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किस्सों से जुड़ा मनोविज्ञान

मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि जब आप किस्सों में डूब जाते हैं तो आप असल में दूसरे की जिंदगी को जी रहे होते हैं। उसकी बेचैनी और खुशी महसूस करते हुए आप कई दूसरी दुनिया में तांक झांक करने की अपनी फितरत को राज़ी भी रख पाते हैं।

Childrenआपस में एक दूसरे को कहानी सुनाते बच्‍चे।

एक नाविक की तरह जब हम किस्सों में गोते लगाते हैं तो हम उस किस्सागो के साथ एक नई दुनिया में सैर कर रहे होते हैं जिसे अब तकनीक ने हमारे और करीब ला दिया है। जीवन की खोज और विज्ञान के किस्सों को कार्ल सेगन जैसा किस्सागो मिल जाए तो उसका चुंबकीय खिंचाव सबको खींच लेता है। पुरा-वैज्ञानिक जॉर्ज स्मिथ ने मेसोपोटेमिया सभ्यता के दो हजार साल पहले के पत्थरों, दीवारों और चट्टानों पर खुदी इबारतों को डीकोड करके ‘द इपिक आॅफ गिल्गमिश’ के पॉडकास्ट तैयार करके रहस्यों के रोमांच में तैरने वाली दुनिया को हम तक पहुंचा दिया।

स्मिथ की खुद की कहानी भी कम रोमांचकारी नहीं है। यदि हॉलीवुड फिल्म ‘द नाइट म्यूजियम’ को याद करें, जहां संग्रहालय में रखे गए सारे किरदार रात को जी उठते थे। सेनाएं, युद्ध, इश्क, साजिशें, बंदिशें और इंसानी फितरत के तमाम रंग नज़र आने लगते थे। स्मिथ भी एक संग्रहालय में काम करने के दौरान कई ख्वाब देखते हैं।

लेकिन उनका लेना देना आभासी दुनिया में नहीं असल दुनिया से है। वो खोजी गई इबारतों में, हर्फों में उस जीवन को पढ़ना चाहता है जिसे अब तक खंगाला नहीं गया। वो पत्थर पर लिखी ताबीरों से उलझता है और सालों की कड़ी मेहनत से उन्हें सुलझा भी लेता है। और जब अपनी इस कामयाबी को पत्थर के टेबलेट से पॉडकास्ट पर ले आता है तो दुनिया उसे कान लगाकर सुनना चाहती है।

स्मिथ की जुबानी ये जाना जा सकता है कि सभ्यताएं आती जाती रहीं लेकिन इंसान के तौर पर जिन कहानियोंं को हम सीने से लगाए हैं वो नहीं बदलीं। हर दौर की कहानी में एक हीरो सरीखा किरदार है, उसकी मुश्किलात हैं, रोमांस है, अनजाने वाकये हैं, अजीबो गरीब हालात हैं, धोखे हैं, दोस्तियां हैं और फिर यदि कहानी खुशनुमा है तो आखिर में जीत है, सुकून है, मन की मस्ती है। इसीलिए इन किस्सों की खनक सदियों से बरकरार है।

मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि जब आप किस्सों में डूब जाते हैं तो आप असल में दूसरे की जिंदगी को जी रहे होते हैं। उसकी बेचैनी और खुशी महसूस करते हुए आप कई दूसरी दुनिया में तांक झांक करने की अपनी फितरत को राज़ी भी रख पाते हैं।

यदि आपमें महसूस करने की काबिलियत भरपूर है तो आप दूसरों की दुनिया के तजुर्बे को अपना समझकर उनके साथ बह भी जाते हैं। जिसे हद में रखना भी बड़ी खूबी है नहीं तो ये अंदेशा हमेशा रहेगा कि कहीं हम अपनी हकीकत को नजरअंदाज कर आभासी दुनिया को असल न मान लें।

किस्सागोई पर शोध करने वाले मनोवैज्ञानिक डैन जॉनसन कहते हैं कि किस्सों की ताकत को हम कम नहीं आंक सकते, क्योंकि ये आपके अहसासात और खयाली दुनिया को आपके इतना करीब ले आते हैं कि हम किस्सों के हमसफर बनकर एक दूसरे से पेश आने के बेहतर तरीके सीखकर ही बाहर निकलते हैं।

सदाबहार
किस्सागोई

किस्सों की दुनिया में दादा-नानी से लेकर चांद-तारे तक सब कुछ हैं। यहां बच्चों को थपकी देने वाली लोरी है तो परियों और राजकुमारियों की सुंदर और निर्दोष दुनिया भी। लोक की अंजुरी में आकर किस्सों ने देवताओं के चरण छुए हैं तो धरती के शूरवीरों के शौर्य को दंतकथाओं के रोमांच से भर दिया है। मिट्टी में सनी दास्तानगोई ने बोलियों-भाषाओं को भी देश दुनिया की यात्रा कराई है। किताबों में भी यह बात दर्ज है और मौजूदा वक्तमें कई ढंग के सैकड़ों वेब ठिकानों ने भी इनके गुम होने से पहले इसकी भरपाई की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

दरअसल, किस्सों के कुछ पुराने नक्श भले कहीं ओझल हो गए हों पर किस्सों की दुनिया आज भी सदाबहार है। मसलन करोड़ों लोगों के पसंदीदा फिलीस्तीनी-इस्राइली अरब ट्रेवल ब्लॉगर नास न सिर्फ असल जिंदगी की खुशनुमा कहानियां लोगों तक पहुंचा रहे हैं बल्कि अरब मूल के होने के नाते अपने साथ हुई ज्यादतियों को भी वे बेहद सलीके से चुनौती देते हैं।

दुनिया भर में भेदभाव से पर्दा हटाने और साथ ही बेहतरीन मिसालों को दुनिया के सामने रखने का ये बेहद ताकतवर तरीका है आज युवाओं के पास। अच्छी बात यह भी कि नई उम्र इस पुराने हुनर में नया बहुत कुछ जोड़ती भी जा रही है।

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