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निशा नाग के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे: पारदर्शिता का तकाजा

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने निबंध ‘देवदार’ में कहा है कि ‘जरूरी नहीं है, जो लगे वह हो भी। लगने और होने में फर्क होता...

दुनिया मेरे आगे- अहसास के आईने में

प्रेम है तो जीवन है, अन्यथा जिंदगी नीरस और ऊबाउ है। प्रेम का धरातल बहुत विशाल है और इसकी सच्चाई की परख बहुत ही...

दुनिया मेरे आगेः संवेदना का हाशिया

बचपन की एक धुंधली याद ताजा हो गई उस विज्ञापन को देख कर। छह सात बरस की रही होऊंगी। गरमी के दिन थे और...

दुनिया मेरे आगेः कौशल की जगह

कला, कौशल और शिक्षा मानव सभ्यता और सांस्कृतिक अभिरुचि के परिचायक हैं। उस दिन घर का नल टपकने लगा, तब पलम्बर को बुलाया गया।...

रोटियों का गणित

रसोई में तवे पर रोटी पलटते हुए भौजी ने खाने के लिए आवाज लगाई। ऊपर टट्टर से नीचे झांकते हुए मैंने देखा, भौजी के...