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कला और साहित्य

कहानीः अंतिम झूठ

मुरलीधर वैष्णव की कहानी

कविताएंः ‘बच गया’ और ‘ये तीसरे लोग’

दिविक रमेश की कविता

चर्चाः मिथक की चुनौतियां और हिंदी कविता

तमाम विधि निषेधों के बावजूद मिथक हर समर्थ हिंदी कवि को आकर्षित करते रहे हैं और उनकी चुनौतियों से निपटे बिना छुटकारा नहीं मिलता।...

चर्चाः कविता और मिथक – कविता में पुराकथा और जनमानस

आज अगर सूर और तुलसी जैसे कवि जन-जन के अपने कवि बने हुए हैं, तो कारण यही है कि पुराण चरित्रों को दार्शनिक आभा...

मलयाली लेखक बेन्यामिन को मिला साहित्य का पहला जेसीबी पुरस्कार

पहला जेसीबी पुरस्कार मलयाली लेखक बेन्यामिन को उनकी किताब ‘जैस्मिन डेज’ के लिए मिला है जो पश्चिम एशिया में रहने वाले दक्षिण एशियाई लोगों...

प्रसंगः हिंदी गजल की चुनौतियां

हिंदी गजल ने अपनी पांच दशक लंबी यात्रा पूरी कर ली है। उपेक्षा और विरोध का भाव होने के बावजूद हिंदी गजल आज भी...

किताबें मिलींः ‘कश्मीरनामा’, ‘रचना की जमीन’ और ‘वैदिक सनातन हिंदुत्व’

कश्मीर के इतिहास, भूगोल और समकाल की कथा सुनना जरूरी है, ताकि हम कश्मीर को सिर्फ ‘समस्या’ नहीं बल्कि एक ऐसी जगह के रूप...

प्रसंगः लघु पत्रिकाओं के समक्ष चुनौती

लघु पत्रिकाएं जब तक अपने रूप परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगी तब तक वे इस युग में अस्तित्व की लड़ाई लड़ती रहेंगी।

कविताएं: किरकिरा रही है आत्मा धरती की

जितेंद्र श्रीवास्तव की कविताएं

किताबें मिलीं: ‘साहस और डर के बीच’, ‘समय के तलघर में शब्द’, ‘बांझ सपूती’ और ‘नागार्जुन दिल्ली में’

नरेंद्र मोहन की डायरी- साहस और डर के बीच- ऐसे ही अनुभव-क्षणों का कोलाज है- सच की टेक पर बिना डरे कला-संरचनाओं, साहित्य, समाज...

कला संस्कृति: चरखे के सम्मान में नृत्य समारोह

इस प्रस्तुति की पराकाष्ठा बंकिमचंद्र की अमर रचना ‘वंदे मातरम’ पर आधारित थी। इसमें सभी नृत्य शैलियों की नृत्यांगनाओं ने एक साथ भारत माता...

DSC Prize 2018: पुरस्कार के लिए 16 किताबों की सूची जारी, 4 अनुवाद और 2 डेब्यू उपन्यास भी शामिल

दक्षिण एशियाई साहित्य के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित डीएससी पुरस्कार के लिए इस साल 16 किताबों को लॉन्गलिस्ट कर लिया गया है।

विमर्शः साहित्य और वास्तुकला के अंतर्संबंध

साहित्य समय के अनुसार अपना स्वरूप बदलता है। इसलिए भिन्न कालखंडों में लिखे गए साहित्य का उसकी प्रकृति के अनुसार वर्गीकरण किया जाता है।...

कहानीः खूंटे से आजाद होती नाव

जीवन एक संघर्ष है, पापा इसे मान कर चलते थे। अपने लिए उन्होंने कुछ नहीं किया। वे चाहते तो कार से ऑफिस जा सकते...

कविताः मेरे राजहंस हो तुम

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की कविता।