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मनीषा सिंह के सभी पोस्ट

शिक्षा: फर्जीवाड़े के परिसर

शिक्षा में फर्जीवाड़े समेत कई मर्ज हैं, जैसे देश में शायद ही कोई ऐसी जगह बची हो जहां पर्चे लीक न हो रहे हों...

राजनीति: आत्ममुग्धता के उपकरण

समाजशास्त्रियों के मुताबिक सेल्फियों और ट्विटर-फेसबुक के जरिए सतत संपर्क में रहने की सुविधा ने लोगों को एक तरह के आवेगपूर्ण जीवन में धकेल...

मुद्दा: अनसुनी गुहारें

मदद के कई रूप हैं, लेकिन इनकी शुरुआत गुहार या पुकार से होती है। इस पुकार का एक आधुनिक रूप टेलीफोन की हेल्पलाइन या...

आधी दुनियाः सुंदरता और उत्पीड़न

स्त्री को यों प्रकृति की सुंदर और रहस्यमय रचना कहा जाता है। कई मायनों में वह है भी। इस धारणा के आधार पर कुछ...

आधी दुनियाः हमारी थोड़ी-सी बेवफाई..

दुनिया में प्रेम को नए ठिकाने मिल चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और ऑनलाइन डेटिंग की वेबसाइटों के जरिए पूरी दुनिया के साथ हमारे देश...

नकली जिंदगी, जानलेवा खेल

पिछले कुछ सालों में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से खेले जाने वाले खेलों का बाजार काफी बढ़ा है। इन खेलों में ऐसे...

राजनीति: कैसे रुकेगी वैवाहिक प्रताड़ना

हमारे समाज में विवाहित महिलाओं के लिए यह बात कोई नई नहीं है कि उन्हें कई बार अपने जीवन साथी से हैवानियत के स्तर...

माध्यमः फरेब का खेल

साफ है कि टीवी पर दिखाए जाने वाले ऐसे ज्यादातर कार्यक्रमों का उद्देश्य कथित मनोरंजन के नाम दर्शकों की भीड़ जुटाने (टीआरपी के खेल)...

राजनीतिः मुश्किल डगर पर शहरी महिलाएं

पूरी दुनिया में स्त्री का जीवन बदलावों से गुजरता है। उनका पहला जीवन मायके से जुड़ा होता है, विवाह के बाद का जीवन ससुराल...

राजनीतिः खुशी का यह कैसा इजहार

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार आदि उत्तर भारतीय राज्यों में हर्ष फायरिंग रूपी दबंगई और दिखावे की सामंती परंपरा एक लाइलाज मर्ज बन गई है।...

राजनीतिः गोरेपन की चाहत निरापद नहीं

वैसे तो अगर स्त्रियां गोरी व सुंदर दिखना चाह रही हैं, तो यह उनकी मर्जी पर छोड़ा जाना चाहिए, पर अफसोस यह है कि...

राजनीति: उम्र के नए दायरों की चुनौती

अब इस आयु-वर्ग के युवाओं का सारा ध्यान अपने कैरियर-रोजगार पर है, इसलिए वे शादी और बच्चे पैदा करने जैसे जीवन के बेहद अहम...

राजनीति: जिंदगी से जोर आजमाइश करती सुंदरता

सौंदर्य प्रसाधनों में बड़ी मात्रा में खतरनाक तत्त्वों का मिलना साबित करता है कि न तो उनकी नियमित जांच हो रही है न उनकी...

राजनीतिः डरे हुए समाज में खुशी की खोज

तेज आर्थिक तरक्की और एक छोटे-से तबके की खुशहाली ने ज्यादातर लोगों में अच्छी जिंदगी की महत्त्वाकांक्षा तो जगा दी है, लेकिन उसे हासिल...

राजनीतिः अवसाद की फैलती विशबेल

अवसाद नई महामारी की तरह फैल रहा है। नौकरी या प्रेम में असफलता जैसी चीजें पहले भी थीं, पर पहले युवा इतनी जल्दी जिंदगी...

प्रसंगवश- घर बाहर के बीच

घर के साथ नौकरी का जैसा दबाव महिलाओं पर होता है, पुरुष न तो वैसा दबाव झेलते हैं और न ही नियोक्ता से लेकर...

परदेस में शादी

पहले ज्यादातर शादियां पारिवारिक मित्रों, पंडितों और जान-पहचान के दायरे में काम करने वाले बिचौलियों के जरिए संपन्न कराई जाती थी, जिनमें ऐसी धोखाधड़ी...

हंसते हंसते रोना सीखो

जिस तरह जन्म के वक्त बच्चे के रुदन को जीवन की निशानी माना जाता है, उसी तरह जीवन के किसी भी चरण में...