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कला और साहित्य

भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मायने

पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम ने स्वयं के अपने अनुभवों के आधार पर एक बार कहा था कि "मैं अच्छा वैज्ञानिक इसलिए बना, क्योंकि...

विमर्श: हिंदी आलोचना और गांधी

हिंदी आलोचना में गांधी प्रभाव से किनाराकशी की शुरुआत आचार्य रामचंद्र शुक्ल से ही हो गई थी, जिन्हें हिंदी आलोचना का सुदृढ़ स्थापत्य खड़ा...

कविताः मैं दासी नहीं, स्वामिनी हूं तुम्हारे पुरुषत्व की

Hindi kavita: सांत्वना श्रीकांत की दो कविताएं: 'पुरुष' और 'सपने में आते हैं पिता'

कला और साहित्य: आंदोलन विहीन समय में

साहित्य के इतिहास में यह शायद पहली बार है कि इतनी अधिक संख्या में रचनाकार एक साथ सक्रिय हैं और उन्हें किसी एक व्यापक...

साहित्य और आंदोलनधर्मिता – बैठे ठाले का शगल

मौजूदा दौर में हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में आंदोलनों की अनुपस्थिति का एक बड़ा कारण हिंदी समाज की जड़ों से इसका उस तरह जुड़ाव...

चल खुसरो घर आपने…

कहते हैं, प्रतिभा कुछ तो अर्जित की जाती है और कुछ कुदरती होती है। तेरहवीं सदी के मशहूर शायर, दार्शनिक, सूफी संत, संगीतज्ञ अमीर...

Propose Day 2018: एक कहानी आदिम प्यार की

Propose Day 2018: वैलेंटाइन वीक पर मगन होने वाली नई पीढ़ी के लिए स्त्री-पुरुष के बीच प्रणय की एक कहानी। यह कहानी उन युवाओं...

करणी सेना ने दी थी भंसाली जैसा हाल करने की धमकी, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नहीं आएंगे प्रसून जोशी

करणी सेना की धमकी के बाद सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत न करने का फैसला किया है।...

कविताः तो लौट जाऊंगा सिद्धार्थ बनकर अपनी यशोधरा के पास, हमेशा के लिए

पढ़िए संजय स्वतंत्र की कविता - 'अगर पढ़ सको मेरी अर्जियां'

दो कविताएंः ‘उठो द्रौपदियों!’ और ‘ट्रैफिक सिग्नल पर वो लड़की’

समाज के स्याह पक्ष के दुष्प्रभावों से उपजने वाली पीड़ा को शब्दों से अभिव्यक्ति देना कवि-कर्म का सबसे जरूरी उत्तरदायित्व होता है।

कविताः ‘मैं उजाला बन कर बिखरता रहूंगा, शुभकामनाओं के साथ बार-बार’

तुम्हारी पलकों के नीचे/ जहां रोज बैठ कर/ संवाद करता हूं/ वहां भर उठी है/ एक खारी नदी

कविताः स्मृतियों की जल समाधि पर सिंडेरिया का पूछना – ‘लिखो न एक कविता मेरे लिए’

तुमने कहा था/ मुझे लिखनी चाहिए कविता/ लिखता था कभी/ अब साथ नहीं देती कलम।

विदेशी कलाकारों में दिखी रामायण की अनुगूंज

रामायण महोत्सव की शुरुआत इंडोनेशिया के कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। इस दल में जकार्ता के विराग संधी समूह के पुरुष कलाकार शामिल थे।...

शख्सियतः मकबूल फिदा हुसेन

दुनिया के महान चित्रकारों में से एक थे मकबूल फिदा हुसेन।