गणेशनंदन तिवारी

गणेशनंदन तिवारी के सभी पोस्ट 88 Articles

हमारी याद आएगीः जोश तूफानी, बाकी सब बेमानी

बॉम्बे टॉकीज ने फिल्मोद्योग को अशोक कुमार, देविका रानी, दिलीप कुमार जैसे कलाकार दिए। ‘महल’ से लता मंगेशकर को सफलता का स्वाद चखाया। ‘बसंत’...

जब बेटे ने पिता की साख बचाई

‘बॉबी’ हिंदी सिनेमा में कोमल प्यार की दास्तान वाली पहली फिल्म थी। इस फिल्म ने ‘बेताब’, ‘लव स्टोरी’ और ‘मैंने प्यार किया’ जैसी टीनेज...

जनसत्ता विशेष स्मृति शेष: और बॉलीवुड, हॉलीवुड, दर्शक सभी बन गए इरफान के दीवाने

1988 में ‘सलाम बॉम्बे’ में छोटी-सी भूमिका से इरफान ने शुरुआत की, तब उन्हें कोई नहीं जानता था। अगले 15 सालों तक संघर्षरत अभिनेता...

नानाभाई भट्टः रिश्तों का ‘अर्थ’ और ‘सारांश’

पृथ्वीराज कपूर का खानदान भरा-पूरा है। उनके बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने अपनी अलग-अलग फिल्म कंपनियां बनार्इं। चेतन आनंद की...

पांच तोले सोने का सितारा

जब भी सामाजिक फिल्मों में झगड़ालू सास की भूमिकाओं की बात आती है, ललिता पवार का नाम दिमाग में सबसे पहले आता है, जिनकी...

हमारी याद आएगीः फिल्मों के रंग को लेकर बदल गए निर्देशक

नासिर हुसैन ने शम्मी कपूर और आरडी बर्मन को पहली हिट फिल्में दीं। आशा पारेख को बतौर हीरोइन और उषा खन्ना को ‘दिल देके...

सबरंग: नसीब में जिसके जो लिखा था….

‘बाबुल की दुआएं लेती जा...’ और ‘डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली...’ जैसे विदाई गीत हों, ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार...’ और ‘तुम अगर साथ...

25 साल में 40 बार हड्डियां टूटी थीं शेट्टी की, ‘तुम सलामत रहो’ में थे हीरो

जिस पेशे से शेट्टी ने रोटी निकाली उसने जीवन के आखिरी दौर में शेट्टी को तोड़ दिया था।

मोहम्मद रफी को अपना गुरु मानते थे महेंद्र कपूर, फिर भी दोनों ने तय किया था एक साथ नहीं गाएंगे

‘नीले गगन के तले...’, ‘न मुंह छुपा के जियो’, ‘मेरे देश की धरती’ जैसे कई लोकप्रिय गानों के दम पर महेंद्र कपूर ने किशोर,...

हमारी याद आएगीः सोने के पदक से सोने की लंका तक

अरोड़ा को जिस ‘यादों की बरात’ से सफलता मिली थी, उसे हिंदी फिल्मों की पहली मसाला फिल्म माना जाता है। 1973 में अमिताभ की...

हमारी याद आएगी: आखिरी जन्मदिन का अनोखा तोहफा

तब सुब्बुलक्ष्मी तमिल फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री और गायिका थीं। पूरा दक्षिण उनका दीवाना था।

सुब्रत मित्रा: एक नाम जिसने बॉलीवुड ग्लैमर को रोशनी से नया रंग दिया

फिल्मों के कैमरामैनों के लिए रोशनी किसी अनियंत्रित हाथी की तरह होती है, जिसे काबू में करना जरूरी होता है। मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा...

Bollywood Past: राज कपूर से भी महंगे हीरो बन गए थे Prem Nath

निर्माता घर में आते थे प्रेमनाथ को लगता था कि वह उन्हें साइन करने आए, लेकिन वे बीना राय को साइन कर चले जाते...

‘ताल’ से शुरू ‘लता’ पर खत्म

लिहाजा जब डावजेकर को ‘आपकी सेवा में’ (1943) नामक हिंदी फिल्म में संगीत देने का मौका मिला।

सबरंग-हमारी याद आएगी: आज रपट जाएं तो हमें न उठइयो…

स्मिता पाटील में देश की चारों दिशाओं के फिल्मकारों को अपनी कहानी के पात्र नजर आए। नतीजा यह हुआ कि स्मिता ने पंजाबी फिल्म...

सबरंग-हमारी याद आएगी: मरने के बाद भी नहीं मरा कालिया

पैंतीस सालों तक कालिया दर्शकों के दिमाग में इस शिद्दत से जिंदा था कि निर्देशक अश्विनी धीर ने ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ (2010)...

हमारी याद आएगी: जब पहली बार तमिल फिल्मों को हिंदी बाजार मिला

राजश्री प्रोडक्शन (प्रा.) लि. की नींव ताराचंद बड़जात्या ने 1947 में रखी थी। सिनेमा कारोबार के तीनों अंगों-निर्माण, वितरण और प्रदर्शन- में समान रूप...

जनसत्ता सबरंग: ‘अफसाना लिख रही हूं दिले बेकरार का…’

फिल्मजगत की चकाचौंध से बहुत कम ही लोग बच पाते हैं। ऐसे में अगर फिल्मों में सफलता मिल जाए तो फिर फिल्मों से दूर...