अगर झूठ हमारे चेहरे पर दिखाई देने लगे तो क्या हम उतने ही बेफिक्र होकर झूठ बोल पाएंगे? साहित्य की दुनिया का एक बाल किरदार ऐसा है जो विश्व साहित्य का प्रसिद्ध प्रतीक बन चुका है। पिनोकियो जैसे ही झूठ बोलता है उसकी नाक लंबी हो जाती है। पिनोकियो को समझने से पहले उसके पिता जेपेट्टो को समझना होगा। जेपेट्टो ने उसे लकड़ी से बनाया है, लेकिन वह पिनोकियो को कठपुतली नहीं बल्कि अपनी संतान मानता है।
कार्डो कोलोडी का ‘द एडवेंचर्स आफ पिनोकियो’ मूल उपन्यास के रूप में साल 1881 से धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ और साल 1883 में पुस्तक के रूप में आया। कोलोडी ने पिनोकियो को एक शरारती बच्चे के किरदार के रूप में गढ़ा है। बच्चे मूलत: अवज्ञाकारी ही होते हैं। उन्हें जो चीज छूने से मना किया जाए उसे छुएंगे, जिधर जाने से मना किया जाएगा उधर भागेंगे।
बच्चों का अनुभव जितना कम होता है, उनमें खौफ भी उतना कम होता है। किसी भी मनुष्य का बचपन उसका सबसे बेचैन, उत्सुक और अपरिपक्व हिस्सा होता है। वह अपनी इच्छा के सामने किसी नियम या बंधन को नहीं स्वीकार करता है। जपेट्टो जैसे-जैसे पिनोकियो के शरीर का अंग बनाना शुरू करता है, उसमें वैसे-वैसे विद्रोह होना शुरू हो जाता है। मुंह बनते ही बोलता है, पैर बनते ही भागता है।
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वह अपने पिता की बात नहीं मानता है। स्कूल जाने के बजाय किसी रोमांचक काम में जुट जाता है। पिनोकियो में वह सब कुछ है जो एक आदर्श बच्चे में नहीं होना चाहिए। वह झूठ बोलता है, लालची है, आसानी से दूसरों की बातों में आ जाता है। अपनी गलतियों को जानबूझ कर दोहराता है।
कोलोडी ने पिनोकियो को एक जटिल दुनिया में रखा है। कठपुतलियों के रंगमंच के बीच ठग के रूप में लोमड़ी और बिल्ली है। बोलने वाला झिंगुर, नीली परी, जेल और अदालत के बीच ‘डाग फिश’ है।
पिनोकियो मेहनत, पढ़ाई और जिम्मेदारियों से दूर भागते हुए सिर्फ मस्ती करते हुए जीना चाहता है। वह चाहता है कि दुनिया उसकी इच्छा के अनुसार चले। वह स्कूल नहीं जाना चाहता है। उसे कोई किसी चीज का लालच देता है तो वह उसके पीछे चल देता है। इन सभी मनमानियों के बीच उसके ऊपर एकमात्र अंकुश उसकी नाक ही है। झूठ बोलते ही उसकी नाक लंबी हो जाती है।
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अपनी इसी नाक की वजह से वह झूठ बोलना छोड़ता है। जब उसे पता चलता है कि पिता जेपेट्टो ने उसकी किताबें खरीदने के लिए अपना कोट बेच दिया था तो वह भावुक हो जाता है। इसके बाद वह अपने साथ पिता की इच्छाओं का भी ध्यान रखने लगता है। पिनोकियो खुद को एक जिद्दी और जुनूनी कठपुतली मानता है। वह संदेश देता है कि गलती करना चरित्र की कमजोरी है, लेकिन अपनी गलती को पहचान लेना चरित्र की ताकत है। पिनोकियो आज उन सभी बच्चों की ताकत है जो खुद के अनुभव से सीखते हैं। गलतियां जीवन की प्रयोगशाला का अहम हिस्सा हैं।
