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द लास्ट कोच: सफेद लिहाफ

दो दशकों की शादी के बाद तन और मन के रिश्ते में धीरे धीरे बर्फ जमने लगी थी। कामिनी मौन रहने लगी थी। क्या स्त्री मौन रह कर यह जताती है कि वह रुठ गई है? या मौन रह कर कोई व्यूहरचना कर रही होती है। किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले या किसी के प्रेम में डूब जाने पर भी स्त्री मौन हो जाती है। स्त्री की खामोशी के कई अर्थ हैं। या तो वह किसी से दूर जा रही होती है या फिर किसी के बेहद नजदीक जा रही होती है। कामिनी के साथ कुछ कुछ ऐसा ही था। दरअसल, स्त्री अपनी खामोशी में प्रेम का संसार रच रही होती है या फिर विरह के बियावान में भटक रही होती है। कोरोना काल में एक युगल के गुम हो गए प्यार को द लास्ट कोच शृंखला में बयां कर रहे हैं लेखक संजय स्वतंत्र।

jansatta last coach, Safed Lihaaf in hindi, journalist Sanjay Swatantraतस्वीर: इस रचना के लिए प्रतीकात्मक और गूगल से साभार

किसी से विवाह किए बिना प्रेम करना अगर पाप है, तो विवाह हो जाने के बाद एक दूसरे से प्रेम न करना कितना बड़ा पाप है? सहसा उसने  पूछा तो गुलाब उसके तर्क को सुन कर एकबारगी मुरझा गया। कुमुदिनी ने उसके सिर को अपनी गोद में रखते हुए कहा, आप नाम से ही नहीं दिल से भी गुलाब हैं। उदास क्यों हो गए? गुलाब ने कहा, बस यूं ही लिली। कामिनी मुझसे पाप कर रही है तो मैं तुमसे पाप कर रहा हूं। एक अविवाहित लड़की से प्रेम करने का क्या मतलब है? लिली, तुम्हें तो सब पता है। कुमुदिनी ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, अपराध बोध की यह भावना क्यों आई आपके मन में। प्रेम करना पाप कैसे हो सकता है। मैं तो ऐसा नहीं सोचती। आपने तो इतनी मुलाकातों के बाद हाथ तक नहीं छुआ मेरा। आपकी निगाहें मेरी आंखों से उतर कर अकसर होठों में कैद हो जाती है। न आप कुछ कहते हैं न मैं कुछ कह पाती हूं। बस इतना जानती हूं कि इस समाज में मर्दो की नजर हमेशा औरत की छाती में ही धंसी रहती है। चाहे वो प्रेम में हों या ना हों।

कोरोना काल में घर में कैद हो गए गुलाब को आज कुमदिनी की बहुत याद आ रही है। विवाहित होते हुए भी वह डेटिंग ऐप पर लिली से मिला था। लिली यानी कुमुदिनी। गुलाब ने दोस्ती के बाद कुमुदिनी को हमेशा उसके नाम को जब भी अंग्रेजी में पुकारा तो उसके चेहरे पर लिली जैसी ही मुस्कान खिल जाती। उधर, शादी के 22 साल बाद कामिनी अपनी छोटी सी गृहस्थी से उकता गई थी। दो संतानें हुर्इं। एक बेटा और एक बेटी। किशोर वय की वेटी की अपनी दुनिया। पढ़ाई लिखाई में रम गई थी वह। बेटा स्कूल से निकल कर कॉलेज जा पहुंचा था। और गुलाब अपने काम में व्यस्त। कामिनी खाना बनाने-कपड़े धोने और घर की देखभाल के बाद थक कर चूर हो जाती। मगर गुलाब एक बार भी नहीं पूछता कि तुमने खा लिया? क्या चल रहा है घर में। कुछ जरूरत तो नहीं।

दो दशकों की शादी के बाद तन और मन के रिश्ते में धीरे धीरे बर्फ जमने लगी थी। कामिनी मौन रहने लगी थी। क्या स्त्री मौन रह कर यह जताती है कि वह रुठ गई है? या मौन रह कर कोई व्यूहरचना कर रही होती है। किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले या किसी के प्रेम में डूब जाने पर भी स्त्री मौन प्रवास में चली जाती है। स्त्री की खामोशी के कई अर्थ हैं। या तो वह किसी से दूर जा रही होती है या फिर किसी के बेहद नजदीक जा रही होती है। कामिनी के साथ कुछ कुछ ऐसा ही था। दरअसल, स्त्री अपनी खामोशी में प्रेम का संसार रच रही होती है या फिर विरह के बियावान में भटक रही होती है।

