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महेंद्र अवधेश के सभी पोस्ट

आत्मविश्लेषण का पर्व

जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र और भाषा जैसे सवालों ने अपने जहरीले डैने पसार रखे हैं। ऐसे में हमारे राष्ट्रीय पर्वों की प्रासंगिकता और भी...

चिंता- लापरवाही के शिकार मरीज

प्रसव के लिए की गई सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पीड़िता रुबीना के गर्भाशय में सुई छोड़ दी थी, जिसके चलते अब वह कभी...

इंसाफ का अंतहीन इंतजार

बचपन में बुजुर्गों से अक्सर सुनता था कि भगवान, दुश्मन को भी कचहरी और अस्पताल का मुंह न दिखाएं।

राजनीतिः भूखे लोग और भोजन की बर्बादी

बीती इक्कीस फरवरी को जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपने एक अपूर्व फैसले के तहत शादी समारोह में मेहमानों से लेकर व्यंजनों की संख्या तक सीमित...

क्यों बढ़ रही है इलाज में लापरवाही

मौत के बाद अस्पताल प्रशासन मरीज का शव तब तक घरवालों के सुपुर्द नहीं करते, जब तक इलाज की पाई-पाई अदा न हो जाए।

राजनीतिः महिमा गान बनाम मुआवजा

कोई मुआवजा पाने के लिए शहादत नहीं देता। पर हमारे जो जवान सर्दी, गर्मी और बरसात यानी हर मौसम में सीमा पर मुस्तैद रहते...

चिंता : भिक्षावृत्ति का कलंक

2011 की जनगणना रिपोर्ट बताती है कि देश में तीन लाख बहत्तर हजार भिखारी थे, जिनमें से 21 फीसद यानी 78 हजार भिखारी शिक्षित...

मुद्दा : पाबंदी से आगे

सड़क पर भीख मांगने और कुछ गलत करने से अच्छा है कि महिलाएं स्टेज पर डांस करके रोजी-रोटी कमाएं, जीवनयापन करें। आप नहीं कह...

राजनीतिः न्याय का मुखौल उड़ाती पंचायतें

अधिकतर लोग पंचायत नामक संस्था को सही अर्थों में समझ नहीं पा रहे हैं। वास्तव में पंचायत, वह चाहे जाति के आधार पर गठित-स्थापित...

बेटियों की जगह

करीब तीन साल पहले पश्चिम बंगाल के नादिया की रहने वाली एक बारह वर्षीया बच्ची मंपी ने अपनी जान दे दी, ताकि वह अपने...

आचरण की कसौटी पर शिक्षक

बीते सोलह नवंबर को बंगलुरु के परपाना अग्रहारा थाना अंतर्गत स्थित एक निजी स्कूल की चार वर्षीय छात्रा के साथ शारीरिक शिक्षा के उसके...