषण की व्यापकता एकांगी हरित क्रांति और गेहूं-चावल केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की देन है।

राजनीतिः आलू में छिपे खजाने को कब पहचानेंगे

सरकार गेहूं व धान की भांति आलू के लिए भी खरीद व भंडारण की सुविधाएं सृजित करे। भुखमरी मिटाने में पेरू से लेकर आयरलैंड...

राजनीति: पशुपालन में चारे का संकट

चारा फसलों के उन्नत बीजों के विकास में न तो सरकारी और न ही निजी क्षेत्र की रुचि है।

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रमेश कुमार दुबे का लेख : लुप्त होती तटीय सुरक्षा पंक्ति

वन विनाश, जीवाश्म र्इंधन के जलने से कार्बन डाइआॅक्साइड की बढ़ती मात्रा, वैश्विक ताप वृद्धि, भौतिकतावादी जीवन दर्शन ने दुनिया के अस्तित्व के समक्ष...

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राजनीतिः शहरीकरण की विसंगतियां

जहां महानगरों में दड़बेनुमा मकानों में भीड़ बढ़ती जा रही है वहीं गांवों-कस्बों के लाखों घरों में ताले जड़े हैं। बढ़ते शहरीकारण का परिणाम...

राजनीतिः रेगिस्तान का फैलता दायरा

भूजल के अत्यधिक दोहन, अधिक पानी मांगने वाले फसलों की खेती और अवैध खनन आदि के कारण रेगिस्तान का विस्तार हो रहा है। लेकिन...

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राजनीतिः आसान नहीं शराबबंदी की राह

परिवार की आमदनी बढ़ने पर दूध की खपत बढ़ जाती थी, लेकिन आज आमदनी बढ़ने के साथ शराब की खपत बढ़ रही है। इसके...

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कुदरत नहीं, मनुष्य की देन है सूखा

पानी की कमी वाले इलाकों में अनाज उगाने पर पानी की प्रचुरता वाले इलाकों की तुलना में दो गुने पानी की खपत होती है।

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ताकि खेती की विविधता बनी रहे

फिर एक ही खेत में लगातार कपास की फसल लेने से न सिर्फ मिट्टी के पोषक तत्त्वों में कमी आ रही है बल्कि कीटों...

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