कामिनी के साथ ऐसा क्या था? इन दिनों वह क्यों खामोश रहने लगी थी? गुलाब ने कभी जानने की कोशिश नहीं की। कहां तो दोनों घंटों अंतरंग पल बिताते थे। मगर पिछले एक साल से एक दूसरे को छुआ तक नहीं। गुलाब भूूल गया था कि उसे कामिनी की जरूरत है। और कामिनी भी भूल गई थी कि गुलाब प्यासा होगा उसकी देह के लिए। कोरोना फैलने पर लॉकडाउन जरूर लगा मगर दोनों के जीवन में एक अजीब सी पूर्णबंदी छा गई थी। सड़क पर सन्नाटा था तो उनके भीतर वह सन्नाटा उतर आया था, जिसे वे अपने तरीके लड़ रहे थे।

… बिस्तर के एक छोर पर गुलाब तो दूसरे छोर पर कामिनी। बच्चे अपने अपने कमरों में। मगर गुलाब ने कभी उसकी ओर हाथ नहीं बढ़ाया। गलती से स्पर्श हो भी जाता तो वह अपनी देह को समेट लेती जैसे कोई वह गठरी हो और उस पर किसी का अधिकार न हो। यह स्त्री का मन है कि वह अपनी देह उसे ही सौंपती है जो उसे मान दे। उसका दुख बांटे। उसकी भावनाओं को समझे। अगर पति ऐसा करने में नाकाम है तो वह भी उसकी देह से अधिकार खो देता है। तो एक साल में यह अधिकार खो चुका था गुलाब। कोरोना काल में तो वज्रपात ही गया। एक दिन यौन इच्छा हुई तो कामिनी ने धक्का देकर उसे बिस्तर से गिरा दिया। तब से दोनों अलग-अलग कोने में अपनी चादरों में खुद को समेटे पड़े रहते। अंधेरे कमरे में दोनों का मोबाइल आॅन रहता। कामिनी पुराने गीत सुनती रहती तो गुलाब कुमुदिनी के साथ रात-रात भर चैटिंग करता। कभी-कभी उनकी चैटिंग सेक्स चैटिंग में बदल जाती। पॉर्न फिल्मों का आदान-प्रदान भी होता।

फिर अगली सुबह रोज कामिनी कपड़े धोते समय बुदबुदाती- झक्की कहीं का। सस्साला.. हॉट बीवी को छोड़ रात भर पॉर्न देखता है। जाने किससे चौटिंग करता है और फिर चादर गीली कर देता है। नमूना कहीं का। शायद ही ऐसा कोई इनसान होगा। कपड़े धोते हुए वह बुदबुदाती जाती। उसे अपने कालेज के दिनों के   उस दोस्त की याद आने लगी जो कभी उस पर फिदा था। आज वह डॉक्टर है। कामिनी आज शिद्दत से याद कर रही है 24 साल पुराने उस दोस्त को। जल्दी-जल्दी काम खत्म कर उसने गूगल किया। उस दोस्त नाम के कई शख्स सामने आ गए। दो तीन घंटे की मशकक्त के बाद आखिर उसने उसे ढूंढ ही लिया।

कोई भी स्त्री किसी पुरुष की दूसरी स्त्री नहीं बनना चाहती। मगर यह सच है कि भारतीय पुरुषों के जीवन में सेकेंड वूमन की इंट्री हो रही है। ठीक इसके बरक्स स्त्रियों के जीवन में भी सेकेंड मैन यानी परपुरुष दाखिल हो रहे हैं। इसके लिए न केवल स्त्री और पुरुष बल्कि उनकी खुद की जीवन शैली जिम्मेदार है। और इससे ज्यादा जिम्मेदार है उनके जीवन में आई बेइंतिहा बोरियत तथा एक दूसरे के प्रति अरुचि।

…तो सचमुच एक दूसरे से बोर हो चुके थे गुलाब और कामिनी। एक दूसरे के स्पर्श की वो गर्माहट भी गुम हो चुकी थी जिसे वो सालों पहले महसूस कर रोमांचित हो उठते थे। एक दूसरे को बेतहाशा चूम लेते थे। अब सेकेंड वूमन बन कर कामिनी कोई नया रोमांच ढूंढ रही थी। उधर, सेकेंड वूमन बनी कुमुदिनी गुलाब के जीवन में नया रंग और नया रोमांच भर रही थी। बच्चों के घर लौटने तक डॉ अनिल से कामिनी की खूूब बातें हुई। पता चला कि अनिल की पत्नी का पिछले साल कैंसर से देहांत हो गया है। एक बेटा है, जो विदेश चला गया है पढ़ने। अब वह बिल्कुल अकेला है। कामिनी ने कहा, मैं भी अकेली हूं अनिल। बच्चे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं और पति को मेरे लिए फुर्सत नहीं। कभी आओ न दिल्ली। अनिल ने कहा, जरूर आऊंगा। वैसे मैं कांफ्रेंस में हिस्सा लेने आता रहता हूं।

आज कामिनी बहुत खुश थी। बहुत दिनों बाद नहा कर उसने परफ्यूम लगाया। दोपहर में वह ब्यूटी पार्लर चली गई जहां उसने बालों की ऐसी कटिंग कराई कि वह खुद को देख कर इतरा उठी। चालीस साल की उम्र घट कर तीस रह गई थी। कौन पहचानेगा उसे घर में। बेटी ने कहा, मम्मा आप तो मेरी सहेली लग रही हो। बेटा आंखें फाड़ कर देखता रह गया। टीवी पर खबरें देख रहे गुलाब ने कहा, वाऊ… लुकिंग सो ब्यूटीफुल। कामिनी ने गुलाब से तारीफ सुन कर भी अनसुनी कर दी। उसकी आंखों के आगे पर्दा पड़ चुका था, जहां सिर्फ डॉ. अनिल का कॉलेज के दिनों वाला चेहरा उमड़ रहा था। कुछ देर बाद गुलाब की आंखों में भी लिली का गुलाबी चेहरा तैर गया।

आज वो फिर बिस्तर पर थे। मगर कामिनी की तरफ गुलाब का हाथ नहीं बढ़ा। और ऐसा होता भी तो कामिनी क्या उसे छूने भी देती? पति पत्नी होकर भी वे अजनबी हो गए थे। इश्क की चाह ने इस कदर रुलाया कि सात जन्मों का साथी बनाने वाले पंडित जी भी उन्हें फिर से न जोड़ पाएं। आज जन्मों के साथी सफेद लिहाफ में लिपटे अपने-अपने साथी तलाश रहे हैं। दोनों आत्ममैथुन में लिप्त। … वोलो न मुझे कब अपनी बांहों में भरोगे गुलाब? कुमुदिनी ने सवाल किया वाट्सऐप पर। तो उधर कामिनी ने मैसेज भेजा- मुझे बांहों में भर लो अनिल। मैं बहुत अकेली हो गई हूं। इसके बाद बिस्तर पर पड़े दो अजनबी अपने अपने मन मीत को दिलासा देते रहे।

गुलाब ने आज फिर सफेद लिहाफ खराब कर दिया था। देखते ही कामिनी बिफरी, साला दूसरों के लिए लार टपकाता फिरता है। गुलाब ने  रतजगे से सूजी कामिनी की आंखें देख कर मन ही मन गालिया दीं, कमीनी रात-रात भर चैटिंग करती है और खुद मुझसे सवाल करती है। गंदे लिहाफ को वाशिंग मशीन में डाल कर कामिनी चाय का कप गुलाब के आगे पटक कर नहाने चली गई और बच्चे अपने अपने दोस्तों से मिलने। गुलाब ने टीवी आॅन किया तो खबरें आ रही थी, पूर्णबंदी में छूट के चौथे चरण में मे दिल्ली मेट्रो चलेगी। उसका पूरा टाइमटेबल बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि एक हफ्ते बाद सुबह से रात तक चलेगी। गुलाब के मन में खयाली पुलाव पकने लगा। अब वह दुकान 11 बजे के बजाय साढ़े बारह बजे से रात नौ बजे तक खोलेगा। सुबह थोड़ पहले निकल लेगा और कुमुदिनी के साथ मंडी हाउस में चाय पी लेगा। वहीं किसी कोने में बैठ कर बतिया लेगा।

