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रघुवीर सिंह के सभी पोस्ट

बिसरती गायकी विधाएं

गायन की अनेक विधाएं अब लुप्त होने की कगार पर हैं। ऐसा नहीं कि अब उन्हें सुनने वाले नहीं रहे, बल्कि आधुनिक शैलियों के...

भूले बिसरे साज

किसी भी सभ्यता और संस्कृति के लिए उसकी सांस्कृतिक गतिविधियां जरूरी हैं और इसके लिए आवश्यक है संगीत। संगीत या तो कंठ पर निर्भर...

अभिनय, मुद्रा और भाव का संगम

किशोरावस्था तक बालसरस्वती लोकप्रिय नृत्यांगना बन गई थीं। अभिनय में उनकी अलग पहचान बन चुकी थी। 1934 में वह भरतनाट्यम को पहली बार दक्षिण...

सिनेमाः कौन सुने मेरे मन की पीर

बहुत कम लोगों को पता होगा कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, उनकी बहन आशा भोसले और बाद की पीढ़ी में अनुराधा पौडवाल को पहला...

उड़त अबीर गुलाल

रंगों के उत्सव होली की परंपरा बहुत पुरानी है। देश के अलग-अलग हिस्सों और समयों में इसके अलग-अलग रंग रहे हैं। लोक से लेकर...

बगरयो बसंत है

वैसे शास्त्रीय संगीत में बसंत तो पौष मास से ही शुरू हो जाता है, जब भारतीय गायक माघ, फाल्गुन तक तीन महीने बसंत गाते...

स्मृतिशेष: रंजकता के रचनाकार

चार दशकों तक अपने संगीत सागर में श्रोताओं को डुबकी लगवाने वाले बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत- दोनों जगह अपनी...

संगीत का आठवां सुर

भारतीय संगीत परंपरा में सुब्बुलक्ष्मी का नाम शीर्ष पर है। संगीत में सात सुर होते हैं, लेकिन उनके योगदान को देखते हुए उन्हें ‘आठवें...

स्मरण- तबले के ताल- गुरू

उस समय लच्छू महाराज महज आठ साल के बालक थे। मुंबई में कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें उस्ताद अहमद जान थिरकवा भी मौजूद थे।...

शहनाई के शहंशाह

बिस्मिल्लाह खान ने जिस जमाने में शहनाई की तालीम लेनी शुरू की थी, उस समय गाने-बजाने के काम को इज्जत की नजरों से नहीं...