सात महीने पहले मां बनी उर्विजा अपनी नन्ही सी बेटी के लिए बहुत सतर्क है। शिशु रोग विशेषज्ञ ने उर्विजा को सख्त हिदायत दी कि एक साल तक बच्ची को ऊपर से नमक या चीनी कुछ भी नहीं देना है। डाक्टर ने यहां तक कहा कि शहद भी नहीं देना है। उर्विजा डाक्टर की इस सलाह के लिए मानसिक रूप से तैयार थी। उसकी सहेलियां और रिश्तेदारी में इन दिनों मां बनी सभी महिलाओं को डाक्टर यही सलाह दे रहे थे। सभी नई माताएं इसके वैज्ञानिक कारणों को सुनने और समझने के बाद इसका सख्ती से पालन कर रही थीं और अपने बच्चों को नमक और चीनी नहीं दे रही थीं।
लेकिन इस सलाह से उर्विजा को वही परेशानी झेलनी पड़ी, जिसे सभी नई माताएं झेल रही थीं।

उर्विजा की सास ने डाक्टर की इस सलाह को बेकार बताया और उर्विजा पर गुस्सा होने लगीं। उन्होंने उर्विजा से कहा कि नमक और चीनी दिए बिना बच्चे का मानसिक विकास रुक जाएगा। सास की यह बात सुन कर उर्विजा एकबारगी तो डर गई और अपने फैसले पर सोचने भी लगी। लेकिन जब उसने आराम से बैठ कर सोचा तो शिशु रोग विशेषज्ञ व सास की सलाहों में से विशेषज्ञ की सलाह को चुना। उसने इंटरनेट पर जाकर इससे जुड़े लेख पढ़े और यही पाया कि बच्चों को एक साल तक नमक और चीनी से दूर रखना बेहतर है। उर्विजा ने इन लेखों को अपनी सास को भी दिखाया, लेकिन उसकी सास दुनिया भर के बड़े अस्पतालों के डाक्टरों के लिखे लेखों को मानने के लिए तैयार नहीं थी।

उर्विजा के लिए मुश्किल तब शुरू हुई जब मातृत्व अवकाश खत्म होने के बाद उसने दफ्तर जाना शुरू किया। उसकी अनुपस्थिति में बच्ची का ख्याल उसकी सास ही रखती थीं। सास बच्ची की अच्छे से देखभाल करती थीं, लेकिन वह बच्ची को शहद खिलाने लगीं। उर्विजा को जब इस बात का पता चला तो वह अपनी सास से बहुत नाराज हुई। उसकी सास भी नाराज हुईं कि शहद तो प्राकृतिक चीज है, उससे क्या नुकसान हो सकता है।

सास की एक इस जिद के कारण उर्विजा का उन पर से भरोसा उठ गया। उसे लगा कि वह अपनी अनुपस्थिति में अपनी बच्ची को उनके हवाले नहीं कर सकती है। उर्विजा का मायका भी उसी शहर में था। उर्विजा ने फैसला किया कि वह कुछ दिन अपनी मां के पास रहेगी और वहीं से दफ्तर जाएगी। उसकी सास इस फैसले से बहुत नाराज हुईं कि वह उनकी पोती को उनसे दूर कर रही है। लेकिन उर्विजा अपनी बेटी की सेहत से किसी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं थी और वह मायके चली ही गई।

बच्चों की परवरिश कैसे हो इस बात पर अक्सर नई और पुरानी पीढ़ी में तकरार होती है। यह हर नए जमाने का किस्सा है कि उसके पास एक पुरानी पीढ़ी भी होती है। आज के नए जमाने में भी वो पुरानी पीढ़ी है, जिसके बच्चों के लालन-पालन का तरीका अलग था। खास कर परवरिश में वैज्ञानिक तथ्यों को मानना मुश्किल होता है। आज भी नए समय में वही पुरानी मुश्किल है।

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गर्मी के मौसम में लोग बढ़ते तापमान से राहत पाने के लिए फैन, कूलर और एसी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसमें से ज्यादातर घरों में कूलर को एक किफायती और आसान विकल्प के रूप में चुना जाता है। यह सामान्य गर्मी में अच्छी ठंडक देता है और बिजली की भी खपत कम करता है। हालांकि, जब गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो कई बार कूलर भी सही तरीके से ठंडी हवा नहीं दे पाता। ऐसी स्थिति में कूलर की हवा ठंडी होने के बजाय गर्म या सामान्य लगने लगती है जिससे राहत नहीं मिल पाती और परेशानी बढ़ जाती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक