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मुकेश भारद्वाज के सभी पोस्ट

मुकेश भारद्वाज का कॉलम: …और ‘खाली हाथ, खाली दिमाग’ युवा ISIS के चंगुल में फंसते चले गए

मध्यपूर्व में अमेरिका के हाथों इराक के राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन के पतन के साथ ही वहां भारी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक उथल-पुथल हुई....

ब्लॉग: बिहार में बेमेल गठबंधन, जनता को मंजूर नहीं होगा लालू के रिमोट से चलने वाला सीएम

बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तेजरफ्तार राजनीतिक रथ को रोकने के लिए जो सामूहिक ‘आक्रमण’ हुआ, उसका प्रयोग देश के राजनीतिक इतिहास में...

बेबाक बोल : चरम पर चरमपंथ

पेरिस में हुए धमाकों का दंश फ्रांस और यूरोप को ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में पूरे विश्व को सालता रहेगा। इसके जख्म...

बारी अब संभलने की: वोट प्रतिशत में सबसे ज्यादा होकर भी BJP रह गई पीछे

अच्छे दिन लाने के लुभावने वादे के दम पर प्रचंड बहुमत के साथ देश की सत्ता पर काबिज हुई भारतीय जनता पार्टी की सरकार...

Bihar Polls 2015: हार के बाद बिहार

इस बार जीत से ज्यादा हार पर नजर है। दिल्ली में हार से दो-चार होने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने किरण बेदी...

बुत हम को कहें काफिर…

कभी मयकशी पर महफिलों में हंगामा बरपाने वाले गजल गायक गुलाम अली को शायद ही कभी यह इलहाम हुआ हो कि इस हंगामे को...

बेबाक बोल : सपनों का सौदागर

बेशुमार वादों और प्रचंड बहुमत के साथ देश में सत्ता के शिखर पर काबिज हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश की धरती से अपने चिरपरिचित...

बेबाक बोल : जात न पूछो

बिहार में 1931 में पिछड़े वर्ग का अनुपात 50 फीसद से ज्यादा ही था। जबकि 20 फीसद से भी ज्यादा दलित (जिनमें अब के...

बेबाक बोल : हिंदी में नहीं रो-मन

हिंदी दिवस आसपास हो तो हिंदी पर लिखने के खतरे बढ़ जाते हैं क्योंकि इस दिन के आसपास हिंदी के तमाम झंडाबरदार, संरक्षक और...

रेल दुर्घटनाओं पर ‘बेबाक बोल’ : हादसों की पटरी

देश में रेल दुर्घटनाएं क्यों होती हैं, इसकी वजह किसी से छुपी नहीं। न तो सरकार से और न ही आम आदमी से। लेकिन...

भारत और पाकिस्तान में ‘संघर्ष-अ-विराम’

रूस के उफा में भारत और पाकिस्तान ने तय किया था कि हम मिलेंगे और शांति की राह पर चलने की बात करेंगे। लेकिन...

आतंक के रखवाले

कासिम खान उर्फ उस्मान खान उर्फ मुहम्मद नवेद खान। नाम कुछ भी हो। कोई फर्क नहीं। यह सच अपनी जगह कायम है कि उधमपुर...

भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम (1931-2015): मौत भी मिटाने में नाकाम

लिहाजा, मौत भी उनको मिटाने में नाकाम है। मौत भी उनके लिए कोई अंत नहीं वरन एक सतत घटनाक्रम का एक पड़ाव मात्र है।...