मातृ दिवस आने वाला है। टीना और रीना काफी उत्साहित हैं। वे दोनों अपनी मम्मी को खुश करना चाहती हैं। योजना भी बना ली है। दोनों मिलकर स्पेशल वाल हैंगिंग बनाएंगी। इसमें बीच में मम्मी की बचपन वाली फोटो होगी। फ्राक वाली! नीचे उनके बचपन की शरारत वाली तस्वीर लगाएंगी। मम्मी को इसकी भनक भी नहीं लगने देंगी।

मातृ दिवस के पहले वाले दिन सुबह-सुबह दोनों पास की दुकान में खरीदारी के लिए चली गईं। पास में थे पाकेट मनी से बचाए पैसे और वाल हैंगिंग के लिए जरूरी सामान की सूची। उन्होंने दुकान वाले अंकल को सूची पकड़ा दी। पैसे देकर सामान ले आईं। अब बस उन्हें इंतजार था शाम का, जब मम्मी सब्जी खरीदने बाहर जाएंगी। फिर वे दोनों वाल हैंगिंग बनाने का काम शुरू कर देंगी। लंच के बाद रीना अपने कमरे में जाने लगी। तभी उसकी नजर मम्मी की प्लेट पर पड़ी। प्लेट देख वह चौंक गई। खाना ज्यों का त्यों प्लेट में पड़ा हुआ था।

‘मम्मी आपने खाना क्यों नहीं खाया?’ रीना ने पूछा।
‘रीना बेटा, खाने का मन नहीं कर रहा। थकान लग रही। थोड़ी देर आराम करके खा लूंगी।’ बोलते हुए मम्मी अपने कमरे में चली गईं।

थोड़ी देर बाद अचानक से मम्मी के पुकारने की आवाज रीना के कानों में पड़ी। रीना भागती हुई मम्मी के पास पहुंची, ‘क्या हुआ मम्मी?’ ‘जरा दवाई वाला डिब्बा अलमारी से निकाल कर इधर तो लाना। एक गिलास पानी भी।’ मम्मी की आवाज भारी थी।

‘क्या हुआ मम्मी। आपकी तबीयत तो ठीक है न।’ कहते हुए रीना ने मम्मी के माथे को छूकर देखा। ‘आपको तो तेज बुखार है।’ माथा छूते ही उसके मुंह से अनायास निकल पड़ा। इतनी देर में टीना भी वहां आ गई थी। दोनों भाग कर दवाई का डिब्बा और पानी लाईं। मम्मी ने बुखार की एक गोली निगल ली और फिर से लेट गईं।

टीना और रीना को मम्मी की चिंता हुई। उनके पापा दफ्तर की मीटिंग के लिए चंडीगढ़ गए हुए हैं। उनको लौटने में अभी दो-तीन दिन लगेंगे। दादी भी अपनी बहन से मिलने सहारनपुर गई हैं। अब क्या होगा। थोड़ी देर तक इंतजार करने के बाद टीना ने मम्मी का माथा छूकर देखा। माथा अब भी गरम था। वह मम्मी को ठंडे पानी की पट्टी करने लगी।

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कुछ देर बाद मम्मी का बुखार कुछ कम हुआ। मम्मी को अब भूख लगी। वह उठने लगीं तो टीना ने कहा, ‘आपको क्या चाहिए। मैं लेकर आती हूं।’ ‘मुझे भूख लग रही। चाय बनाने जा रही। चाय के साथ बिस्कुट खा लूंगी।’ कहकर मम्मी उठने लगी तो टीना ने उन्हें पकड़ लिया। ‘आप आराम करिए। चाय बना कर मैं लाती हूं।’ टीना ने कहा।

कुछ देर बाद दोनों बहनें ट्रे में चाय और बिस्कुट रखकर ले आईं। मम्मी ने चाय चख कर देखी। बहुत अच्छी चाय बनी थी। उन्हें आश्चर्य हुआ कि इन दोनों ने चाय बनाना कब सीखा। मम्मी ने चाय बिस्कुट खाया और फिर लेट गईं। शाम को उनका बुखार फिर से तेज हो गया। मम्मी को दोबारा बुखार आया तो रीना को पड़ोस वाले डाक्टर अंकल की याद आई। वे उसके घर से थोड़ी ही दूर रहते हैं। मगर अस्पताल से रात आठ बजे तक लौटते हैं।

रीना आठ बजने की प्रतीक्षा करने लगी। टीना मम्मी के माथे पर पट्टियां कर रही थी। आठ बजते ही रीना डाक्टर अंकल को बुलाने उनके घर चल पड़ी। संयोग से वे घर के बाहर ही मिल गए। रीना ने उन्हें सारी बात बताई। वो फौरन रीना की मम्मी को देखने आ गए। जांच कर दवाइयां लिखी। डाक्टर अंकल ने कहा, ‘अगर कल तक बुखार नहीं उतरा तो इनकी कुछ जांच करानी होंगी।’

मेडिकल स्टोर दूर था। जब रीना ने उन्हें बताया कि घर में कोई नहीं तो डाक्टर अंकल रीना को साथ ले गए। उन्होंने दवाइयां खरीदकर उसे घर के पास तक छोड़ दिया। रीना ने मम्मी को दवाइयां खिला दीं। टीना थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें पट्टी कर रही थी। मम्मी का बुखार कम तो होता था मगर पूरे तरीके से उतरता नहीं था। मम्मी ने कई बार दोनों को अपने कमरे में जाकर सोने के लिए कहा, लेकिन दोनों मम्मी के पास ही बैठी रहीं। तब मम्मी ने उन्हें अपने पास ही सुला लिया।

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सुबह रीना की नींद खुली तो उसने मम्मी का बुखार थर्मामीटर से मापा। अभी उनका माथा ठंडा था। रीना ने मम्मी के लिए चाय बनाई और ब्रेड सेंकने लगी। अब तक मम्मी की नींद भी खुल गई थी। ‘अरे तुम क्यों यह सब कर रही। मैं अब ठीक हूं।’ मम्मी ने उन्हें देखते ही टोका। ‘नहीं मम्मी आप अभी आराम करिए।’ रीना ने कहा। तब तक टीना भी उठ गई। उसने मम्मी को गले लगाते हुए कहा, ‘हैप्पी मदर्स डे मम्मी।’ रीना भी बोल पड़ी, ‘हैप्पी मदर्स डे मम्मी।’

‘हम आपके लिए तोहफा नहीं बना पाए।’ रीना बोली। ‘आपके बुखार ने हमें समय ही नहीं दिया।’ टीना ने कहा। ‘मेरे बच्चों, कल से तुम दोनों ने मेरी इतनी देखभाल की है। यही मातृ दिवस का असली उपहार है। ऐसा उपहार तो किसी-किसी को मिलता है’। कहते हुए मम्मी ने दोनों को गले से लगा लिया। दोनों बहनें थोड़ी दुखी हुईं, लेकिन मम्मी से मिली तारीफ के बाद उन्हें तोहफा नहीं देने का गम नहीं रहा। तभी उन्होंने सोचा, तोहफा क्या सिर्फ दिन देख कर दिया जाता। दोनों फिर इंतजार करने लगीं, मम्मी के बाजार जाने का।