वान्या स्कूल बस से नीचे उतरी तो मम्मी नहीं दिखी उसे। आज उसकी बस जल्दी आ गई थी, इसलिए मम्मी बस स्टाप पर नहीं पहुंच पाई थी। वान्या का घर स्टाप से दस मिनट की दूरी पर था। ‘मम्मी जब तक आएंगी मैं घर पहुंच जाऊंगी।’ वान्या ने मन ही मन सोचा और घर की ओर चल दी। उसका बैग काफी भारी था, इसलिए धीरे-धीरे चल रही थी।
रास्ते में कूड़े के ढेर के पास बैठी एक छोटी बच्ची एक जूट के बैग में कुछ भर रही थी। उसने वान्या को देखकर कुछ कहा लेकिन वान्या उसकी बात नहीं समझ पाई। ‘मम्मी ने मना किया है कि रास्ते में किसी से भी बात नहीं करनी है और ऐसे गंदे लोगों से तो बिलकुल भी नहीं।’ वान्या ने थोड़ा मुंह बनाया और धीरे-धीरे चलती रही। तभी अचानक किसी ने उसका बैग छीन लिया। वान्या ने नजर उठाकर देखा तो एक बंदर उसका बैग छीनकर एक मकान की दीवार पर जाकर बैठ गया था।
वान्या ने रोना शुरू कर दिया। उसका रोना सुनकर वही लड़की तेजी से दौड़कर उसके पास आ गई। उसने कुछ पूछा लेकिन वान्या को समझ नहीं आया। उसने रोते-रोते बंदर की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘वो मेरा बैग, उसने छीन लिया है।’ लड़की ने उसे चुप कराया और एक छलांग लगाकर दीवार पर चढ़ गई। उसने अपनी जेब से एक केला निकाला और दीवार पर रख दिया। बंदर ने बैग को फेंका और केले पर झपटा। लड़की तुरंत नीचे कूद गई। बैग उठाया और वान्या के साथ-साथ चलने लगी।
वान्या ने बैग पकड़ कर कहा, ‘थैंक्यू, आप बैग मुझे दे दो और अपना काम कर लो।’ लड़की ने बैग नहीं दिया और वान्या के साथ-साथ चलती रही। मम्मी घर के बाहर ही मिल गई। वो वान्या को लाने के लिए घर से निकली थी।
‘ये कौन है?’ मम्मी ने पूछा तो उस लड़की ने ही जवाब दिया। ‘अरे आंटी, इस कालोनी में बंदर बहुत हैं, इसका बैग छीनकर भाग गया था। वो तो केला था मेरे पास इसलिए बैग फेंक दिया उसने, नहीं तो सारी किताबें पढ़ लेता आज ही।’ मम्मी ने वान्या को अंदर भेजकर उसे कुछ पैसे देने चाहे मगर उसने लेने से मना कर दिया। वान्या ने घर में मम्मी को फिर से पूरी बात बताई और बोली, ‘मम्मी वो कूड़ेदान में काम करती है। क्या हम उसकी मदद नहीं कर सकते हैं?’
वान्या के सवाल पर मम्मी ने तुरंत तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अगले ही दिन वान्या के स्कूल गईं। दो दिन बाद ही उस लड़की को अपने स्कूल में स्कूली वर्दी में देख करवान्या चौंक गई। सब बच्चे उसका मजाक बना रहे थे। ‘आप मेरे साथ आओ, साथ में लंच करते हैं।’ वान्या ने बुलाया तो, वह उसके साथ आ गई। काफी परेशान लग रही थी। अगले ही दिन से खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो रही थीं, इसलिए ज्यादातर बच्चे शिक्षक के साथ मैदान में थे। वान्या अपना काम पूरा करने के लिए कक्षा में ही रुक गई थी। वान्या ने उसका नाम पूछा तो उसने बताया, ‘सुषमा’। छुट्टी होने तक दोनों बातें करती रहीं।
अगले दिन सब बच्चे मैदान में बैठे। सभी टीचर भी वहीं बैठे हुए थे। खेल प्रतियोगिता में सभी बच्चों को भाग लेना अनिवार्य था, इसलिए वान्या भी मैदान में बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही थी। तभी उसने देखा कि सुषमा दौड़ में जीत गई है। केवल दौड़ में ही नहीं ऊंची कूद में भी वही अव्वल रही थी। पहले दिन का खेल खत्म होने पर सब बच्चे सुषमा के लिए तालियां बजा रहे थे। टीचर और प्रिंसिपल ने भी उसे अपने पास बुलाकर शाबाशी दी। सभी बच्चे उससे दोस्ती करने के लिए उतावले हो रहे थे। सुषमा दौड़कर, सबसे पीछा छुड़ाकर वान्या के पास आकर बैठ गई। ‘मेरी बस में चलोगी तुम?’ वान्या ने भोलेपन से पूछा।
‘नहीं। मुझे हास्टल में ही रुकना होगा। खेल प्रतियोगिताओं में जीत जाती हूं तो स्कूल में भर्ती हो जाऊंगी।’ तभी टीचर ने उसे बुला लिया। अगले दिन होने वाली प्रतियोगिताओं की तैयारी करने के लिए। ‘मम्मी मैंने सुषमा को स्कूल में देखा।’ वान्या ने घर जाकर मम्मी को बताया। मम्मी मुस्कुराकर वान्या के कपड़े लेकर आ गई स्कूली वर्दी बदलने के लिए।
पूरे एक हफ्ते तक खेल प्रतियोगिता चलती रही। समापन समारोह में चेयरमैन सर ने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार लेने के लिए सुषमा को बुलाया। प्रिंसिपल ने भी अपने भाषण में उसकी तारीफ करते हुए घोषणा की, ‘सुषमा जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी की प्रतिभा निखारने के लिए हमने उसे अपने स्कूल में खेल कोटे के तहत दाखिला दे दिया है। वह स्कूल के हास्टल में ही रहेगी ताकि रोज शाम को होने वाले अभ्यास में शामिल हो सके। उसकी पढ़ाई, छात्रावास और प्रशिक्षण का पूरा खर्च स्कूल फंड से दिया जाएगा।’
वान्या की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसे थोड़ा-सा बुरा लगा कि सुषमा उसकी बस में नहीं आएगी, लेकिन उससे भी अच्छा लगा कि सुषमा अब स्कूल जा पाएगी और उसे कचरा बीनने का काम नहीं करना पड़ेगा। घर आते ही उसने पूरी बात मम्मी को बताई तो मम्मी ने भी अपना राज खोल दिया। ‘प्रिंसिपल मैम मेरी दोस्त हैं। मैंने उन्हें सुषमा की प्रतिभा के बारे में बताया तो उन्होंने उसका खेल का टेस्ट लिया और स्कूल में दाखिला दे दिया।’ वान्या नाराज थी कि मम्मी ने उससे दो बातें क्यों छुपाईं? पहली कि प्रिंसिपल मैम उनकी दोस्त हैं। दूसरी बात उन्होंने ही सुषमा को स्कूल भेजा है। पर वह खुश भी थी। ‘सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी की दोस्त हूं मैं। वो मुझसे ही बात करती है और मेरे साथ ही लंच करती है।’
