Nehru vs. Modi, Rakesh Sinha, Narendra Modi
नेहरू और मोदी आमने-सामने | राकेश सिन्हा ने बताया इतिहास किसे कैसे परखेगा

मोदी भारत को एक सभ्यताई राष्ट्र के रूप में देखते हैं। इसलिए पिछले एक दशक में भारत अपनी प्राचीनता, बौद्धिक…

जिमखाना क्लब ने सांकेतिक तौर पर भी लोकहित में ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे इसको नैतिक सरोकारों से जोड़ा जा सके।
जिमखाना क्लब से खुली बहस: क्या लोकतंत्र में भी बची रहनी चाहिए ‘खास’ लोगों की दुनिया?

क्लब को करोड़ों रुपए की वार्षिक आमदनी सदस्यों की विलासितापूर्ण गतिविधियों और सदस्यता शुल्क से होती है। पर इसी राजधानी…

intellectual crisis society, decline of intellectualism India, modern society mental imbalance
बौद्धिकता का संकट: विश्वविद्यालयों से समाज तक फैलता मानसिक अवसाद | विचार

बौद्धिकता का ह्रास राजनीति और संकीर्णतावादी ताकतों को निष्कंटक बना देता है और समाज की नकारात्मक ताकतों को प्रतिष्ठा प्राप्त…

महिला आरक्षण, women reservation India, नारी भागीदारी, Indian politics women
राजनीति में महिलाओं की राह मुश्किल, क्या आरक्षण बनेगा पितृसत्ता को तोड़ने का निर्णायक हथियार?

लोकतंत्र का मूल भाव योग्यता की खोज और नेतृत्व की पात्रता का सृजन करना होता है। इसके इतर होने पर…

BJP Expansion, BJP National Politics, Narendra Modi's Leadership
हिंदी पट्टी से राष्ट्रीय फलक तक: भाजपा के विस्तार की बदलती राजनीति, बदलाव के पीछे की असली कहानी

रूस में बोल्शेविक क्रांति (1917) या उससे पूर्व फ्रांस की क्रांति (1789) आदि में क्रांतिकारी और प्रतिक्रांतिकारी, दोनों ताकतों के…

भारतीय ज्ञान परंपरा: पहले बड़े भवन नहीं थे, फिर भी ज्ञान था, आज सब है, पर वह बात नहीं; असली मेहनत कौन कर रहा है

भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का मतलब सृजनशीलता और लेखनी तथा अभिव्यक्ति में मौलिकता पैदा करना है। इसी में…

Debate on casteism, ending untouchability, UGC directive controversy
विचार: अधूरे सामाजिक बदलाव की चुनौती, कानून से आगे संकल्प और क्रांति की जरूरत

महात्मा गांधी ने 1933 में वर्धा के राम मंदिर से अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान शुरू किया, जो नौ महीने चला।…

Narendra Modi, opposition relations, parliamentary decorum, verbal violence in politics, crisis of democracy
राकेश सिन्हा के विचार: आलोचना से नफरत तक, मोदी–विपक्ष संबंध और संसदीय जनतंत्र का नैतिक संकट

प्रधानमंत्रियों के प्रति नापसंदगी पहले भी व्यक्त होती रही है। अटल बिहारी वाजपेयी को ‘संघ का मुखौटा’, इंदिरा गांधी को…

The crisis of rationalism, materialism and individualism
विचार: ट्रंप या पुतिन नहीं, हमारी सोच है परेशानियों की वजह, जिस रास्ते पर दुनिया चल रही है, खतरनाक है वह

विकसित लोकतंत्र का दावा करने वाले देश के शीर्ष पर बैठे राजनेता मध्ययुगीन राजाओं की तरह व्यवहार कर रहे हैं।…

Somnath temple debate, Nehru vs Modi ideology
विचार: सोमनाथ से 2047 तक, नेहरू बनाम मोदी की वैचारिक लड़ाई में भारत की असली पहचान क्या है?

सोमनाथ मंदिर के बहाने नेहरू और नरेंद्र मोदी की वैचारिक टकराहट भारत की संस्कृति, राष्ट्रबोध और राज्य की भूमिका पर…

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