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मुकेश भारद्वाज के सभी पोस्ट

बेबाक बोल: बेलाज बादशाह

चुनावी मैदान में जनता के सामने हाथ जोड़ने वाले जनप्रतिनिधि सत्ता का ताज पहनते ही लोकतंत्र की लाज नहीं रखते हैं। जनप्रतिनिधियों का नागरिकों...

बेबाक बोल: दर्द की दवा क्या…

औपनिवेशिक शासन के अंत ने भारत को विभाजन जैसे नासूर के साथ कश्मीर जैसी लाइलाज बीमारी भी दे दी। राजे-रजवाड़ों को आजाद हिंदुस्तान की...

बेबाक बोल : आगे 2019 है…

जंतर मंतर और रामलीला मैदान से एनजीओ, आइआइटी, हाई प्रोफाइल समाज सेवकों के डिजाइनर आंदोलन से आम आदमी पार्टी का ब्रांड निकला था। शहर...

बेबाक बोल : फुटबॉल का ‘खेल’

इंग्लैंड की फुटबॉल टीम के स्वीडिश मूल के मैनेजर स्वेन गोरान एरिक्सन ने कहा था, ‘फुटबॉल में राजनीति से ज्यादा राजनीति है’। आज जब...

बारादरी: सतत मूल्यांकन से पहले समस्या को समझें

इस देश में नीतियों की कमी नहीं है। समस्या है, तो उनके क्रियान्वयन की। अब तक जितनी भी बातें मैंने कीं, उनमें से एक...

बेबाक बोल : मिसाल

मजहब की दीवार लांघ एक लड़की और लड़का प्रेम करते हैं। इस प्रेम और शादी की मांग के खिलाफ लड़के की हत्या कर दी...

बेबाक बोल : कठिन राह

केंद्र की राजग सरकार ने चुनाव सुधारों के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने के लिए कदम उठाने की इच्छा जाहिर की...

बारादरीः मैं लिखती आंखिन की देखी

हिंदी को हर वक्त क्षेत्रीय भाषाओं की जरूरत पड़ती है। हिंदी समृद्ध होती है क्षेत्रीय भाषाओं से। हालांकि बड़े दुख की बात है कि...

बेबाक बोल : खबर जिंदा है

14 मई 2018 को टॉम वुल्फ ने दुनिया को अलविदा कहा। 88 पार की उम्र में अपने खास तरह के फैशन के लिए मशहूर...

बेबाक बोल : कर्नाटक की बोध कथा

‘अब तो ईगलटन रिसॉर्ट के मालिक का भी कहना है कि मैं सरकार बनाऊंगा मेरे पास 117 सदस्यों का बहुमत है’। कर्नाटक में येदियुरप्पा...

बारादरी: सिनेमा को समाज के जिम्मे छोड़ देना चाहिए

फिल्म कलाकार मुकेश त्यागी का कहना है कि कला-माध्यमों पर किसी तरह का बंधन नहीं होना चाहिए। इंटरनेट के इस जमाने में फिल्म सेंसर...

बेबाक बोल: तारीखी तस्वीर

आमार शोनार बांग्ला, आमि तोमाए भालोबाशी (मेरा सोने जैसा बंगाल, मैं तुमसे प्यार करता हूं)। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में यह गीत लिखा था...

राजकाजः बेबाक बोल – बनते देखा है..

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं/आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार...। जब बात अतिक्रमण की आती है तो...

बारादरी: लोकप्रिय हुआ तो लुगदी का ठप्पा लगा दिया

गल्पकार सुरेंद्र मोहन पाठक का कहना है कि टीवी और इंटरनेट की बढ़ती तकनीक ने उनके वे पाठक छीन लिए हैं, जो फुर्सत मिलते...

राजकाजः बेबाक बोल – आदम सोच

दो साध्वियों और एक बच्ची की अथक जंग के बाद राम-रहीम और आसाराम बलात्कार के जुर्म में सलाखों के पीछे होते हैं। सत्ता और...

बारादरी: कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के कुप्रचार का लाभ मिला पाकिस्तान को

विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का आंदोलन अपनी परिणति तक पहुंच...

बेबाक बोल: राजकाज – शर्मसार

निर्भया के पहले भी हिंसा के ऐसे क्रूरतम मामले हुए थे और बाद भी। 2012 में दिल्ली की सड़क पर हुई बर्बरता ने पूरे...

बेबाक बोलः इम्तिहान

जम्मू के कठुआ से लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव तक जो हुआ उससे दुखद कुछ नहीं हो सकता। लेकिन इन्हीं बर्बरताओं के बीच पता...