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गणेशनंदन तिवारी के सभी पोस्ट

जब एनटीआर न्याय मांगने जनता के पास गए

सन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर के दम पर कांग्रेस ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 541 में से...

नेता और अभिनेता: जब छोटे परदे पर उतरे भगवान

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में सूचना और प्रसारण मंत्री वीएन गाडगिल से कहा कि दूरदर्शन पर देश के लोगों की आस्था-विश्वास के...

बॉलीवुड को पता है सियासत कितनी और कैसे करनी है

राजीव गांधी के आह्वान पर ही सुपर स्टार राजेश खन्ना कांग्रेस में आए। 1991 में लाल कृष्ण आडवानी से वे मात्र 1589 वोटों से...

हमारी याद आएगी: जब मधुबाला ने ‘गुलाम’ को ‘साहिब’ बनाना चाहा

मधुबाला ने उस हॉलीवुड को भी न कह दिया था, जिसमें काम करने के लिए भारतीय अभिनेत्रियां एक पैर पर खड़ी हो जाती हैं।...

हमारी याद आएगी: मुकम्मल जहां पाने की छटपटाहट…

हर रचनाकार अपनी रचना को मुकम्मल बनाने की जद्दोजहद करता है और उसके लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार हो जाता...

हमारी याद आएगी: जिन खोजा तिन पाइया

कर्नाटक और महाराष्ट्र में सीमा विवाद को लेकर सालों से अनबन है और मामला अदालत में है। कुछ गावों को लेकर दोनों राज्यों में...

हमारी याद आएगी: एमजी रामचंद्रन, जिंदगी इम्तहान लेती है…

1944 में पेरियार (जस्टिस ईवी रामास्वामी) ने गैरराजनैतिक जस्टिस पार्टी (1916 में बनी) को नया नाम दिया द्रविड़ कझगम और स्वतंत्र राज्य द्रविड़नाडु की...

…और उन्हें भारत फिर खींच लाया

हिंदी फिल्मों में स्टार संस का दौर हमेशा ही रहा। वक्त के साथ नामीगिरामी सितारों के भाई भी फिल्मों में सक्रिय हुए। अशोक कुमार-किशोर...

जब मनमोहन देसाई ने कादर खान को चुनौती दी

मुंबई फिल्मजगत में 70 और 80 के दशक में दो मशहूर कैम्पों (मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा) में प्रतिस्पर्धा थी। प्रतिस्पर्धा और बयानबाजी का...

जनसत्ता सबरंग: जब काका का दिल ‘डिंपल’ पर आया

फिल्म कलाकारों को जीवन में कभी-कभी पैसों या प्रगाढ़ रिश्तों के कारण भी फिल्में साइन करनी पड़ती हैं। राजेश खन्ना (जिनकी शनिवार 76वीं जयंती...

बाबूभाई मिस्त्री: काले धागे का कमाल कर बन गए फोटोग्राफी के पितामह

1930 के दशक में जब फिल्मजगत में कंप्यूटर ग्राफिक्स नहीं थे, किसी ने सॉफ्टवेयर और स्पेशल इफेट्स का नाम भी नहीं सुना था, गुजरात...

शोमैन की ‘आह’ से निकला आभार

हिंदी में ‘आह’ की विफलता ने राज कपूर के इसी सपने को झटका दिया था मगर ‘प्रेमा लेखलु’ की सफलता से उनकी उम्मीदों को...

हमारी याद आएगी: फिल्म तो बोली, मगर हीरो नहीं बोला

आलम आरा’ ने दो चीजें फिल्म जगत में और स्थापित कर दीं, जो सिनेमा कारोबार का एक हिस्सा ही बन गईं। एक तो ब्लैक...

आग में जलकर भी जी उठा पहला ‘देवदास’

जब तक लोग न्यू थियेटर्स की ‘देवदास’ देखेंगे, तब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे। और जब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे, तब तक प्रमथेशचंद्र...

सबरंग- हमारी याद आएगी: ब्राडवे और प्लाजा के बीच पली एक प्रेम कहानी

मुंबई के उपनगर दादर (पश्चिम) में फिल्मकार वी शांताराम का ऐतिहासिक सिनेमाघर प्लाजा। उससे कुछ दूर पर सामने दाहिने हाथ पर है ब्राडवे मिनी...

जब एसडी बर्मन के इनकार ने चित्रगुप्त का रास्ता खोला

पटना में प्रोफेसर रहे चित्रगुप्त ने कई फिल्मों में गाने बनाए। इनमें ‘लागी छूटे ना...’, ‘दगा दगा वई वई...’ (काली टोपी लाल रूमाल), ‘जय...

सबरंग- हमारी याद आएगी: नारायण की कल्पना, शंकर ने बदली हकीकत में

सिनेमा की दुनिया में दक्षिण के दो शंकर मशहूर हैं। एक तो 55 साल के मैकेनिकल इंजीनियर शंकर षणमुगम, जिन्हें दर्शक अनिल कपूर की...

हमारी याद आएगी: जब ऊंघती तबस्सुम को देख रुकवा दी शूटिंग

बुलंद आवाज और धारदार संवाद अदायगी के लिए सराहे जाने वाले फिल्मकार और अभिनेता सोहराब मोदी नाटकों की दुनिया से फिल्मों में आए। 1931...