बहुत समय पहले की बात है। एक सुनहरे बालों वाला लंबे कद का लड़का था, जिसकी उम्र चौदह बरस थी। अपनी उम्र के आम लड़कों की तरह उसे खाने और सोने में ही मजा आता था। जाहिर सी बात है कि उसे शरारत करना सबसे अच्छा लगता था। रविवार को जब उसके माता-पिता चर्च जाने की तैयारी कर रहे थे, तब वह अगले कुछ घंटों के लिए अकेले घर में मजे करने की तैयारी कर रहा था। उसने मन में सोचा कि अब मैं पापा की बंदूक उठा सकता हूं और बिना किसी की दखलंदाजी के एक गोली चला सकता हूं…।

नेल्स होल्गरसंस की कहानी की शुरुआत सेल्मा लेगरलोफ कुछ इसी तरह करती हैं। बच्चों के लिए लिखने वाले दुनिया भर के साहित्यकारों की विशेषता रही है कि उन्होंने बाल किरदारों को आसपास के पर्यावरण और भूगोल से जोड़ा है। साहित्य के कई मशहूर बाल किरदारों की दुनिया अपने आस-पास के जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों, बाग-बगीचों और नदियों व पहाड़ों से जुड़ी रहती है। ऐसे ही एक बाल किरदार को जन्म दिया स्वीडिश रचनाकार सेल्मा लेगरलोफ ने। सेल्मा लेगरलोफ को 1909 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था।

लेगरलोफ की रचना ‘द अडवेंचर्स आफ नेल्स’ एक ऐसी ही रचना है जिसका किरदार नेल्स प्रकृति से जुड़ जाता है। नेल्स किसान परिवार से आता है और दुनिया के प्रति बेफिक्री रखता है। इस तरह की कहानी स्कैंडनेविया के क्षेत्रों में बहुत प्रचलित है, जिसमें कोई बच्चा रूप बदल कर आस-पास के क्षेत्र में घूमने चला जाता है और उसके साथ रोमांचक चीजें होती हैं। लेगरलोफ ने अपनी सांस्कृतिक विरासत से हासिल इस कथा को खास शैली में मनोरंजक तरीके से उतारा है। नेल्स के माता-पिता एक गरीब किसान थे।

उनके पास जमीन का जो छोटा सा टुकड़ा था, उसे कायदे से खेत भी नहीं कहा जा सकता था। लेकिन उन दोनों ने जमीन के उस हिस्से पर खूब मेहनत की और उसे जीवन निर्वाहक बनाया। अब उनके पास कुछ पालतू जानवर और हंस भी थे। लेकिन वह दंपति अपने बेटे को लेकर बहुत दुखी रहता था जो आलसी था, और कुछ सीखने से परहेज करता था। वह जीव-जंतुओं के प्रति क्रूरता भी बरतता था।

जब नेल्स के माता-पिता चर्च गए थे और वह घर में अकेला था, तभी उसके घर में एक बौने ने प्रवेश किया। उसने नेल्स पर जादू कर उसे भी बौना बना दिया। बौना बनते ही नेल्स परेशान हो उठा और पशुशाला में पहुंचा। अब उसे पशु-पक्षियों की भाषा भी समझ में आने लगी। पशुशाला में बौने नेल्स के प्रवेश करते ही पशु-पक्षी उसकी क्रूरता के लिए धिक्कारने लगे। पशुओं ने एक आवाज में कहा कि दुष्ट नेल्स के साथ ऐसा ही होना चाहिए। अब नेल्स बदल चुका था। वह एक हंस के कंधे पर बैठ कर उड़ चला। नेल्स के कारनामों को पढ़ना बच्चों को मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी देता है।