गणेश नंदन तिवारी

गणेश नंदन तिवारी के सभी पोस्ट 41 Articles

हमारी याद आएगीः रविंद्र जैन का नीम रोशनी में पला संगीत

बड़ा होकर यही बच्चा रवींद्र जैन के नाम से मुंबई फिल्मजगत तक पहुंचा और उसकी विलक्षण प्रतिभा से न सिर्फ फिल्मों को सुरीलापन मिला...

सबरंग: ‘अनारकली’ के पीछे की कहानी

नूतन को कुछ भी आसानी से नहीं मिला। खूब मेहनत करनी पड़ी। ‘मुगले आजम’ ने मधुबाला को, ‘पाकीजा’ ने मीना कुमारी को और ‘गाइड’...

हमारी याद आएगीः एक मसखरे का आखिरी मजाक

‘जौहर महमूद इन गोवा’, ‘जौहर इन कश्मीर’, ‘जौहर इन बॉम्बे’, ‘मेरा नाम जौहर’, ‘जौहर महमूद इन हांग कांग’ जैसी फिल्मों से उन्होंने खूब लोकप्रियता...

हमारी याद आएगीः ताकतवर आंखों का तिलिस्म

K N singh death anniversary: के एन सिंह के पिता चंडीप्रसाद सिंह क्रिमिनल केस लड़ने वाले नामी वकील थे। एक बार पिता ने अकाट्य...

हमारी याद आएगीः हाथों की लकीरों में खुदा अनाम रिश्ता, कुछ ऐसी थी चेनत आनंद की लव स्टोरी

लंदन की रॉयल अकादमी आॅफ ड्रामेटिक आर्ट्स से प्रशिक्षित अभिनेत्री वीरा सुंदर सिंह (प्रिया राजवंश) की तस्वीर में पता नहीं ऐसा क्या अद््भुत आकर्षण...

हमारी याद आएगीः बिछड़े सभी बारी-बारी

गुरु दत्त की नियति थी कि एक के बाद एक उन्हें उनसे दूर होते चले गए। यहां तक कि उनकी पत्नी गीता दत्त भी...

हमारी याद आएगीः संगीत के कदरदान मिले और वे चमकते गए

मोहम्मद रफी और आशा भोसले को संगीतकारों ने ऊपर की पट्टी से गवा गवा कर लाउड स्पीकर बना रखा था। जब रफी को ‘शोला...

याद हमारी आएगीः दंगल के बाद अनोखे दोस्त बने किंग कांग और दारा सिंह का वो दंगल…

दारा सिंह भारतीय सिनेमा और समाज दोनों में शक्ति का प्रतीक रहे हैं। हिंदी सिनेमा-धारावाहिक बनाने वालों को आज तक उनसे बेहतर हनुमान नहीं...

खलनायिकाओं की शान, जिसकी एक कांटे ने ली जान

हिंदी फिल्मों के शुरुआती दौर की खलनायिकाओं में कुलदीप कौर की अपनी शान थी। शादीशुदा कुलदीप और शादीशुदा प्राण लंबे समय तक अच्छे मित्र...

हमारी याद आएगीः योडलिंग के गुरु थे अनूप और चेला किशोर

किशोर कुमार अपने गानों में योडलिंग (गाने में तेजी से आए उतार-चढ़ाव) के लिए जाने जाते हैं, जिसे संगीतकार एसडी बर्मन गला तोड़ कर...

हमारी याद आएगीः जब सोहराब मोदी बने ‘मुगले आजम’ के निर्देशक

लगभग चौदह सालों में बनी ‘मुगले आजम’ के निर्माण के दौरान एक बार ऐसी स्थिति भी आ गई थी, जब इसके निर्देशक के आसिफ...

हमारी याद आएगीः जो परदे से निकले और यादों में समा गए, हमेशा किए जाएंगे याद

विनोद खन्ना (निधन, 27 अप्रैल) सिर्फ ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मेरा गांव मेरा देश’ या ‘दयावान’ के कारण ही याद नहीं किए जाएंगे, बल्कि उस...

हमारी याद आएगीः खुली जेल से पाठशाला तक पहुंचा सिनेमा

वसंत देसाई अभिनेता संगीतकार ही नहीं थे, सामाजिक सरोकारों के लिए सक्रिय भागीदारी करने वाले इनसान थे। उन्होंने लंबे समय तक फिल्मकार वी शांताराम...

हमारी याद आएगीः आह से निकला आखिरी दिन

पहली फिल्म बनाने जा रहे उस फिल्म निर्माता की मानसिक दशा का अंदाजा लगाइए जो कई तकलीफें उठा कर फिल्म की शूटिंग पूरी करके...

हमारी याद आएगीः नीली आंखों की चाहत में

कपूर परिवार की दूसरी पीढ़ी फिल्मों में आई तब स्टार सिस्टम नहीं था, स्टार संस का सिस्टम भी नहीं था। स्टूडियो सिस्टम था और...

हमारी याद आएगीः देवानंद ने करवाया था पांच मिनट में लता-जयदेव का समझौता

लता मंगेशकर नवकेतन फिल्म्स की फिल्मों की प्रमुख आवाज रहीं। नवकेतन की स्थापना देव आनंद ने 1949 में की थी। मगर अचानक लता मंगेशकर...

हमारी याद आएगीः टुनटुन गाने वाली थीं ‘आएगा आने वाला…’ गाना

फिल्मों में संघर्ष करने वाले ज्यादातर कलाकारों के लिए पहला मौका बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। इसके लिए वह किसी भी तरह का अनुबंध साइन...

हमारी याद आएगीः तीन दशक तक अमीर, डेढ़ दशक तक गरीब

पंजाब के रायविंड से 20 साल की खुर्शीद जहां अपनी बहन के पास मुंबई घूमने गईं।