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बेटी से संसार

ना तड़प ना तलाश ना प्यास ना अंधविश्वास, न मैं ना तुम बस हम ही हम। इजहार जब, इकरार तब प्यार अब खास सब, ना मैं ना तुम बस हम ही हम।

बेटियां हैं तो यह संसार है। बिना बेटियों के न तो इस जगत का कोई अस्तित्व है और न ही समाज का ही है। (Source: getty images, file)

बेटी से संसार और हम ही हम- पढ़‍िए मृदुला घई की कविताएं
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जन्मा एक पत्थर ने
पत्थर का एक टुकड़ा
मुरझाया सबका मुखड़ा
एक दुखड़ा और गहरी टीस
हुआ कुछ न दुआ से
मांगा था बेटा खुदा से
पर आई लड़की कमबख्त।
समय ने ली करवट
हटी दिल की सलवट
पत्थर से बनी परी
किलकारियों की झड़ी,
पायल की झंकार
हंसी की खनकार
चहकता घर-द्वार,
उसी की पुकार
नन्हें नन्हें पांव/प्यार की छांव
नाजों का पलना
बचपन का ढलना।
संभलना और फिसलना
किया खुद से दूर
फिर निभाया दस्तूर
फिर जन्मा एक पत्थर ने
पत्थर का टुकड़ा
मुरझाया वही मुखड़ा
हाय कैसा व्यापार हुआ
ना जाने कितने पैगाम दिए
भर-भर पैसे थाम दिये
फिर एक दिन
डायन का इलजाम हुआ
परी का सपना खाक हुआ
दिल का टुकड़ा राख हुआ।
एक अहसास हुआ
लाड़ दिया प्यार दिया
ना शिक्षा दी ना ज्ञान दिया
कच्ची उम्र में ब्याह दिया
हाय ये क्या किया
दिल दहला दिया।
विचार-विमर्श किया,
कटे पंख फिर उगे
सोये सपने फिर जगे
नई उड़ान मिली
खूब शान बढ़ी
न कष्ट सहा/न पत्थर रहा।
आई जीवन ललक
मिली नई झलक
मांगी बेटी खुदा से
उसकी सदा से
नव-जीवन संचार
सुंदर सुखी संसार
परियों सा प्यार
बेटी से महकता संसार।

हम ही हम
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ना मैं ना तुम बस हम ही हम।
तड़प ही तड़प प्यास ही प्यास
तलाश ही तलाश आग ही आग,
ना मैं ना तुम बस हम ही हम।
आशंकाएं ही आशंकाएं ख्वाब ही ख्वाब
चाहत ही चाहत प्रेम ही प्रेम,
ना मैं ना तुम बस हम ही हम।

समर्पण ही समर्पण
एहसास ही एहसास
अपनापन ही अपनापन
प्यार ही प्यार,
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम

ना दर्द ना टीस
ना चटकन ना टूटन
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम
ना बेचैनी न बेकरारी
ना शिकन ना आंसू,
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम।

ना झूठ ना फरेब
ना मजबूरी ना दूरी
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम।

सुख ही सुख
खुशी ही खुशी
चैन ही चैन
संतुष्टि ही संतुष्टि
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम।

ना तड़प ना तलाश
ना प्यास ना अंधविश्वास
न मैं ना तुम
बस हम ही हम
इजहार जब, इकरार तब
प्यार अब खास सब
ना मैं ना तुम
बस हम ही हम।

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