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गणेश नंदन तिवारी के सभी पोस्ट

हमारी याद आएगीः योडलिंग के गुरु थे अनूप और चेला किशोर

किशोर कुमार अपने गानों में योडलिंग (गाने में तेजी से आए उतार-चढ़ाव) के लिए जाने जाते हैं, जिसे संगीतकार एसडी बर्मन गला तोड़ कर...

हमारी याद आएगीः जब सोहराब मोदी बने ‘मुगले आजम’ के निर्देशक

लगभग चौदह सालों में बनी ‘मुगले आजम’ के निर्माण के दौरान एक बार ऐसी स्थिति भी आ गई थी, जब इसके निर्देशक के आसिफ...

हमारी याद आएगीः जो परदे से निकले और यादों में समा गए, हमेशा किए जाएंगे याद

विनोद खन्ना (निधन, 27 अप्रैल) सिर्फ ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मेरा गांव मेरा देश’ या ‘दयावान’ के कारण ही याद नहीं किए जाएंगे, बल्कि उस...

हमारी याद आएगीः खुली जेल से पाठशाला तक पहुंचा सिनेमा

वसंत देसाई अभिनेता संगीतकार ही नहीं थे, सामाजिक सरोकारों के लिए सक्रिय भागीदारी करने वाले इनसान थे। उन्होंने लंबे समय तक फिल्मकार वी शांताराम...

हमारी याद आएगीः आह से निकला आखिरी दिन

पहली फिल्म बनाने जा रहे उस फिल्म निर्माता की मानसिक दशा का अंदाजा लगाइए जो कई तकलीफें उठा कर फिल्म की शूटिंग पूरी करके...

हमारी याद आएगीः नीली आंखों की चाहत में

कपूर परिवार की दूसरी पीढ़ी फिल्मों में आई तब स्टार सिस्टम नहीं था, स्टार संस का सिस्टम भी नहीं था। स्टूडियो सिस्टम था और...

हमारी याद आएगीः देवानंद ने करवाया था पांच मिनट में लता-जयदेव का समझौता

लता मंगेशकर नवकेतन फिल्म्स की फिल्मों की प्रमुख आवाज रहीं। नवकेतन की स्थापना देव आनंद ने 1949 में की थी। मगर अचानक लता मंगेशकर...

हमारी याद आएगीः टुनटुन गाने वाली थीं ‘आएगा आने वाला…’ गाना

फिल्मों में संघर्ष करने वाले ज्यादातर कलाकारों के लिए पहला मौका बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। इसके लिए वह किसी भी तरह का अनुबंध साइन...

हमारी याद आएगीः तीन दशक तक अमीर, डेढ़ दशक तक गरीब

पंजाब के रायविंड से 20 साल की खुर्शीद जहां अपनी बहन के पास मुंबई घूमने गईं।

हमारी याद आएगीः न गाने वाला तानसेन

महबूब खान का स्नेह सुरेंद्र पर बरस रहा था। उन्होंने सुरेंद्र को अपनी आठ फिल्मों का हीरो बनाया, जिनमें 1940 की वह ‘औरत’ भी...

याद हमारी आएगीः लक्ष्मीकांत ने प्यारेलाल को विदेश जाने से रोका था

लक्ष्मीकांत लक्ष्मीपूजा के दिन पैदा हुए थे, तो परिवार ने उनका नाम लक्ष्मीकांत रख दिया, इस उम्मीद से कि एक दिन लड़का अपने नाम...

याद हमारी आएगीः मीना कुमारी से शादी की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे प्रदीप कुमार

प्रदीप कुमार ने 1951 तकबांग्ला फिल्मों में काम करने के बाद मुंबई जाकर किस्मत आजमाना तय किया।

याद हमारी आएगीः रुपए में सहगल, चवन्नी में अशोक कुमार

यह संयोग ही है कि 13 अक्तूबर को अशोक कुमार का जन्म हुआ था और 13 अक्तूबर को ही किशोर कुमार का निधन।

असली महफिल तो थी विनोद खन्ना ने लूटी

मेरा गांव मेरा देश’ (1971) में जब्बर सिंह की भूमिका विनोद खन्ना ने निभाई थी, जिनका आज जन्मदिन है।

हमारी याद आएगीः बेटी पाने की चाह में तड़पते रहे महमूद

महमूद का फैला हुआ परिवार था। वह मां लतीफुन्निसा के करीब थे। मां ने एक बार पैसा कमाने के लिए कहा, तो महमूद ने...

याद हमारी आएगीः खोटे का खरापन

उस दौर में कलाकार मासिक तनख्वाह पर काम करते थे। प्रभात, न्यू थियेटर्स, प्रकाश पिक्चर्स, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी जैसे कई स्टूडियो फिल्में बनाते...

तड़के चार बजे पिकासो को देखने जा पहुंचे भूपेन हजारिका

आप जिसके प्रशंसक होते हैं और जिसकी एक झलक पाने का ख्वाब देखते हैं, मौका मिलते ही इस ख्वाब को पूरा करने की कोशिश...

जब पसंद आया साधना का चूड़ीदार

साधना ने बीआर चोपड़ा की मल्टीस्टारर फिल्म ‘वक्त’ (1965) में जो चूड़ीदार सलवार-कमीज पहना था और ‘लव इन शिमला’ में जिस तरह की हेअर...