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पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट

टालमटोल की कीमत

आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई की जटिल दुनिया में उच्च गुणवत्ता के विश्लेषण के लिए कई अनुशासनों की खूबियां को साथ लाने की दरकार होती है..

पी. चिदंबरम का कॉलम: सरकार के लिए नए साल के संकल्प

नए साल के संकल्प करना मैं पसंद नहीं करता, लेकिन दूसरों के लिए संकल्प तय करते हुए मैं खुश हूं, इस पक्के विश्वास के...

पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नज़र : आहत मन की स्वीकारोक्ति

आखिरकार सच्चाई सामने आ ही गई। केंद्र सरकार की दशा पर लिखी टिप्पणी के साथ मैंने यह स्तंभ जनवरी 2015 में शुरू किया था।...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर : सुनियोजित सनक की भनक

बिहार चुनाव ने हरेक को सबक दिया। भाजपा को सबक मिला कि सब राज्यों में मोदी फार्मूला नहीं चल सकता। कांग्रेस ने सीखा कि...

बड़बड़ बंद, फिर शुरू

पाकिस्तान है। यह भारत की पश्चिमी सीमा पर है (और 1971 तक यह पूर्वी सीमा पर भी था)। इसका वजूद हमारी मर्जी पर निर्भर...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नज़र : एक दोस्त को इस तरह खोना

सरकार ने 26 मई, 2014 से एक लंबा सफर तय किया है। कम से कम तीन पड़ोसी देश, जो नए प्रधानमंत्री के शपथग्रहण समारोह...

आर्थिक सुधार क्या है और क्या नहीं

बिहार चुनाव के बाद, विकास के एजेंडे पर लौटने की बातें हो रही हैं। अगर सरकार और संसद की ऊर्जा विकास के ठोस एजेंडे...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नज़र : आगे पहाड़ की चढ़ाई है

संसद का शीतकालीन सत्र छब्बीस नवंबर से बुलाया गया है। अर्थव्यवस्था की हालत संसद सत्र बुलाने से कहीं ज्यादा की मांग करती है। सरकार...

दूसरी नज़र : भारत के स्वभाव की विजय

राजनीति विज्ञान का हर विद्यार्थी बिहार चुनाव के नतीजों को समझने की कोशिश करेगा। इन नतीजों में निहित सच्चाई को नजरअंदाज करना आसान है,...

पी चिदंबरम का कॉलम ‘दूसरी नजर’ : जीत हो या हार, कसौटी पर रहेंगे मोदी

जब आठ नवंबर की सुबह इस स्तंभ को पढ़ रहे होंगे, माहौल उत्सुकता से भरा होगा। हरेक के मन में यही सवाल हावी...

दूसरी नज़र : न्यायिक नियुक्ति आयोग की गुत्थी

एनजेएसी अधिनियम, जिसे एक झटके में खारिज कर दिया गया, उसे संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका, तीनों को स्वीकार्य बनाने के लिए उपयुक्त फेरबदल किए...

दूसरी नज़र : अब आगे बड़ी चुनौती

आखिरकार रिजर्व बैंक ने सरकार, कारोबारी समुदाय और बहुतेरे अर्थशास्त्रियों की अपेक्षाएं पूरी करते हुए रेपो रेट में पचास आधार अंकों की कटौती कर...

दूसरी नज़र : करो पहले, सोचो बाद में

यह पहली बार नहीं है कि भाजपा/राजग सरकार ने कार्रवाई पहले की हो, और सोचने की जहमत बाद में उठाई हो। दूसरी सरकारों के...

दूसरी नज़र : शरणार्थी, प्रवासी और मानवता

जब तक इंसान का वजूद है, दुख-तकलीफ उसके साथ लगी रहेगी। गरीबी, बीमारी, आपसी झगड़ों, उत्पीड़न और युद्धों ने इंसान पर जाने कितनी अनकही...

दूसरी नज़र : ओआरओपी की रहस्यकथा

एक दूसरी रहस्य-कथा, जो हमें दिखाई जा रही है वह समान रैंक समान पेंशन (ओआरओपी) की है। वास्तव में, इसमें रहस्य की कोई बात...

दूसरी नज़र : असहिष्णुता का उभार

भारतीय समाज को लेकर कई मिथों में एक पुराना मिथ यह है कि हम एक सहिष्णु समाज हैं, और हमेशा रहे हैं। यह पुरानी...

दूसरी नजर : आखिरकार कोई आर्थिक एजेंडा होगा?

संकट की आहट का मैंने हमेशा स्वागत किया है। लगता है कि ऐसी ही स्थिति भारत में बहस और चर्चा का असली उत्प्रेरक बनती...