गणेश नंदन तिवारी के सभी पोस्ट

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याद हमारी आएगीः मीना कुमारी से शादी की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे प्रदीप कुमार

प्रदीप कुमार ने 1951 तकबांग्ला फिल्मों में काम करने के बाद मुंबई जाकर किस्मत आजमाना तय किया।

याद हमारी आएगीः रुपए में सहगल, चवन्नी में अशोक कुमार

यह संयोग ही है कि 13 अक्तूबर को अशोक कुमार का जन्म हुआ था और 13 अक्तूबर को ही किशोर कुमार का निधन।

असली महफिल तो थी विनोद खन्ना ने लूटी

मेरा गांव मेरा देश’ (1971) में जब्बर सिंह की भूमिका विनोद खन्ना ने निभाई थी, जिनका आज जन्मदिन है।

हमारी याद आएगीः बेटी पाने की चाह में तड़पते रहे महमूद

महमूद का फैला हुआ परिवार था। वह मां लतीफुन्निसा के करीब थे। मां ने एक बार पैसा कमाने के लिए कहा, तो महमूद ने...

याद हमारी आएगीः खोटे का खरापन

उस दौर में कलाकार मासिक तनख्वाह पर काम करते थे। प्रभात, न्यू थियेटर्स, प्रकाश पिक्चर्स, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी जैसे कई स्टूडियो फिल्में बनाते...

तड़के चार बजे पिकासो को देखने जा पहुंचे भूपेन हजारिका

आप जिसके प्रशंसक होते हैं और जिसकी एक झलक पाने का ख्वाब देखते हैं, मौका मिलते ही इस ख्वाब को पूरा करने की कोशिश...

जब पसंद आया साधना का चूड़ीदार

साधना ने बीआर चोपड़ा की मल्टीस्टारर फिल्म ‘वक्त’ (1965) में जो चूड़ीदार सलवार-कमीज पहना था और ‘लव इन शिमला’ में जिस तरह की हेअर...

याद हमारी आएगीः जब मुकेश के प्यार पर लगे पहरे

कुंदनलाल सहगल से प्रभावित रहे मुकेशचंद्र माथुर यानी मुकेश को पहली बड़ी सफलता ‘पहली नजर’ फिल्म में आह सीतापुरी के लिखे अनिल बिस्वास के...

अधूरा रह गया गुलशन कुमार का सपना

मुंबई फिल्मजगत में अपना मकाम बनाना कभी भी आसान नहीं रहा है। यहां शुरुआत में संघर्षरतों की जमकर उपेक्षा की जाती है।

जब रितिक के दादाजी ने फिल्मों का प्रस्ताव ठुकराया

यति के खेल निराले होते हैं। शैलेंद्र को ना चाहते हुए भी सिनेमा में गीत लिखना पड़ा और उन्हीं राज कपूर की ‘बरसात’ में...

…और मदन मोहन के संगीत में खामोश हो गया सितार

कई बार ऐसे मौके आते हैं जब छोटी-छोटी बातें रिश्तों में ऐसी दरार पैदा कर देती हैं, जिन्हें भरा नहीं जा सकता। संगीतकार मदन...

जब सुरैया ने देव आनंद को फिल्म सेट से बाहर निकलवाया

सुरैया और देव आनंद के करियर व निजी जीवन में प्रताप ए राणा (राणा प्रताप सिंह) का क्या योगदान है? राणा प्रताप सुभाषचंद्र बोस...

वहीदा से राज खोसला को 26 साल बाद माफी मिली

‘सोलवां साल’ हेमंत कुमार के गाए ‘है अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आएगा...’ गाने और आरडी बर्मन के बजाए माउथ आॅर्गन...

राजेश-डिंपल को परदे पर नहीं उतार पाए राज

परदे पर ‘बॉबी’ सोलह साल की लड़की और अठारह साल के लड़के के कोमल प्यार का एहसास थी, तो परदे के पीछे एक शोमैन...

‘मदर इंडिया’ बनाम ‘मदर इंडिया’

सन 1927 में कैथरीन मेयो की लिखी किताब ‘मदर इंडिया’ छपी तो इसने भारतीयों की भावनाओं को जबरदस्त ठेस पहुंचाई थी।

प्रकाश मेहरा की बेंच और फरीद मियां का लिफाफा

मां का बचपन में निधन हो गया और पिता इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके। कपड़ों के कारोबारी पिता का दिल उचटा तो...

जब जज बने नौशाद प्रतियोगिता छोड़कर भागे

सन 1930-31 में लखनऊ के रॉयल सिनेमा में कोई मूक फिल्म चल रही थी। वहां हारमोनियम पर उस्ताद लड्ढन, तबले पर उस्ताद कल्लन और...

अलविदा ओमः सामान्य सूरत से बनी एक बड़ी मूरत

सौंदर्य और संगीत को प्रधानता देने वाले बॉलीवुड में ओम पुरी जैसे सामान्य चेहरे मोहरे वाले कलाकार के लिए कितनी जगह हो सकती थी?...

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