हमारा दिमाग जिसका अंदाजा नहीं लगा सकता, उसे ही अपराध कहते हैं। जहां पर हमारी सुरक्षात्मक सोच खत्म हो जाती है, दरअसल अपराध वहीं से शुरू होता है। त्विषा शर्मा की मां को भी आम लोगों की तरह अंदाजा नहीं था कि अपराध की गति कितनी तेज होती है। त्विषा शर्मा की मौत के बाद उनकी मां रेखा शर्मा ने अपनी बेटी के वाट्सएप संदेशों को दिखाया। यह सबूत था कि त्विषा शर्मा पर ससुराल में अत्याचार हो रहे थे।
अपराध की तरह सोशल मीडिया का व्यवहार भी अविश्वसनीय होता है। सोशल मीडिया पर एक बड़ा तबका त्विषा शर्मा की मां को कोसने लगा। बेटी के इस संदेश को देखते ही उसे क्यों नहीं ले आई? त्विषा की मौत के लिए उनकी मां को भी जिम्मेदार ठहराया गया। सोशल मीडिया की अदालत के परे आज त्विषा शर्मा का परिवार एक मिसाल बन चुका है।
आपराधिक मानसिकता और अपराधियों पर हम काबू नहीं पा सकते हैं। लेकिन हम अपराध के खिलाफ डट कर खड़े होना सीख जाएं तो आने वाला समय जरूर बदल सकता है। अपराधी को सजा मिलने को इंसाफ कहा जाता है। यह इंसाफ भी आगे के समय के लिए सामूहिक संबल पैदा करता है। आम लोगों को गलत के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत मिलती है।
त्विषा शर्मा की मौत के बाद इस मामले को शुरू से देख रही टीवी पत्रकार ने पिछले दिनों इस साहसी परिवार के सच को सामने रखा। जिस गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत का जुगाड़ कर लिया था, उनकी गिरफ्तारी यूं ही नहीं हुई। बकौल पत्रकार, एक पूरा परिवार एक अनजान शहर में व्यवस्था से भिड़ गया। परिवार ने इस बात की परवाह नहीं की कि लोग उनकी बेटी के निजी जीवन के बारे में क्या कह रहे हैं। उन्होंने व्यवस्था की हर खामी पर उंगली रखी और मीडिया के जरिए इन खामियों को आम से लेकर खास तक की आंखों में पहुंचाया।
त्विषा शर्मा क्या थी, कैसी थी, इसका आकलन न तो आम लोग कर सकते हैं और न करना चाहिए। त्विषा शर्मा के परिवार के जज्बे और उनकी इंसाफ मांगती रही भाषा इस बात का सबूत है कि उनके घर का व्याकरण प्यार, सद्भाव और बराबरी वाला होगा।
शादी हमेशा से एक अनिश्चित चीज रही है। चाहे वह प्रेम विवाह हो, परिवार के द्वारा तय किया गया हो, परेशानियां किसी में भी हो सकती हैं। किसी भी तरह से बने संबंध में एक बिंदु पर महसूस हो सकता है कि आप आपराधिक मानसिकता वाले व्यक्ति के साथ फंस गए हैं। इस पहचान के होते ही अपराध की गति और तेज हो जाती है। पर हम अपराधियों के चंगुल में फंसे व्यक्ति को ही दोषी बताने लगते हैं।
पुलिस, कानून, अदालत इसलिए हैं कि अपराध पर नियंत्रण पाया जा सके। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपराध के शिकार लोगों को व्यवस्था से भी लड़ना पड़ता है। उन्हें खुद साबित करना पड़ता है कि वे अपराध के शिकार हुए हैं। एक दुर्भाग्यपूर्ण लड़ाई में हौसला न हार कर त्विषा शर्मा के परिवार ने बड़ी उम्मीद जगाई है।
