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वरिष्ठ-युवा कलाकारों ने समां बांधा

युवा कलाकारों को जब भी अवसर मिलता है, वह अपना उत्कृष्ट प्रदर्शित करने के इच्छुक रहते हैं।

(Express File Pic)

युवा कलाकारों को जब भी अवसर मिलता है, वह अपना उत्कृष्ट प्रदर्शित करने के इच्छुक रहते हैं। पिछले दिनों आयोजित समारोहों में वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा कलाकारों को अपनी प्रस्तुति का अवसर मिला।  यह अवसर था, उमक की ओर से दो दिवसीय उमक उत्सव का। इस समारोह में वरिष्ठ कुचिपुडी नृत्य युगल राजा व राधा रेड्डी और कथक नृत्य युगल नलिनी व कमलिनी ने नृत्य पेश किया। कथक नृत्यांगना संगीता चटर्जी ने कथक और स्नेहा चक्रधर ने भरतनाट्यम नृत्य पेश किया। आजाद भवन में आयोजित समारोह में पंडित देबू चौधरी व प्रतीक चौधरी ने सितार वादन पेश किया। समारोह की दूसरी सभा में भरतनाट्यम नृत्यांगना गीता चंद्रन की शिष्या स्नेहा चक्रधर ने शिरकत की। उन्होंने अपने नृत्य का आरंभ पुष्पांजलि से किया। यह राग शंकरा और आदि ताल में निबद्ध था।

दूसरी पेशकश रुद्राष्टकम था। यह राग मालिका और खंड नाडै में निबद्ध था। उनकी अगली पेशकश मीरा भजन ‘मैंने चाकर राखोेजी’ पर आधारित थी। यह राग मांड पर आधारित था। पद्म के रूप में प्रस्तुत इस नृत्य में स्नेहा ने मीरा के भक्ति भाव को अभिनीत किया। उन्होंने निंदा स्तुति में डॉ अशोक चक्रधर की रचना ‘हे मम् पुत्री’ को नृत्य में पिरोया। यह राग हंसध्वनि और आदि ताल में निबद्ध था। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन तिल्लाना से किया।

एक अन्य कार्यक्रम इंद्रधनुष में ओडिशी नृत्यांगना अल्पना नायक की शिष्याओं ने ओडिशी नृत्य पेश किया। आरंभ गणेश वंदना से हुआ। यह रचना ‘एक दंताया वक्र तुंडाय’ पर आधारित थी। दूसरी प्रस्तुति शिव तांडव स्त्रोत थी। इस पेशकश में दो पल्लवी शामिल थे। पहली पल्लवी राग कल्याणी और दूसरी पल्लवी राग खमाज में निबद्ध थी। सालबेग की रचना ‘अहे नील शैल प्रबल मत्त’ पर आधारित अगली प्रस्तुति थी। इसमें भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्त के भावों को विवेचित किया गया। इसकी नृत्य परिकल्पना नृत्यांगना अल्पना नायक ने की थी, जबकि, संगीत को प्रशांत बेहरा और प्रफुल मंगराज ने तैयार किया था।

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