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महोत्सव में देशी और विदेशी नाटकों का तड़का

फिलिपींस के नाट्य दल ‘तेत्रो गुइंदेगन’ की प्रस्तुति ‘पैच्ड’ चार कलाकारों द्वारा अभिनीत एक गैर-शाब्दिक प्रस्तुति थी जिसका लेखन व निर्देशन फेलिमोन ब्लैंको ने किया था।

Indian Play, Foreign Play, Internationsl theatre Mahotsva
नाटक डस्ट टू डस्ट में मृत लड़की की आत्मा विचरती हुई।
आशीर्वाद रंगमंडल द्वारा आयोजित बिहार के प्रथम अंतर्राष्ट्रीय थिएटर महोत्सव के दूसरे चरण में नाटक ‘पैच्ड’, ‘डस्ट टू डस्ट’ और ‘जमलीला’ का प्रदर्शन किया गया। फिलिपींस के नाट्य दल ‘तेत्रो गुइंदेगन’ की प्रस्तुति ‘पैच्ड’ चार कलाकारों द्वारा अभिनीत एक गैर-शाब्दिक प्रस्तुति थी जिसका लेखन व निर्देशन फेलिमोन ब्लैंको ने किया था। यह नाटक मानवीय संबंधों में प्रेम, घृणा और संबंधों में आने-वाले उतार चढ़ाव पर आधारित था।

प्रस्तुति में एक काल्पनिक स्थल का सेट के रूप में इस्तेमाल किया गया था जहां ये चारों चरित्र मिलते हैं और एक-दूसरे की प्रेम और घृणा की कहानियों को परत दर परत उघाड़ते हैं। दरअसल यह नाटक बहुत अलग तरीके से उलझे हुए, आपस में गुत्थमगुत्था हुए संबंधों के बारे में बात करता है जहां ऊपर से तो सबकुछ शांतिपूर्ण दिखाई देता है लेकिन भीतर ही भीतर संबंधों में बदले की आग सुलगती रहती है। एक शीतयुद्ध-सा चलता रहता है। इस नाटक में मूड म्यूजिक और वीडियो फुटेज का भी उम्दा इस्तेमाल किया गया था। मंच पर कैरेन लिंगाने, आर्ची लिंगाने, माइकल एंजेलो प्लाजा और डेजीमे देल्वो थे।

नाटक ‘डस्ट टू डस्ट’ परफॉर्मोसा थिएटर, ताइवान की प्रस्तुति थी जिसका निर्देशन किया था युवा निर्देशिका हंग पेई चिंग ने। ‘डस्ट टू डस्ट’ कहानी है एक लड़की हियाओ-युई की जो चीन के युन्नान प्रांत के लिजियांग के समुद्र तट पर मृत पाई जाती है। उसकी अंत्येष्टि पर उसके अभिभावक इस बात पर बहस करते हैं कि उसकी अंत्येष्टि का समारोह कैसे मनाया जाएगा और उसे कैसे अपनी मातृभूमि ताइवान भेजा जाएगा। अंत्येष्टि समारोह जैसे ही खत्म होता है उसकी आत्मा जीवित हो उठती है। वह जीवन में वापस आ जाती है और अपनी भूतकाल की स्मृतियों से गुजरने लगती है जहां कभी उसे अपने माता-पिता से अपने विवादित संबंध दिखाई पड़ते हैं और कभी अपने दो सबसे अच्छे दोस्तों से प्रेम और घृणा के संबंध दिखाई पड़ते हैं। और उसकी मृत्यु के राज का पर्दाफाश होता है।

यह कितना त्रासद है कि अंत में उसकी यात्रा वहां खत्म होती है जहां उसे वापस घर ही लौटना है। मन से या बेमन से लौटना उसी धूल में है। मंच पर पो युआन चुंग, पेई-चिश्न, चेन-चिह, लिया, यिंग-जू, साई, येन-फंग, यू ने अपने अभिनय से भौतिक और पराभौतिक के बीच जो संतुलन स्थापित किया वह अद्भुत था। के-चु लाइ की प्रकाश परिकल्पना ने जो पराभौतिक वातावरण बनाया वह काबिल-ए-तारीफ था। ची-चेन वांग ने वेशभूषा पर अच्छा काम किया और ससु-नुंग हुआंग का संगीत इस नाटक की जान बना।

नाटक ‘जमलीला’ राजस्थान के रम्मट नाट्य समूह की प्रस्तुति थी जिसकी भाषा हिंदी और राजस्थानी थी और इसका लेखन और निर्देशन किया था प्रसिद्ध निर्देशक अर्जुन देव चारण ने जो वर्तमान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के उपाध्यक्ष हैं। यह नाटक एक काल्पनिक कथा पर आधारित है जिसमें एक हाथी की अकाल मौत और यमलोक के बहाने हमारे समाज, हमारी पूरी व्यवस्था पर व्यंग्य करता है।

दरअसल यह एक सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य है। इस नाटक का नाम ‘जमलीला’ इसलिए है क्योंकि यह भूतों का कोरस है। भूतों के गायन और यमलोक के बहाने इस दुनिया में व्याप्त दुराचार को निर्देशक ने इंगित किया है। मरने के बाद हाथी की आत्मा जब यमलोक पहुंचती है तो वह यमराज को बताती है कि वह अगर यह समझता है कि वही शक्तिशाली है तो ये उसका भ्रम है। उसके देश भारत का एक नेता उसकी गद्दी हिला सकता है और वह यह साबित करके दिखाता है।

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