… तभी कामिनी ड्राइंग रूम में चली गई। शेम्पू में धुले उसके बाल चमक रहे थे। वह आज बहुत खबसूरत लग रही थी। मगर उसने गुलाब की ओर देखा तक नहीं। अगर कुमुदिनी के प्रेम में गुलाब कुछ ज्यादा ही नमकीन लगने लगा था तो कामिनी भी कम हसीन नहीं लग रही थी आज। उसने खबर सुन ली थी। उसने किचन में जाकर मैसेज किया- सुनो अनिल अब मेट्रो चलने वाली है। तुम आओ न दिल्ली। मैं अब घर से निकल सकती हूं। उधर गुलाब ने मैसेज किया- कुमुदिनी अगले सोमवार को मिलो। उस दिन दुकान बंद रहेगी। देखो मेट्रो भी चल पड़ी है।  दिन भर साथ बैठेगे।

दिन सोमवार। गुलाब बहाना कर घर से निकल गया। उधर कामिनी बच्चों को घर में रहने की हिदायत देकर और किसी सहेली से राजीव चौक मिलने का बहाना कर घर से निकल गई। सात जन्मों के हमराही आज अलग-अलग राह पर थे। गुलाब ने पार्किंग में अपनी कार लगाई और वह छह महीने बाद फिर से मेट्रो स्टेशन के प्लेटफार्म पर था। उधर आॅटो से उतर कर कामिनी प्लेटफार्म की सीढ़ियों की ओर बढ़ी। उसने पेटीएम से अपना पुराना स्मार्ट कार्ड रिचार्ज करवा लिया था। मेट्रो के आने में अभी दो मिनट बचे हैं। उधर, कामिनी सीढ़ियां चढ़ते हुए चली आ रही थी। प्रेम में मनुष्य कितना अंधा हो   जाता है। ठीक उसके आगे खड़े इंसान को उसने नहीं देखा जो उसके हाथ से धुली और प्रेस की हुई कमीज पहने और कोई नहीं उसका पति खड़ा है।

मेट्रो आने की उद्घोषणा हो रही है। संयोग देखिए कि पति पत्नी दोनों एक ही कोच में सवार हैं मगर उनकी राहें जुदा हैं। मास्क लगाए कामिनी को भी कहां पहचान पाया गुलाब। जब दूसरी औरत रतौंधी बन गई हो वहां कामिनी के लिए जगह ही कहां बची थी। यही हाल कामिनी का था। उसकी आंखों में डॉ अनिल का मासूम चेहरा इस कदर छाया था कि वह सामने बैठे पति को भी नहीं पहचान पा रही थी।

मगर कुछ देर बाद गुलाब ने नए स्टाइल के बालों और कपड़ों से कामिनी को पहचान लिया। वह उसे देख कर पहचान न ले, यह सोच कर वह लास्ट कोच में चला गया। वहां कोने की सीट पर बैठ कर उसने कामिनी को मैसेज किया- कहां हो तुम। उसने जवाब दिया, घर पर तुम्हारे सफेद लिहाफ धो रही हूं। ये रोज रात में क्या करते रहते हो तुम। … अच्छा तुम कहां हो? उसने पूछा तो गुलाब ने कहा, दुकान की सफाई कर रहा हूं। फिर तुम्हारे नौकर क्या करते हैं? इस पर मन ही मन गुलाब ने कहा, तू रहने दे पगली। पका मत। तू अभी कहां है मुझे मालूम है।

