अमित चमड़िया

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Liberary

किताबों का कोना

‘धारा को किताबों से कितना प्यार है? शायद थोड़ा ज्यादा ही’। यह पंक्ति टीवी पर दिखाए जाने वाले फेसबुक के एक विज्ञापन का हिस्सा...

आधुनिकता के समांतर

आधुनिकता पर होने वाली बातचीत में जातियों की अहमियत या इससे जुड़ी समस्या के कम होने का हवाला अक्सर दिया जाता है। बताया जाता...

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दुनिया मेरे आगे: प्रचार का मानस

आज सूचनाओं के तेजी से प्रसार के इस युग में किसी भी जरिए खूब प्रचारित कोई जानकारी हमारे विचारों को आकार देने में बड़ी...

दुनिया मेरे आगे: रटना बनाम जानना

हमारे यहां बच्चों के पाठ्यक्रम पर चिंतन बहुत कम होता है। इसीलिए कई दशकों से बच्चे एक तरह की ही अंग्रेजी और हिंदी कविता...

दुनिया मेरे आगेः बचपन का मजहब

आन्या दिल्ली के एक निजी प्ले स्कूल में नर्सरी कक्षा में पढ़ती है। प्ले स्कूल आधुनिक शिक्षा की उपज है। स्कूल प्रबंधन की तरफ...

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धारणा बनाम तर्क

जब भी देश में आतंकी घटना होती है तो हमारी सरकार जांच और कोई ठोस निष्कर्ष के सामने आए बिना पाकिस्तान का नाम लेकर...

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