जगमोहन सिंह राजपूत

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33 Articles

पूर्वाग्रह से दुराग्रह तक

देश ने जाति-आधारित राजनीति को पनपते और उसके द्वारा सामाजिक विभेद बढ़ते देखा है। जब भी बड़े स्तर पर प्रजातंत्र की मूल भावना के...

पंथनिरपेक्षता के परिप्रेक्ष्य

भारत में पंथनिरपेक्षता को सही स्वरूप देने के लिए इस सत्य को बिना किसी लाग-लपेट के स्वीकार करना होगा कि देश का विभाजन पूरी...

बरास्ते राग दरबारी

स्थिति यह है कि पीड़ित, प्रताड़ित, शोषित और अपमानित व्यक्ति को संरक्षण और न्याय पाने के विधिक रास्ते तो अनेक हैं, मगर व्यवहार में...

सहयोग का समय

क्या यह देश का दुर्भाग्य नहीं है कि आज भी देश में अनेक ऐसे समुदाय और समूह हैं, जो टीका लगवाने के लिए तैयार...

ज्ञान और शोध के संदर्भ

भारतीय दर्शन, संस्कृति तथा समाज के मानवीय पक्षों की महत्ता का वैश्विक स्तर पर अप्रतिम प्रभाव पड़ा था। ज्ञान सर्जन कर अपनी प्राचीन प्रतिष्ठा...

ज्ञानार्जन में गतिशीलता

आवश्यकता है कि हर अध्यापक इस सिद्धांत को अपने प्रशिक्षण काल में आत्मसात कर ले कि कोई भी किसी को सिखाता नहीं, सभी अपने...

राजनीति: भविष्य की चुनौतियां और शिक्षा

विश्व के समक्ष एक जो बहुत बड़ी चुनौती उभरी है, वह है- साथ-साथ रहना सीखना! ऐसी कोई शिक्षा व्यवस्था जो केवल ज्ञान देने का...

शिक्षा: सतत सीखने की ललक

शिक्षा के मूल उद्देश्य और लक्ष्य शास्वत हैं, मगर शिक्षा ग्रहण करने की हर परंपरा और विधा स्वभावत: गतिशील ही होगी, क्योंकि शिक्षा ही...

राजनीति: बुनियादी तालीम से नई शिक्षा नीति तक

नई तालीम की संकल्पना और संरचना भारत की ज्ञान अर्जन की उस परंपरा पर आधारित थी, जिसकी जड़ें गहराई तक भारत की मिट्टी में...

शिक्षा: गांधी से सीख

सत्य को ईश्वर मानने वाले गांधी को हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं थी। ऐसा न करने से ही उनके जीवन का रास्ता...

राजनीति: विविधता की संस्कृति और शिक्षा

गांधी जी ने भारत की सामाजिकता, उसकी सांस्कृतिक परिपक्वता को समझा था, धर्म यानि सदाचरण के महत्त्व को समझा था और उसे व्यावहारिक स्वरूप...

राजनीति: समस्या समाधान की दिशा

भारत में प्रवासी मजदूरों को लेकर जो स्थिति बनी है, वह कार्यपालिका में दूरदृष्टि की अनुपस्थिति का चिंताजनक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। इसी...

जनसत्ता प्रसंग: ग्राम स्वराज की संभावना

भारत में गांव, किसान, और कृषि की जो समझ गांधीजी दे गए हैं, उसकी तरफ से आंख मूंद लेने के परिणाम सामने हैं। कृषि...

राजनीति: वैश्विक उत्तरदायित्व बोध की चुनौती

अहिंसा के सिद्धांत से सहमति सभी राष्ट्रों ने दी, मगर तैयारियां तो युद्ध की होती रहीं, और आज भी हो रहीं हैं। वैज्ञानिक और...

राजनीति: विनाश से बचने के विकल्प हैं गांधी

भारत का दुर्भाग्य यह रहा कि सामाजिक सद्भाव और पंथिक समरसता का जो मंत्र गांधी देश को सिखा गए थे, उसे स्वतंत्रता के...

संपादकीय: गांधी को समझने का समय

विश्व में सारा द्वंद्व, भयानक प्रतिस्पर्धा, आयुधों पर बेतहाशा व्यय, हिंसा और तनाव तो अनियंत्रित संग्रह को लेकर ही है।

चर्चा: शिक्षा नीति का प्रारूप, मातृभाषा और शिक्षक

लंबी प्रतीक्षा के बाद नई शिक्षा नीति का प्रारूप शिक्षाविदों, अध्यापकों, बुद्धिजीवियों की समीक्षा के लिए सार्वजनिक कर दिया गया है। उसमें संविधान में...

शिक्षा: शिक्षा की आधार-त्रयी

प्रबोधन, नायकत्व तथा सामंजस्य वे तीन तत्त्व हैं, जो अध्यापक और विद्यार्थी दोनों को परिभाषित करते हैं, इसलिए यही शिक्षा नीति का मूल आधार...

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