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मुकेश भारद्वाज के सभी पोस्ट

बारादरी: आम लोगों तक पहुंच बनाई एनबीटी ने

एनबीटी के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि लोगों की जुबान पर राष्ट्रीय पुस्तक...

बेबाक बोल: 2019

आनेवाला साल 2019 है। नाम में क्या रखा है की तर्ज पर साल में क्या रखा है का भी सवाल किया जा सकता है।...

चर्चा: संवेदनहीनता का सामना करता अन्नदाता

लगातार घाटे की खेती करने से लेकर आत्महत्या तक के हालात से जूझते किसान आखिर किसे अपनी व्यथा सुनाएं? खेती में लागत और बाजार...

बेबाक बोल: रोजगार का राज

रोटी, कपड़ा और मकान, मांग रहा है हिंदुस्तान। आजादी के बाद से ही इस तरह के नारे उन सत्ताधारियों के खिलाफ गूंजा करते थे...

बारादरी: सिनेमा ने सिर्फ शहरों का बखान किया

फिल्म अभिनेता, प्रोड्यूसर, संस्कृतिकर्मी व भाजपा नेता राजा बुंदेला का मानना है कि भारतीय मुख्यधारा के सिनेमा ने सिर्फ शहरों का महिमामंडन किया है।...

बेबाक बोल: ‘जनपथ’

छविबोध की लड़ाई में पप्पू से प्रधानमंत्री के विकल्प वाले चेहरे तक का सफर। हिंदी पट्टी के तीन हृदयप्रदेशों ने ‘पप्पू’ को श्रद्धांजलि देते...

बेबाक बोल: बुलंद भारत!

पहले अल्पसंख्यक तबके का शख्स भीड़ के हाथों मार दिया जाता है। फिर एक सफेदपोश नौकरी करने वाला मध्यवर्गीय इंसान सड़क पर सरेआम मार...

बारादरी: राजनीति में प्रदूषण फैला रहे हैं केजरीवाल

पूर्वी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के सांसद महेश गिरी का कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण दिल्ली में...

बेबाक बोल: गलियारे की गुगली

सात दशक पहले अंग्रेजों से मिली औपनिवेशिक आजादी भारत विभाजन की त्रासदी के साथ सामने आई। इस त्रासदी में लहूलुहान हुई पंजाब की मिट्टी।...

बेबाक बोल: मुंतजिर-ए-वादा

भारत विभाजन के साथ ही अपने भौगोलिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कारकों व सामरिक महत्त्व के कारण कश्मीर की स्थिति विशिष्ट हो गई। अपनी इसी विशिष्टता...

बेबाक बोल: कुनबा क्रांति

हाल ही में करुणानिधि की मौत के बाद वारिसों के सत्ता संघर्ष ने दक्षिण की उस शक्तिशाली पार्टी की नींव हिला दी जो उत्तर...

बारादरी: विकास की दृष्टि से फिसड्डी है बिहार

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक होते हुए भी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद अरुण कुमार को लगता है कि जैसे वे गठबंधन का...

बेबाक बोल: अंधा संघर्ष

दूरदराज के इलाकों में ‘विकास’ पर सवाल उठा कर लाल क्रांति का घेरा डाल दिया। जो सड़क, अस्पताल और स्कूल पहुंच सकते थे वंचित...

बेबाक बोल: हे राम!

भारतीय संस्कृति में राम का कोई एक रूप नहीं। गंगा किनारे बसे नगर से लेकर जंगलों में कबीलाई सभ्यता की तरह जी रहे लोगों...

बेबाक बोल: विश्वास की हत्या

निष्पक्षता और स्वायत्तता दो ऐसे शब्द हैं जो संवैधानिक संस्थाओं को लोक और तंत्र से जोड़ते हैं। एक बेहतरीन ढांचे को पैदा करने के...

बारादरीः सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है मीटू

जो एनपीए हुआ, वह भाजपा के शासन में नहीं हुआ, वह कांग्रेस की सरकार करके गई। पेट्रोल और डीजल के दाम भाजपा सरकार की...

बेबाक बोल: सानंद के समय में

गंगा को धर्म और आरती के खाते में रख विज्ञान और तकनीक को बांध, हथियार, सॉफ्टवेयर और स्मार्टफोन बनाने में जुटा दिया। इस विज्ञान...

बेबाक बोल: करो या मरो…

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आने वाले समय में अपने अस्तित्व की परीक्षा से गुजरने वाली है। पांच राज्यों के चुनावों के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़...