पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी के सभी पोस्ट 30 Articles

राजनीति: बचाना होगा तालाबों को

देश में एक सशक्त तालाब प्राधिकरण गठित हो, जो सबसे पहले देशभर की जल-निधियों का सर्वे करवा कर उनका मालिकाना हक राज्यों के माध्यम...

राजनीतिः बिफरती नदियां और खतरे

बगैर सोचे-समझे नदी-नालों पर बांध बनाने के कुप्रभावों के कई उदाहरण पूरे देश में देखने को मिल रहे हैं। वैसे शहरीकरण, वन विनाश और...

राजनीतिः चुनाव सुधार और सवाल

आधी-अधूरी मतदाता सूचियां, कम मतदान, मध्यवर्ग की मतदान में कम रुचि, महंगी निर्वाचन प्रक्रिया, चुनाव में बाहुबलियों और धन्नासेठों की पैठ, जाति-धर्म की सियासत,...

रविवारी: मौसम का बदलता मिजाज, खतरों से जूझता जीवन

जलवायु परिवर्तन के कारण मानव जीवन के सामने अनेक तरह की परेशानियां पैदा हो गई हैं। सबसे अधिक दुष्प्रभाव जमीन की उर्वराशक्ति और जल...

pankaj

विमर्श- लेखक का अकेलापन

यह अकेलापन ‘राग दरबारी’ में भी दिखता है। इसके अलावा: ‘मैं लिखता हूं क्योंकि मुझे आशा है कि शायद इस तरह मैं समझ सकूंगा...

राजनीतिः असम क्यों सुलग रहा है

बांग्लादेश को छूती हमारी जमीनी और जल-सीमा लगभग खुली पड़ी है। इसका फायदा उठाकर बांग्लादेश के लोग बेखौफ यहां आते रहे हैं। विडंबना यह...

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फिर सूखे की ओर बुंदेलखंड

बुंदेलखंड की असली समस्या अल्पवर्षा नहीं है, वह तो यहां सदियों से, पीढ़ियों से रही है। पहले यहां के बाशिंदे कम पानी में जीना...

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पर्यावरण संरक्षण की मुश्किलें

हम हर दिन वनस्पति और जंतुओं की किसी न किसी प्रजाति को सदा के लिए खो रहे हैं, खेत और घर में जहरीले रसायनों...

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रसायनों से जहरीली होती जमीन

दवा का जहर किसानों के शरीर में समा गया। कई की आंखें खराब हुर्इं तो कई को त्वचा रोग हो गए। हमारे देश में...

दुनिया मेरे आगेः बस्ते के बोझ से दबी शिक्षा

आज छोटे-छोटे बच्चे होमवर्क के खौफ में जीते हैं। जबकि यशपाल समिति की सलाह थी कि प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को गृहकार्य सिर्फ इतना...

मुक्त मंडी और हाट-बाजार

पहले कहा जाता था कि भारत गांवों में बसता है और उसकी अर्थव्यवस्था का आधार खेती-किसानी है, लेकिन मुक्त अर्थव्यवस्था के दौर में यह...

राजनीतिः नदी जोड़ योजना पर पुनर्विचार जरूरी

जब नदियों को जोड़ने की योजना बनाई गई थी, तब देश व दुनिया के सामने ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन क्षरण, ग्रीनहाउस प्रभाव जैसी चुनौतियां नहीं...

कविताएं: दुख आता है तो शायद

पंकज चतुर्वेदी की कविताएं।

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दफ्न होते दरिया की दास्तान

इस बार बारिश तो ठीक-ठाक हुई थी, लेकिन बुंदेलखंड, तेलंगाना, मराठवाड़ा, बस्तर जैसे इलाके मार्च समाप्त होते-होते पानी के लिए हांफने लगे हैं।

राजनीतिः किनारों को खाते समुद्र

देश के दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में समुद्र तट पर हजारों गांवों पर इन दिनों सागर की अथाह लहरों का आतंक मंडरा...

कविताएं: तरीका, करीब

पंकज चतुर्वेदी की कविताएं।

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यमुना का यह हाल क्यों है

संसदीय समिति ने भी कहा था कि यमुना सफाई के नाम पर व्यय 6500 करोड़ रुपए बेकार हो गए हैं क्योंकि नदी पहले से...

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नक्सली समस्या की जड़ें

ताजा जनगणना बताती है कि बस्तर अंचल में आदिवासियों की जनसंख्या ना केवल कम हो रही है, बल्कि उनकी प्रजनन क्षमता भी कम...