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पूरन सरमा के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे: उत्सव के रंग

कठफोड़वा आम के पेड़ में अपनी कारीगरी से बना रहा है अपना कोटर और हरियल तोतों की बारात पहले ही आ बैठी है बागों...

कहानी: खुशी का रहस्य

एक दिन दीपक कहीं खेलने गया हुआ था। तभी उसका दोस्त विक्रम उसके घर आया। विक्रम बहुत हंसमुख और मिलनसार था। दीपक के माता-पिता...

प्रसंगः लघु पत्रिकाओं के समक्ष चुनौती

लघु पत्रिकाएं जब तक अपने रूप परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगी तब तक वे इस युग में अस्तित्व की लड़ाई लड़ती रहेंगी।

 कहानी- सच्ची मित्रता

कुछ देर बाद हरीश को होश आया और वह मां-मां बोला। मां ने भाग कर उसे सीने से लगा लिया।

बाल कहानी- दोस्ती

दोस्त होते ही इसलिए हैं कि वे संकट में एक-दूसरे की मदद करें। सच है दोस्ती का कोई मूल्य नहीं होता।

दुनिया मेरे आगेः कब तक बचेंगे हाट

संसार में गुलाबी नगर के नाम से जाना जाने वाला जयपुर शहर अनेक कारणों से विख्यात रहा है। चाहे वह यहां की वास्तुकला हो,...

व्यंग्य: महाकवि मौजानंद

मौजानंद का जानलेवा हमला बर्दाश्त करने के अलावा उस समय और कोई चारा भी न था।

व्यंग्य : झूठ बराबर तप नहीं

मान लिया झूठ बोलना पाप है, लेकिन यह बात आज तक समझ में नहीं आई कि लोग क्यों कर क्षण-क्षण में यह पाप करते...

व्यंग्य : विचार गोष्ठी

विचारक कहलवाने के लिए विचार गोष्ठी में जाना अनिवार्य होता है, इसलिए गया था मैं। सोचा था हाल खचाखच भर गया होगा-बैठने की तो...

व्यंगकार के पांव

उन्होंने कुछ लिखा और दौड़े आए मेरे पास। बोले-‘आप तो अच्छे व्यंग्यकार हैं-जरा देखिए मेरा व्यंग्य।’ मैंने कहा- ‘व्यंग्यकारजी जीवंत व्यंग्य के लिए हमें बोलचाल...