‘सर्दी के लिए भूत-प्रेत की कहानी सबसे अच्छी होती है।’ यह संवाद है विलियम शेक्सपियर के बाल किरदार मैम्लियस का। मैम्लियस एक मासूम बच्चा है, जो थोड़ी देर के लिए भी मंच पर आता है तो सभी का दिल जीत लेता है। विलियम शेक्सपियर ने अपने अंतिम दौर में जो नाटक लिखे, उनमें ‘द विंटर्स टेल’ में एक ऐसी कहानी है, जिसका अंत दुखांत होता है।

शेक्सपियर अपने नाटकों में इंसान की कमजोरियों को उजागर करने में उस्ताद रहे हैं। इंसान के स्याह पक्ष को दिखाने वाले उनके कई किरदार कालजयी हुए। इनमें से एक सबसे बड़ा स्याह पक्ष है इंसानों में शक का भाव। मैम्लियस जैसे मासूम बच्चे का किरदार यही संदेश देता है कि माता-पिता के बीच शक या दुश्मनी के भावों का खमियाजा उनकी संतानों को भुगतना पड़ता है।

मैम्लियस सिसली के राजा लियोंट्स और रानी हर्माइनी का इकलौता बेटा है। बुद्धिमान और चंचल राजकुमार को सभी बहुत पसंद करते हैं। राजा-रानी अपने राजकुमार को जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं। लेकिन एक समय ऐसा आता है जब लियोंट्स अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करने लगता है। राजा मैम्लियस में अपनी छवि को देख कर आश्वस्त होना चाहता है कि वह उसका ही बेटा है। राजा-रानी के रिश्ते में मैम्लियस धूप-छांव सा काम करता है। तभी रानी गर्भवती होती है और लियोंट्स उस पर बेवफाई का आरोप लगा कर उसे कैद में डाल देता है।

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अपने पिता का यह रूप और मां से जुदाई के कारण मैम्लियस का नाजुक दिमाग सदमे में चला जाता है। जब अदालत में रानी पर बेवफाई का मुकदमा चल रहा होता है, तभी खबर आती है कि सदमे से हुई बीमारी के कारण मैम्लियस की मौत हो गई है। अपनी अदालत में चल रहे मुकदमे के बीच यह हस्र देख कर लियोंट्स को अहसास हो जाता है कि वह रानी पर अत्याचार कर रहा था। ईश्वर की अदालत में उसके अत्याचार की सजा के रूप में बेटे को मौत दी गई ताकि वह ताउम्र पश्चाताप में रहे।

कुछ आलोचक ‘द विंटर्स टेल’ के इस नन्हे किरदार को विलियम शेक्सपियर की निजी जिंदगी से जोड़ कर देखते हैं। आलोचक मैम्लियस में शेक्सपियर के अपने बेटे हैमनेट की छवि देखते हैं। शेक्सपियर के इकलौते बेटे हैमनेट की मौत 1596 में महज 11 साल की उम्र में हो गई थी। शेक्सपियर को अपने बेटे की मौत का गहरा संताप और पछतावा रहा था। हालांकि, ‘विंटर्स टेल’ की रचना शेक्सपियर ने 1610-11 में की थी। इतने अंतराल के बाद जब शेक्सपियर ने एक चुलबुले बाल किरदार को उतारा तो उसे एक दुखांत दिया।

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हैमनेट शेक्सपियर की जिंदगी में मात्र 11 साल रहा, लेकिन उन पर अपनी ऐसी छाप छोड़ गया, जिसकी छवि वे अपने नाटक में उतारने पर मजबूर हुए। पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह के टकराव, दुर्भावना का पहला शिकार उनकी संतति होती है। मैम्लियस का नन्हा किरदार दुनिया भर के दंपतियों को गहरा संदेश देता है।