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राजेंद्र प्रसाद शर्मा

राजेंद्र प्रसाद शर्मा के सभी पोस्ट 9 Articles

अपनों से ही शर्मसार होती मानवता

अपनों से मतलब साफ है कि या तो रिश्तेदार या जान-पहचान वाले या फिर दोस्त। इसका मतलब यही निकल के आता है कि आरोपी...

हादसे जो रोके जा सकते हैं

सबरीमाला में फिर हुए हादसे ने पुन: हमारे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

वित्त बैंक: सूदखोरी का चंगुल

पिछले दिनों समाचार पत्रों के माध्यम से कर्ज के जाल में फंसकर आत्म हत्या की घटनाओं से जुडे लोग मध्य या उच्च मध्य वर्ग...

मुद्दा: सुविधाओं का मोल

हमारे देश में भी अब गैरपंरपरागत क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए सौर ऊर्जा यानी सोलर प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन के प्रयास किए जा रहे...

‘जरायम’ कॉलम मेें राजेंद्र प्रसाद शर्मा का लेख

प्राचीन भारतीय पुरामहत्त्व की वस्तुओं को संरक्षित और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 1972 से द एंटीक्यूटीज एंड आर्ट टीजर्स एक्ट काम कर रहा...

समाज : सफाई और परंपरा

स्थिति बिगड़ी है तब वृक्षारोपण की याद आने लगी है। वृक्षारोपण या पौधारोपण के नाम पर करोड़ों रुपए बर्बाद होते हैं।

उपभोक्ता : बाजार में नकली सामान

एक मोटे अनुमान के अनुसार करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी नकली उपभोक्ता वस्तुओं की बाजार में देखने को मिल रही है।

गांव-गिरांवः विकास का दायरा

हालांकि, देश में ग्रामीण विकास की अनेक योजनाएं संचालित हो रही हंै, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं है। अनुमान है कि इस बार केंद्र...

दुर्घटनाओं की वजह

वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना या गाने सुनना या वीडियो देखना या वाट्सएप संदेश को देखना फैशन बनने के साथ ही जानलेवा...