‘वरुण, आज घूम-घूमकर पढ़ाई क्यों कर रहे हो?’ पापा ने पूछा। ‘ऐसी कोई खास बात नहीं।’ वरुण बोला। ‘बेटा, हमेशा तुम कुर्सी-मेज पर बैठकर ही पढ़ाई करते हो। फिर यह आज घूम-घूमकर क्यों पढ़ रहे हो? बताओ क्या बात है, बेटू?’ वहां पहुंची मम्मी ने मुलायम स्वर में वरुण से पूछा। ‘मेरे स्कूल के दोस्त मोहित ने कहा था कि घूम-घूम के पढ़ने से अच्छी तरह याद होता है।’ ‘बेटू, घूम-घूमकर पढ़ने से तुम्हें ज्यादा अच्छी तरह से याद हो रहा है क्या?’ मम्मी पूछने लगीं।

कुछ देर सोचने के बाद वरुण कहने लगा, ‘मुझे तो उल्टे ज्यादा समय लग रहा है याद करने में। कुर्सी-मेज पर बैठकर अच्छी तरह याद हो जाता था और वो भी जल्दी-जल्दी।’

‘तो बेटा, जैसे तुम्हें कुर्सी-मेज पर बैठकर अच्छी तरह याद होता है, उसी तरह मोहित को घूम-घूमकर अच्छी तरह याद होता होगा। जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो मुझे छत पर जाकर खुले में पढ़ना अच्छा लगता था।’ पापा बताने लगे।

‘जब मैं पढ़ती थी तो मुझे घर के बगीचे में पेड़-पौधों के बीच बैठकर पढ़ाई करना बहुत अच्छा लगता था। इतने सालों से तुम कुर्सी-मेज पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हो, और हमेशा अच्छे अंक ला रहे हो। इसलिए तुम्हारा पढ़ाई करने का तरीका ठीक है, बेटू।’ मम्मी ने भी समझाया।

‘ठीक है।’ वरुण ने जवाब दिया। ‘बेचारे कुर्सी-मेज भी उदास हो गए होंगे कि वरुण कहां चला गया हमें छोड़कर!’ मम्मी ने कहा तो पापा और वरुण मुस्कुराने लगे।

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किसी के कुछ भी सलाह देने पर बिना सोचे-विचारे उस पर अमल शुरू कर देने की आदत वरुण को थी। कभी कोई उसे कह देता कि घड़ी बाईं के बदले दाईं कलाई पर बांधनी चाहिए, इससे दिमाग तेज होता है, तो वह अपनी घड़ी दाएं हाथ पर बांधना शुरू कर देता।

भले ही बाद में वक्त देखते समय उसकी नजर आदतन पहले बाईं कलाई पर ही क्यों न पड़ती रहे। कोई उसे कह देता कि सिर में बाईं के बदले दाईं तरफ मांग निकालने से आदमी ज्यादा सुंदर और प्रभावशाली दिखता है, तो वह उसी दिन से ऐसा करना शुरू कर देता। यह बात अलग है कि ऐसा करने पर उसके बाल बिखरे-से रहते और बड़े अजीब-से लगते।

एक बार पार्क में खेलते समय वरुण ने एक अनजान अंकल को किसी दूसरे अंकल से यह कहते सुन लिया कि वे रात के दो-दो बजे तक पढ़ा करते थे और कक्षा में हमेशा प्रथम आया करते थे। उसी रात से उसने भी रात को देर तक पढ़ाई करनी चाही, हालांकि अब तक वह रात के दस बजे तक पढ़ाई करके सो जाता था। मगर रात को देर तक पढ़ाई करने की उसकी योजना सफल न हो पाई, क्योंकि ग्यारह बजे तक भी वह बड़ी मुश्किल से जगा रह पाता था और फिर पढ़ते-पढ़ते कुर्सी-मेज पर ही उसे नींद आ जाती।

मम्मी-पापा वरुण को समझाते रहते कि किसी की कोई भी सलाह मानने से पहले उस पर सोच-विचार कर लेना चाहिए। अगर वह सलाह ठीक लगे, तभी उस पर अमल करना चाहिए, मगर मम्मी-पापा के समझाने का वरुण पर ज्यादा असर होता नहीं था।

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एक दिन शाम के समय दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलकर वरुण जब घर वापस आया तो उसने देखा कि सारे घर में अंधेरा छाया हुआ है। ‘मम्मी, बत्तियां क्यों बंद कर रखी हैं सारे घर की?’ ‘बेटू, मेरी एक सहेली ने बताया है कि हर रोज शाम को एक घंटे तक बत्तियां बंद रखने से घर में शांतिपूर्ण वातावरण रहता है।’ मम्मी ने जवाब दिया।

‘कितनी शांति लग रही है न घर में!’ ‘पर बगैर लाइट के काम कैसे चलेगा? मुझे होमवर्क पूरा करना है। टीवी भी देखना है।’ वरुण नाराजगी-भरे स्वर में बोला। ‘अरे हां, टीवी की तुमने अच्छी याद दिलाई। आज हमारे आफिस में कोई कह रहा था कि शाम को टीवी न देखने से प्रमोशन जल्दी मिलता है।’ पापा कह रहे थे।

‘मगर पापा, शाम को टीवी न देखने से आपको प्रमोशन जल्दी कैसे मिल जाएगा?’ ‘बेटा, जिन्होंने कहा है, उन्हें तो मिला था जल्दी प्रमोशन। जब उन्हें मिला, तो मुझे भी मिलेगा न।’ पापा फिर बोले। ‘ऐसे थोड़े ही न मिलता है जल्दी प्रमोशन! मुझे तो देखना है टीवी! मेरा मनपसंद सीरियल निकल जाएगा! चलो ठीक है, मम्मी। अब खाना तो खा ही लेते हैं। बन गया क्या खाना?’ ‘खाना तो रात के दस बजे के बाद ही बनेगा।

वो पड़ोसवाली करुणा ने बताया है कि रात दस बजे के बाद खाना खाने से वह अच्छी तरह हजम होता है।’ ‘मम्मी अगर ऐसा करने से करुणा आंटी को कुछ फायदा हुआ है, तो इसका मतलब यह तो नहीं कि हमें भी होगा। इस तरह एक घंटे तक लाइट बंद करके, शाम को टीवी न चलाकर और रात को दस बजे के बाद खाना खाकर हमारा क्या फायदा होनेवाला है। घर का सारा रूटीन गड़बड़ करके उलटे नुकसान ही होगा।’

वरुण ने तैश में आकर बहुत कुछ कह डाला। तभी मम्मी ने आगे बढ़कर बत्ती जला दी और बोली, ‘हम लोग भी यही सब सुनना चाहते थे तुम्हारे मुंह से। यह सब तो हमने तुम्हें समझाने के लिए किया था, बेटू!’ मम्मी ने बात साफ की। वरुण कुछ देर तक सोचता रहा और फिर कहने लगा, ‘अब मैं किसी की दी हुई सलाह को बगैर समझे और परखे, इस तरह अंधाधुंध नहीं अपनाऊंगा।’ ‘मुंह-हाथ धो लो। खाना भी तैयार है। तुम्हारा मनपसंद मटर-पुलाव और साथ में उड़द साबुत की दाल।’ मम्मी ने कहा। खुशी से चहक कर वरुण बाथरूम की तरफ भागा।