इस बीच यात्रियों की कुछ संख्या बढ़ने पर कामिनी भी लास्ट कोच में चली गई और गुलाब के सामने वाली सीट पर बैठ गई। …उद्घोषणा हो रही है अगला स्टेशन चांदनी चौक है। दरवाजे दायीं ओर खुलेंगे। मगर गुलाब अनमना बैठा रहा। … इस बीच कामिनी ने उसे पहचान लिया। एक सीट छोड़ कर उसके बगल में वह बैठ गई। उसने धीरे से कहा, तुम तो दुकान की सफाई कर रहे थे। यहां क्या कर रहे हो। चांदनी चौक गए क्यों नहीं। कामिनी को सामने देख कर गुलाब हड़बड़ा कर बोला, यूं ही जरा कॉफी पीने का मन हो रहा है। राजीव चौक जा रहा हूं। और तुम कहां जा रही हो बन संवर कर, गुलाब ने उस पर व्यंग्य किया। जा तो रही हूं सहेली से मिलने। मगर सोच रही हूं कि मैं भी कॉफी पी लूं तुम्हारे साथ। कामिनी ने जवाब दिया। अब सकपाने की बारी गुलाब की थी। कब मंडी हाउस स्टेशन आया और कब निकल गया, पता ही नहीं चला। काश उतर ही जाता।

उद्घोषणा हो रही है, अगला स्टेशन राजीव चौक है। दरवाजे दायीं ओर खुलेंगे। गुलाब बैठा रहा। उसे कहां जाना था, यह भी भूल गया। दरअसल, आज दोनों की झूठ पकड़ी गई। कामिनी ने लपक कर उसका हाथ खींचा। उठो भी। स्टेशन आ गया। महीनों बाद कामिनी की कोमल गुलाबी हथेलियों का स्पर्श पाकर गुलाब की नसें झंकृत हो उठीं। उधर कामिनी का भी यही हाल था। दोनों ने कस कर एक एक दूसरे की हथेलियां थाम लीं। ऊपर की मंजिल पर कैफे में दोनों आमने सामने बैठे। कामिनी की गुलाबी अधरों ने जैसे उसे आमंत्रण दिया। क्या देख रहे हो तुम, कई बार चूम चुके हो इन्हें। … हां मगर अब ये पराई हो चुकी हैं मेरे लिए। गुलाब ने निराश होकर कर कहा। नहीं ऐसा नहीं। तुम अब भी मेरे पति हो। मगर मित्र बन कर गले लगाया है कभी। दोस्त भी बनते तो मुझे पराई नहीं कहते। इसलिए कहती हूं पति नहीं, पहले दोस्त बनो।

दोनों कॉफी पीते हुए मन की गिरह खोलते रहे। अब उनके बीच कोई नहीं था। न गुलाब के जेहन में सेकेंड वूमन कुमुदिनी थी और न कामिनी के मन में सेकेंड वूमन बनने की चाह थी। … दोनों काफी देर तक बात करते रहे। राजीव चौक के बाहर निकल कर जनपथ पर उन्होंने खरीदारी की। आज लग रहा था कि शादी के कुछ दिनों बाद वाले दिन फिर से लौट आए हैं। वे वापस मेट्रो स्टेशन लौटे तो शाम हो रही थी। शाम का भूूला राही घर लौट रहा था।

लास्ट कोच में सवार हुए तो उसमें आज गिनती के यात्री थे। सभी ने मास्क लगा रहे। कामिनी और गुलाब भी एक सीट छोड़ कर बैठ गए। मेट्रो ने जैसे ही रफ्तार पकड़ी कोच की लाइट चली गई। घुप अंधेरा छा गया। सहसा गुलाब ने लपक कर कामिनी को चूम लिया। इस पर उसने कहा, ये क्या कर रहे हो सरेशाम। मौका देख कर चौका मार दिया। …गुलाब ने कहा, कुछ नहीं अब दोस्त हो मेरी। प्रेम कर रहा हूं। …अच्छा तो माई डियर फ्रेंड, आज रात अपनी सफेद लिहाफ अकेले में खराब मत करना…। कामिनी ने शर्माते हुए कहा, हां नहीं तो बहुत पीटूंगी।
तभी मोबाइल स्क्रीन चमक उठी है- डॉ. अनिल कॉलिंग। यह देखते ही कामिनी ने मोबाइल का स्विच आॅफ कर दिया है। उसे अब सेकेंड वूमन नहीं बनाना। उसने गुलाब का हाथ कस कर थाम लिया है। उसने अपने बैग से चाकलेट निकाल कर गुलाब के मुंह में डाल दिया है। उसके दिल में कामिनी का प्यार फिर से घुलने लगा है।

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