हिमाचल प्रदेश के चंबा की अपनी अलग ही प्राकृतिक व सांस्कृतिक पहचान है। यहां की लोककथाओं में स्थानीय जीवन का संघर्ष और आपसी सौहार्द दिखता है। चंबा की वादियों में ऐसी ही लोककथा है रानी सूही की। कहते हैं कि बिन पानी सब सून। चाहे कितनी भी सुंदर जगह हो, अगर वहां पानी न हो तो इंसानी आबादी के लिए किसी काम की नहीं।

बहुत समय पहले की बात है। राजा साहिल वर्मन ने चंबा नगर की स्थापना की। राजा ने यह नगर अपनी पुत्री चंपावती की याद में बसाया। चंपावती रोज एक साधु के पास जाती थी। किसी अनुचित सोच के शक में एक दिन राजा ने राजकुमारी चंपावती का पीछा किया। लेकिन राजा के वहां पहुंचते ही चंपावती और साधु दोनों अदृश्य हो गए। तभी वहां पर आकाशवाणी हुई, ‘राजा, तुमने अपनी ही बेटी के चरित्र पर शक करने की भूल की।’ राजा को अपनी गलती का पछतावा हुआ। लेकिन अब उसकी बेटी हमेशा के लिए गायब हो चुकी थी। पश्चाताप में राजा ने उसी स्थान पर चंपावती मंदिर बनवाया। इसके बाद राजा ने वहां नया नगर बसाया।

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चंबा तो बस गया, लेकिन वहां पानी की बहुत किल्लत थी। राजा ने इस समस्या के निवारण के लिए ज्योतिषियों और संतों को आमंत्रित किया। ज्योतिषियों के मुताबिक राज परिवार की किसी महिला के बलिदान के बाद ही नगर पानी की समस्या से मुक्त हो पाएगा। इस उपाय को सुनने के बाद राजा काफी असमंजस में पड़ गए। भला इन सबमें रानी का क्या कसूर था। लेकिन वह पानी का इंतजाम कर नगर की कमी भी दूर करना चाहते थे। आखिर जनता को पानी के बिना कैसे रखा जा सकता था।

राजा का यह असमंजस रानी के कानों में भी पड़ा। लेकिन उपाय का पता लगते ही, रानी के दिमाग में कोई असमंजस नहीं रहा। रानी ने तय कर लिया कि प्रजा के कल्याण के लिए वे बलिदान देंगी। उन्होंने इस बात के लिए संकल्प भी ले लिया। जब राजा तक रानी के संकल्प की बात पहुंची तो उन्हें दुख के साथ गर्व की भी अनुभूति हुई। रानी ने राजा को पास बुलाकर कहा कि हम दोनों का पहला कर्तव्य जनता के दुख को दूर करना है।

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मैं बलिदान के लिए तैयार हूं। ज्योतिषियों ने रानी के बलिदान की तिथि तय की। तय तिथि को रानी को विधिवत तैयार किया गया। रानी को एक पहाड़ी स्थल पर ले जाया गया और वहां उनका बलिदान दिया गया। कहते हैं कि रानी के बलिदान के साथ ही चमत्कार हुआ। बलिदान स्थल से मीठे पानी की धारा बहने लगी। चंबा के लोगों ने खुद तक पहुंचे पानी को रानी का आशीर्वाद माना।

आज भी चंबा में रानी सूही की कथा कही जाती है। उन्हें सूही माता, रानी सुनयना या नैना देवी के नाम से भी जाना जाता है। रानी की याद में चंबा में हर साल सूही माता का मेला लगता है। इस मेले में रानी को देवी के रूप में पूजा जाता है और जुलूस निकाले जाते हैं। महिलाएं दयालु रानी की याद में लोकगीत गाती हैं।