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कमल कुमार के सभी पोस्ट

आधी दुनिया: दो पाटन के बीच

बच्चों की देखभाल ठीक से नहीं हो पा रही थी। अधिकतर लड़कियों के साथ यही हो रहा है। शादी के समय ग्यारह प्रतिशत लड़कियां...

अच्छी मां

इन दिनों बहुत-सी कविताएं ‘मां’ पर पढ़ने को मिलीं। इनमें से अधिकतर कविताएं पुरुषों की थीं। सभी में मां का अपनी-अपनी तरह से निरूपण...

कहानी: शुरुआत

मैंने बेटी का दाखिला इग्नू में करवा दिया है। मैं उसकी मदद करूंगी। उसके बच्चों को देखना पड़ा तो देखूंगी। कोर्स के बाद अगर...

दुनिया मेरे आगे: विकृतियों के ठिकाने

लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर कुछ ऐसी बातों को भी न्यायसंगत ठहराया जा रहा है जो तार्किक दृष्टि से नहीं, संवेदना...

दुनिया मेरे आगे: खुशहाली की खोज

भारतीय स्त्री की अवधारणा में सिर्फ ‘बेचारी’ और ‘विचारहीन’ नारी का महिमामंडन किया गया, जो सिर्फ अनुगमन और अनुसरण करे। वह कभी प्रश्न न...

दुनिया मेरे आगेः ढलती शाम में

तीन पीढ़ियों में सौहार्द और समरसता वाले परिवार हमारी सुदृढ़ सामाजिक ईकाई की पहचान रहे हैं। लेकिन इस ढांचे में बिखराव ने शायद भावनाओं...

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