अखिलेश आर्येंदु

अखिलेश आर्येंदु के सभी पोस्ट 8 Articles

राजनीति: कृषि नीतियां और विकास

केंद्र और राज्य सरकारें कृषि को घाटे वाला क्षेत्र कह कर उसे उबारने की बात तो करती हैं, लेकिन कृषि घाटे में क्यों बनी...

खत्म होती तालाब संस्कृति

भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा में जल का संरक्षण करना हर व्यक्ति का परम कर्तव्य है। जब तक यह परंपरा चलती रही, तब तक...

राजनीति: जल संकट और चुनौतियां

भारत में पानी की किल्लत पिछले दस-पंद्रह सालों में ज्यादा बढ़ी है। इसका कारण सरकार की गलत नीतियां हैं। इन नीतियों का ही परिणाम...

राजनीति: विकास बनाम पर्यावरण

सरकारों ने गांधी के ‘स्वदेशी’ मॉडल को जिस तरह दरकिनार कर दिया, उसका नतीजा सामने है। देश के ज्यादातर बड़े शहर कई बड़ी पर्यावरणीय...

जलवायु: मौसम का पक्ष-विपक्ष

धरती पर जीवन के लिए ये मौसम उतने ही जरूरी हैं जितना की हमें जिंदा रहने के लिए जल और भोजन। यों तो हमारी...

रविवारीः शाकाहार बनाम मांसाहार

जबसे नए शोधों ने यह साबित किया है कि शाकाहार इंसान के लिए मांसाहार की तुलना में कहीं ज्यादा मुफीद और निरापद है, तबसे...

अखिलेश आर्येंदु : वीरान होते गांव

गांवों से कुटीर उद्योग खत्म हो गए हैं। पेड़ लगातार काटे जा रहे हैं। कुएं सूख गए हैं और जो बचे हैं वे सूखने...

खानपान : जैविक विविधता और जहरीले रसायन

पर्यावरणविदों के अनुसार कीटनाशकों से शोधित और छिड़काव किए टमाटर, बैंगन और सेब के खाने से किडनी, छाती, स्नायुतंत्र, पाचन अंग और मस्तिष्क पर...

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