मन्नू भंडारी हिंदी की प्रमुख कहानीकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखिका थीं। उनका जनम 3 अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा गांव में हुआ था और निधन 15 नवंबर 2021 को गुरुग्राम में हुआ था। उनकी रचनाएं खास तौर से मध्यवर्गीय परिवार, स्त्री जीवन, प्रेम, वैवाहिक संबंध, अकेलापन, सामाजिक दबाव और बदलती पीढ़ियों की समस्या पर केंद्रित रहीं।

यही सच है

मंन्नू भंडारी की प्रसिद्ध लघु कहानियों में से एक ‘यही सच है’ भी है, जिसका केंद्र प्रेम, आकर्षण, स्मृतियों और जीवन में लिए गए फैसलों के बीच द्वंद्व पर आधारित है। कहानी की मुख्य पात्र दीपा एक शिक्षित युवती है, जो अपने जीवन में दो पुरुषों- संजय और निशीथ के प्रति अलग-अलग तरह का आकर्षण महसूस करती है। उसके अतीत में निशीथ से जुड़ी प्रेम की स्मृतियां हैं, जबकि वर्तमान में वह संजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर आगे बढ़ रही है। इसी कहानी पर साल 1974 में बॉलीवुज फिल्म ‘रजनीगंधा’ बनी थी, जिसे बासु चटर्जी ने निर्देशित किया था।

त्रिशंकु

मंन्नू भंडारी की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘त्रिशंकु’ भी है, जो मध्यवर्गीय परिवार, बदलती सामाजिक सोच और पुरानी तथा नई पीढ़ी के बीच के वैचारिक संघर्ष को सामने लाती है। यह उस मध्यवर्गीय परिवार की कहानी है, जो आधुनिकता को अपनाना तो चाहती है, लेकिन उसकी स्वतंत्र और वास्तविक अभिव्यक्ति से असहज भी हो जाती है।

एक प्लेट सैलाब

मंन्नू भंडारी की कहानी ‘एक प्लेट सैलाब’ में आधुनिक शहर का ऐसा जीवन दिखाया गया है, जहां लोग बाहर से बहुत व्यस्त, आधुनिक और सामाजिक नजर आते हैं, लेकिन भीतर से अकेले और भावनात्मक रूप से खाली होते जा रहे हैं।

मैं हार गई

‘मैं हार हाई’ में स्त्री मन, आत्मसम्मान, प्रेम और रिश्तों में होने वाले भावनात्मक संघर्ष को दिखाया गया है। कहानी में एक स्त्री के भीतर चलने वाले द्वंद्व और अपनी भावनाओं के सामने स्वयं को असहाय महसूस करने की स्थिति दिखाई देती है। मनुष्य चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, भावनात्मक रिश्ते उसके भीतर गहरी हलचल पैद कर सकते हैं।

घुटन

मन्नू भंडारी की ‘घुटन’ मुख्य रूप से मोना और प्रतिमा के माध्यम से स्त्री के जीवन की ऐसी परिस्थितियों को दिखाया गया है, जिनमें वह अपने संबंधों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच दब जाती हैं। इसमें दोनों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों अपने-अपने रिश्तों में भावनात्मक और सामाजिक बंधन महसूस करती हैं।

(सुधी पाठक हर बुधवार को ‘पढ़ो कहानी’ श्रृंखला की कहानियां जनसत्ता ऑनलाइन पर पढ़ सकते हैं।)

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