मोनिका शर्मा

मोनिका शर्मा के सभी पोस्ट 31 Articles

रजीनीति: बदलाव के मोर्चे पर जूझती बेटियां

मौजूदा समय में बेटियां शिक्षित हो रही हैं और आत्मनिर्भर भी। पर बुनियादी स्तर पर उन्हें आज भी ऐसे कई मोर्चों पर लड़ाई लड़नी...

राजनीतिः क्यों नहीं चाहते बेटियां

घर-परिवार से लेकर समाज के माहौल तक, आज भी बेटियों के जन्म को लेकर न तो सकारात्मकता दिखती है और न ही दिली स्वीकार्यता।...

राजनीतिः हांफती स्वास्थ्य सेवाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति दस हजार की आबादी पर पचास बिस्तर और पच्चीस डॉक्टर होने चाहिए। जबकि भारत में प्रति दस हजार...

आधी आवादी का सवाल

हमारे देश में सबसे ज्यादा बदलाव की दरकार समाज में मौजूद परंपराओं, रूढ़ियों और भेदभाव भरी मानसिकता की जकड़न को लेकर है। बेटे और...

राजनीति: विदेशी दूल्हे पर शिकंजा

विडंबना ही है कि ऐसे उत्पीड़न और धोखेबाजी के बावजूद हमारे यहां दूसरे देशों में बसे परिवारों में बेटियां ब्याहने को लेकर गजब का...

दुनिया मेरे आगे: संवाद की कड़ियां

आज भले ही आधुनिक तकनीक हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है, पर मशीनें इंसानी संवाद की जगह नहीं ले सकतीं। इसीलिए आज के...

कार्य संस्कृति: व्यस्तता का दुश्चक्र

अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए अब काम का समय ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली प्रभावित हो रही है। वाकई चिंतनीय है कि यह...

राजनीति: चारदिवारी में असुरक्षित स्त्री

परंपरागत सोच और रूढ़िवादी मानसिकता की जकड़न ने बहुत कुछ बदल कर भी कुछ न बदलने जैसे हालात बना रखे हैं। यही वजह है...

राजनीति: प्रदूषण की भेंट चढ़ता बचपन

हमारे देश में हालिया बरसों में महानगरों में प्रदूषण अत्यधिक तेजी से फैला है। राजधानी दिल्ली में तो हर साल प्रदूषण की स्थितियां चेतावनी...

राजनीति: खौफ में आधी आबादी

कुत्सित प्रवृत्ति के चलते होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नैतिक आदर्शों और अर्थपूर्ण मान्यताओं को विचार और व्यवहार में जगह देनी...

राजनीति: आत्महत्या की प्रवृत्ति और समाज

इसमें कोई शक नहीं कि बीते बरसों में बड़े शहरों में आबादी का दबाव तेजी से बढ़ा है। दूर-दराज के गांवों-कस्बों से लोग रोजगार...

राजनीतिः आभासी दुनिया की विकृतियां

पिछले कुछ वर्षों में दुनियाभर में करोड़ों लोग सोशल मीडिया की लत के शिकार हो गए हैं। हालात ऐसे हो चले हैं कि किसी...

राजनीतिः रस्म अदायगी के पेड़

चारों ओर ‘पेड़ लगाओ’ का शोर सुनाई पड़ता है। बड़ी संख्या में पेड़ लगाए भी जाते हैं। लेकिन असल सवाल इन पौधों को सहेजने...

राजनीतिः निराशा के भंवर में

लंबे समय तक चलने वाला इलाज और शरीर की घटती ऊर्जा से टूटता मनोबल कई बार मौत के चुनाव को मजबूर कर देता है।...

राजनीति: स्मार्टफोन की लत से बढ़ते हादसे

कभी बातचीत का माध्यम रहा मोबाइल अब चलता-फिरता मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन बन गया है। यही कारण है कि कभी सेल्फी लेते मौत,...

राजनीतिः कचरे के निपटारे की चुनौती

देश के अधिकतर शहरों में खड़े हो रहे ये कूड़े के पहाड़ स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।...

मासूमियत से यह कैसा खिलवाड़

उग्र भीड़ के उन्माद में बच्चों को कच्ची उम्र में दी जा रही विचार और व्यवहार की इस दिशाहीनता से क्या हासिल होना है?...

राजनीतिः स्त्री का डर, कानून और समाज

क्या यौनहिंसा संबंधी कानूनों में और कड़े प्रावधान कर देने भर से ये अपराध कम होने लगेंगे? निर्भया कांड के बाद देश में उठे...